बाघिन के सामने सहमा तेंदुआ, गोरेवाड़ा भेजने की तैयारी

सिपना वन्यजीव एक्शन मोड पर

अमरावती/दि.2– चंद्रपुर से लाई गई आदमखोर बाघिन को लेकर परतवाड़ा के टीटीसी (ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर) में एक नई स्थिति पैदा हो गई है. बाघिन के सामने रखे गए तेंदुए के व्यवहार में डर साफ दिखाई दे रहा है, जिसके चलते वन्यजीव विभाग ने उसे जल्द से जल्द नागपुर के गोरेवाड़ा रेस्क्यू सेंटर भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.
जानकारी के अनुसार, टीटीसी सेंटर में बाघिन और तेंदुए को जिन पिंजरों में रखा गया है, उनके दरवाजे आमने-सामने हैं. जैसे ही तेंदुआ सामने आता है, बाघिन आक्रामक प्रतिक्रिया देने लगती है और लगातार गुर्राने लगती है. इससे तेंदुआ बुरी तरह सहम गया है और अधिकांश समय अपने पिंजरे के कोने में दुबका रहता है. वन विभाग और पशु चिकित्सकों का मानना है कि तेंदुआ स्वभाव से संवेदनशील और अपेक्षाकृत छोटा शिकारी होता है, इसलिए बाघिन की मौजूदगी उसके लिए तनाव का कारण बन रही है. टीटीसी सेंटर के पशु चिकित्सक डॉ. चंद्रकांत धनधर बाघिन और तेंदुए दोनों की निगरानी कर रहे हैं. उन्होंने भी इस संबंध में रिपोर्ट तैयार कर वन विभाग को भेजी है. सूत्रों के मुताबिक, सिपना वन्यजीव विभाग ने मेलघाट टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक से तेंदुए को तत्काल नागपुर के गोरेवाड़ा वन्यजीव बचाव केंद्र भेजने की अनुमति मांगी है. अनुमति मिलते ही तेंदुए को वहां स्थानांतरित कर दिया जाएगा.

* बाघिन के लिए जिंदा बकरा लाया गया
टीटीसी सेंटर में रखी गई बाघिन के भोजन को लेकर भी चर्चा हो रही है. बताया जा रहा है कि उसके लिए बीफ उपलब्ध नहीं होने के कारण एक जिंदा बकरा लाकर परिसर में बांधा गया है. बारिश के बीच बकरा वहीं रखा गया है. पिछले कुछ दिनों से उसे चारा उपलब्ध कराया जा रहा है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि बाघिन के भोजन के लिए अब तक कितने बकरों का उपयोग किया गया है. वन विभाग के सूत्रों का कहना है कि तेंदुए को वर्तमान माहौल में रखना उचित नहीं है. तेंदुए की मानसिक स्थिति और सुरक्षा को देखते हुए उसे जल्द से जल्द दूसरे सुरक्षित केंद्र में भेजना आवश्यक माना जा रहा है. अब सभी की नजरें मेलघाट टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक की अनुमति पर टिकी हैं. अनुमति मिलते ही तेंदुए को गोरेवाड़ा स्थानांतरित कर दिया जाएगा.

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