भवन निर्माण मजदूरों पर मेहरबान हुई फडणवीस सरकार

प्राकृतिक मृत्यु पर 3.50 लाख, दुर्घटना में मौत पर 6.50 लाख की सहायता

* दिव्यांग होने पर भी मिलेगा आर्थिक सहयोग, कामगार मंत्री आकाश फुंडकर ने दी जानकारी
मुंबई/दि.14- महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के निर्माण मजदूरों और उनके परिवारों को बड़ी राहत देते हुए सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी की है. श्रम मंत्री आकाश फुंडकर के विभाग द्वारा जारी शासन निर्णय के अनुसार अब पंजीकृत निर्माण श्रमिक की प्राकृतिक मृत्यु होने पर परिवार को 3 लाख 50 हजार रुपये, जबकि दुर्घटनावश मृत्यु होने पर 6 लाख 50 हजार रुपये तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी. इसके अलावा किसी श्रमिक के दिव्यांग होने पर उसे 2 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी. सरकार के इस फैसले को राज्य के लाखों निर्माण श्रमिकों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है. श्रमिक संगठनों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने इस निर्णय का स्वागत किया है.
श्रम मंत्री आकाश फुंडकर ने कहा कि निर्माण श्रमिक समाज का सबसे महत्वपूर्ण और मेहनतकश वर्ग है. किसी दुर्घटना या मृत्यु की स्थिति में परिवार आर्थिक संकट में घिर जाता है. ऐसे परिवारों को सहारा देने के उद्देश्य से सहायता राशि में वृद्धि का निर्णय लिया गया है. उन्होंने बताया कि अब प्राकृतिक मृत्यु पर 3.50 लाख रुपये, दुर्घटनाजन्य मृत्यु पर 6.50 लाख रुपये और दिव्यांगता की स्थिति में 2 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी. इसके अलावा भविष्य में श्रमिकों के लिए सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन जैसी व्यवस्था तथा महिला श्रमिकों को मातृत्व लाभ देने की दिशा में भी सरकार काम कर रही है.
श्रम मंत्री फुंडकर ने स्पष्ट किया कि यह लाभ केवल उन निर्माण श्रमिकों को मिलेगा जो महाराष्ट्र भवन एवं अन्य निर्माण कामगार कल्याण मंडल में पंजीकृत हैं. सरकार पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए भी कदम उठा रही है. उन्होंने बताया कि पहले पंजीकरण के लिए ग्रामसेवक का प्रमाणपत्र आवश्यक होता था, लेकिन कई मामलों में प्रमाणपत्र मिलने में कठिनाई आती थी. अब तहसीलदार, ठेकेदार और अन्य अधिकृत माध्यमों से भी आवश्यक प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है ताकि अधिक से अधिक श्रमिक योजना का लाभ ले सकें.
इसी बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने श्रम कानूनों में प्रस्तावित सुधारों को लेकर अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि किसी भी संशोधन में श्रमिकों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए. मुख्यमंत्री ने वर्षा निवास पर आयोजित बैठक में कहा कि केंद्र सरकार के नए श्रम कानूनों के अनुरूप राज्य के नियमों में आवश्यक बदलाव किए जाएं, लेकिन यह सुनिश्चित किया जाए कि श्रमिकों के अधिकार और सुरक्षा प्रभावित न हों. उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों, घरेलू कामगारों, माथाड़ी श्रमिकों और निर्माण श्रमिकों के लिए अलग-अलग योजनाएं तैयार की जाएं, ताकि सभी वर्गों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिल सके. बैठक में महिला श्रमिकों को मातृत्व लाभ, असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए कल्याणकारी योजनाएं तथा विभिन्न श्रमिक मंडलों की सदस्यता व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने पर भी चर्चा हुई.

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