मेलघाट में चारे-पानी के संकट से पशुपालक बेहाल

भाजपा और पशुपालकों ने चिखलदरा तहसील कार्यालय पर किया प्रदर्शन

वन क्षेत्र में चराई की अनुमति देने और पशुओं के लिए चारे-पानी की व्यवस्था करने की मांग
चिखलदरा /दि.14- मेलघाट के दुर्गम क्षेत्र में पशुओं के लिए चारे और पानी की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है. चिखलदरा तहसील के पंढरी, लावड़ा, अलाडोह और शाहपुर गांवों में पशुपालक इस संकट से जूझ रहे हैं. समस्या की ओर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने और तत्काल समाधान की मांग को लेकर भारतीय जनता पार्टी के पदाधिकारियों तथा स्थानीय पशुपालकों ने चिखलदरा तहसील कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया और तहसीलदार को विस्तृत ज्ञापन सौंपा.
ज्ञापन के मुताबिक पंढरी गांव में लगभग 900, लावड़ा में 900, अलाडोह में 800 और शाहपुर में करीब 900 पशु हैं. इन चारों क्षेत्रों में पशुओं की कुल संख्या लगभग 4,000 से 4,500 के बीच बताई गई है. वन विभाग के नियमों के कारण पशुओं को चराई के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं हो पा रही है. इसके साथ ही पीने के पानी की कमी ने पशुपालकों की परेशानी और बढ़ा दी है. पशुओं के लिए पर्याप्त चारा और पानी उपलब्ध नहीं होने से स्थानीय पशुपालकों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि उनकी रोजी-रोटी काफी हद तक पशुपालन पर निर्भर है. ऐसे में प्रशासन की ओर से समय रहते ठोस कदम उठाना जरूरी है.
* वन क्षेत्र में चराई की अनुमति देने की मांग
पशुपालकों ने पंढरी गांव के समीप वन क्षेत्र के कंपार्टमेंट नंबर 38 को नियमानुसार पशुओं की चराई के लिए तत्काल खोलने की मांग की है. इसके अलावा लवादा किला क्षेत्र और आसपास के अंदरूनी इलाकों में भी नियमों के तहत आवश्यक छूट देने तथा पशुओं के लिए चारा-पानी की व्यवस्था करने की मांग की गई है. ज्ञापन में अलाडोह और शाहपुर गांवों के पशुपालकों की समस्याओं का भी उल्लेख किया गया है. ग्रामीणों ने वन विभाग की अनुमति से पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया है, ताकि पशुपालकों को राहत मिल सके.
* वैराट देवी मंदिर खोलने की भी मांग
पशुपालकों की समस्याओं के साथ ही ज्ञापन में क्षेत्र के श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं का मुद्दा भी उठाया गया है. ग्रामीणों ने वैराट देवी मंदिर को श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोलने की मांग की है.
* राजस्व और वन विभाग के बीच समन्वय जरूरी
ज्ञापन में कहा गया है कि स्थानीय लोगों की आजीविका पशुपालन पर निर्भर है. इसलिए राजस्व विभाग और वन विभाग को आपसी समन्वय स्थापित कर चारे-पानी की समस्या का तत्काल समाधान निकालना चाहिए. पशुओं के लिए चराई की व्यवस्था और पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन को शीघ्र निर्णय लेने की मांग की गई है. इस ज्ञापन पर आल्लाह कलोती, राजेंद्रसिंह सोमवंशी, यशवंत काले, राजेश मांगलकर, नरेशसिंह जोंधले, अनवर हुसैन, शंकर खड़के, नामदेव खड़के, बाबू हेकड़े, वेदांत सुरपाटणे सहित क्षेत्र के अन्य नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के हस्ताक्षर हैं.

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