राष्ट्रवादी में बड़ा बवाल!

पार्थ पवार-भुजबल के बीच जोरदार बहस

* कुछ टेंडर्स को लेकर रार होने की चर्चा
* अपने ठेकेदार को दिलाना है काम
मुंबई /दि.29- राष्ट्रवादी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के मंत्रिमंडल में मंत्री छगन भुजबल और सांसद पार्थ पवार के बीच जोरदार शाब्दिक बहस होने की जानकारी सूत्रों के हवाले से सामने आ रही है. ठेकेदार को लेकर दोनों के बीच विवाद होने की जानकारी सामने आई है.
* पार्थ पवार का क्या कहना था?
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की ओर से परिवहन टेंडर निकाले जा रहे थे. राज्य स्तर का एक टेंडर किसी निश्चित ठेकेदार को दिया जाए, इसके लिए पार्थ पवार द्वारा ठेकेदार को भुजबल के पास भेजा गया था. हालांकि, निश्चित ठेकेदार को टेंडर देने से भुजबल के इनकार करने पर, इसी मुद्दे को लेकर दोनों के बीच शाब्दिक तकरार होने की जानकारी मिल रही है. ’आज तक पार्टी के किसी भी वरिष्ठ नेता ने मुझे ऐसा नहीं कहा था’, इन शब्दों में भुजबल ने नाराजगी व्यक्त की है.
* पहले पटेल, तटकरे अब भुजबल
अजित पवार के निधन के बाद राष्ट्रवादी में आंतरिक संघर्ष सामने आ रहे हैं. शुरुआत में प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे से संबंधित नाराजगी का मामला सामने आया था. पार्थ पवार और इन वरिष्ठ नेताओं के बीच विवाद होने की खबरें सामने आई थीं. यह विवाद शांत हो ही रहा था कि अब छगन भुजबल के संदर्भ में भी ऐसा ही मामला सामने आया है. यहाँ भी पार्थ पवार और भुजबल आमने-सामने आ गए हैं.
* भुजबल का क्या कहना है?
हम दोनों के बीच किसी भी तरह की कोई बहस नहीं हुई. कुछ चीजें समझदारी से करनी होती हैं. इसका मतलब यह नहीं है कि हमारे बीच विवाद हुआ है. टेंडर कोर्ट में अटका है. मंत्रिमंडल ने उसे मंजूरी दी है. टेंडर निकालने की ऑनलाइन प्रक्रिया है. उसके माध्यम से जो पात्र होंगे, उन्हें टेंडर दिया जाता है. ऐसे ही किसे देना है, कहकर टेंडर कैसे दिया जा सकता है? वर्तमान में निविदा दस्तावेजों की जांच और अंतिम प्रक्रिया अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली राज्य स्तरीय समिति द्वारा शुरू है. किसी भी ट्रांसपोर्टर को कार्यादेश नहीं दिए गए हैं, ऐसा छगन भुजबल ने कहा.
* पार्थ पवार ने क्या कहा?
पार्थ पवार ने भी ऐसा कोई विवाद न होने की बात कही है. हमारे बारे में, विशेषकर मेरे बारे में, जानबूझकर गलत खबरें दी जा रही हैं. ऐसा कुछ भी नहीं हुआ. मैंने किसी भी सरकारी काम में हस्तक्षेप नहीं किया है, ऐसा पार्थ पवार ने अपना पक्ष रखते हुए कहा. इससे पहले पार्टी पर वर्चस्व किसका हो, इस पर प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे बनाम पार्थ पवार संघर्ष देखने को मिला था. अब फिर से एक वरिष्ठ नेता के साथ पार्थ पवार का विवाद हुआ है. हालांकि, इस बारे में वस्तुस्थिति क्या है, इस संदर्भ में पार्थ या भुजबल का सामने आकर बताना महत्वपूर्ण होगा. जिस दौर से पार्टी गुजर रही है, उस स्थिति में पार्थ पवार का इस तरह वरिष्ठ नेताओं के साथ बार-बार टकराव होना कहीं न कहीं पार्टी के लिए घातक हो सकता है, ऐसा पार्टी के हितचिंतकों का कहना है. इस संदर्भ में दोनों क्या भूमिका लेते हैं, यह देखना महत्वपूर्ण होगा.

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