अमरावती जिला बैंक के इतिहास में दर्ज हैं कई बड़े नाम
64 वर्षों का सफर, 25 अध्यक्ष और सहकार की राजनीति का केंद्र

* स्व. नारायणराव देशमुख से लेकर बच्चू कडू तक पहुंचा सफर
* कई भूतपूर्व अध्यक्ष एक से अधिक बार संभाल चुके बैंक की कमान
अमरावती/दि.29- अमरावती जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक (एडीसीसी बैंक) का इतिहास केवल एक बैंकिंग संस्था का इतिहास नहीं है, बल्कि यह जिले की सहकार, कृषि और राजनीतिक व्यवस्था के उतार-चढ़ाव का भी साक्षी रहा है. वर्ष 1962 में स्थापित इस बैंक ने पिछले 64 वर्षों में जिले के लाखों किसानों, सैकड़ों सहकारी संस्थाओं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को वित्तीय आधार प्रदान किया है. इसी दौरान बैंक के अध्यक्ष पद पर 25 नेताओं ने अपनी छाप छोड़ी है. इनमें कई ऐसे नाम शामिल हैं जिन्होंने न केवल बैंक का नेतृत्व किया, बल्कि जिले की राजनीति और सहकार क्षेत्र को भी दिशा दी. आज जब जिला बैंक के संभावित चुनावों को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो रही है, तब बैंक के गौरवशाली इतिहास और उसके अध्यक्ष पद पर आसीन रहे नेताओं की भूमिका फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है. वर्तमान में बैंक की कमान विधायक ओमप्रकाश उर्फ बच्चू कडू के हाथों में है, जो अक्टूबर 2023 से अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं.
* स्व. नारायणराव देशमुख बने थे पहले अध्यक्ष
बैंक के इतिहास का पहला अध्याय स्वर्गीय नारायणराव जानराव देशमुख के नाम दर्ज है. उन्होंने 25 जनवरी 1962 को बैंक के प्रथम अध्यक्ष के रूप में पदभार ग्रहण किया. उस समय जिले में सहकार आंदोलन अपने शुरुआती दौर में था और किसानों तक संस्थागत ऋण पहुंचाना बड़ी चुनौती माना जाता था. देशमुख के नेतृत्व में बैंक ने अपनी शुरुआती नींव मजबूत की. उनके बाद स्व. भीमराव यादवराव पाटिल और फिर स्व. भाऊराव गुलाबराव जाधव ने बैंक का नेतृत्व किया. विशेष रूप से भाऊराव जाधव का कार्यकाल बैंक के विस्तार और मजबूती के दौर के रूप में देखा जाता है. उन्होंने लगभग नौ वर्षों तक अध्यक्ष पद संभाला.
* कई दिग्गजों ने कई बार संभाली जिम्मेदारी
एडीसीसी बैंक के इतिहास में कुछ ऐसे नेता भी रहे जिन्होंने एक से अधिक बार अध्यक्ष पद संभालकर अपनी राजनीतिक और सहकारी ताकत का परिचय दिया. इनमें सबसे प्रमुख नाम स्व. भीमराव महादेवराव कालबांडे का है, जिन्होंने चार अलग-अलग कार्यकालों में बैंक की कमान संभाली. इसी तरह स्व. गोपालराव नारायणराव राजुरकर भी तीन बार अध्यक्ष बने. राजेंद्र नरसिंगराव देशमुख, अनिरुद्ध उर्फ बबलू देशमुख और सुधाकरराव भारसाकले भी ऐसे नेताओं में शामिल हैं जिन्हें अलग-अलग अवधियों में बैंक का नेतृत्व करने का अवसर मिला. विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी नेता का बार-बार अध्यक्ष चुना जाना उसकी सहकार क्षेत्र में मजबूत पकड़ और ग्रामीण संस्थाओं में प्रभाव का संकेत माना जाता है.
* महिला नेतृत्व को भी मिला अवसर
बैंक के इतिहास में महिला नेतृत्व का भी महत्वपूर्ण अध्याय दर्ज है. कंचनमाला कुलदीपराव गावंडे और बाद में उत्तरा विरेंद्र जगताप ने अध्यक्ष पद संभालकर यह साबित किया कि सहकार क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है.
* इन दिग्गजों ने संभाली अध्यक्ष पद की कमान
बैंक के इतिहास में स्व. नारायणराव जानराव देशमुख, स्व. भीमराव यादवराव पाटिल, स्व. भाऊराव गुलाबराव जाधव, स्व. प्रवीणराव पंजाबराव पाटिल, स्व. भीमराव महादेवराव कालबांडे, स्व. गोपालराव नारायणराव राजुरकर, ज्ञानेश्वर चंद्रभान भिसे, स्व. देविदासराव उत्तमराव बोबडे, स्व. बाबाराव वामनराव कडू, स्व. शंकरराव सदाशिवराव झोंबाडे, मनोज प्रभाकरराव भेंडे, स्व. गुणवंतराव विष्णुपंतराव साबले, नरेशचंद्र पंजाबराव ठाकरे, स्व. प्रमोदराव माणिकराव काले, राजेंद्र नरसिंगराव देशमुख, स्व. रामविजय मोतीरामजी विधले, अजय पाटिल टवलारकर, सुभाषराव जयवंतराव बोंडे, अनिरुद्ध उर्फ बबलू देशमुख, विलासराव रंगनाथराव महल्ले, कंचनमाला कुलदीपराव गावंडे, प्रा. प्रकाशराव बाबारावजी कालबांडे, सुधाकरराव नारायणराव भारसाकले, उत्तरा विरेंद्र जगताप तथा वर्तमान अध्यक्ष ओमप्रकाश उर्फ बच्चू कडू शामिल हैं.
* अब फिर चुनावी हलचल तेज
जिला बैंक के संभावित चुनावों की चर्चा के बीच सहकार जगत में नई राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं. विभिन्न गुट और सहकारी संस्थाएं अपनी-अपनी रणनीति बनाने में जुट गई हैं. ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सहकार की इस प्रतिष्ठित संस्था की बागडोर भविष्य में किसके हाथों में जाती है. फिलहाल इतना तय है कि छह दशक से अधिक के इतिहास में अमरावती जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक ने न केवल आर्थिक विकास में योगदान दिया है, बल्कि जिले की राजनीति और सहकार आंदोलन को भी नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. यही कारण है कि एडीसीसी बैंक का अध्यक्ष पद आज भी जिले की सबसे प्रतिष्ठित और प्रभावशाली जिम्मेदारियों में गिना जाता है.
* सहकार की राजनीति का सबसे प्रभावशाली केंद्र
अमरावती जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक को लंबे समय से जिले की सहकार राजनीति का सबसे बड़ा शक्ति केंद्र माना जाता रहा है. बैंक से जुड़े निर्णयों का सीधा असर हजारों किसानों, कृषि ऋण समितियों, दुग्ध संघों, सहकारी संस्थाओं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ता है. राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार जिला बैंक का अध्यक्ष पद केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि जिले में राजनीतिक प्रभाव का भी प्रतीक माना जाता है. यही कारण है कि बैंक के चुनाव हमेशा स्थानीय राजनीति का केंद्र बने रहते हैं और प्रमुख राजनीतिक दलों की नजर इस संस्था पर रहती है.
* किसानों की आर्थिक रीढ़ रही बैंक
एडीसीसी बैंक ने दशकों तक किसानों को फसल ऋण, कृषि निवेश, सिंचाई, पशुपालन और अन्य ग्रामीण विकास योजनाओं के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई. जिले की अधिकांश प्राथमिक कृषि साख समितियां इसी बैंक से जुड़ी हुई हैं. सहकार क्षेत्र के जानकार बताते हैं कि बैंक ने कई बार आर्थिक चुनौतियों और बदलते बैंकिंग नियमों के बावजूद अपनी भूमिका बनाए रखी. यही वजह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी इस बैंक को किसानों की आर्थिक रीढ़ माना जाता है.
* जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक में अब तक हुए 25 अध्यक्ष
भुतपूर्व अध्यक्षों के नाम कार्यकाल (कब से कब तक)
स्व. नारायणराव जानराव देशमुख 25 जनवरी 1962 से 18 फरवरी 1963
स्व. भीमराव यादवराव पाटिल 9 फरवरी 1963 से 9 नवंबर 1966
स्व. भाऊराव गुलाबराव जाधव 10 नवंबर 1966 से 22 जनवरी 1975
स्व. प्रवीणराव पंजाबराव पाटिल 23 जनवरी 1975 से 11 जून 1979
स्व. भीमराव महादेवराव कालबांडे 12 जून 1979 से 2 मार्च 1980, 14 फरवरी 1990 से 10 फरवरी 1991, 11 फरवरी 1991 से 5 अगस्त 1991 तथा 28 नवंबर 1995 से 15 फरवरी 1996
स्व. गोपालराव नारायणराव राजुरकर 3 मार्च 1980 से 27 फरवरी 1981, 10 जनवरी 1988 से 13 जनवरी 1989, 10 जनवरी 1992 से 9 फरवरी से 1993
ज्ञानेश्वर चंद्रभान भिसे 28 फरवरी 1981 से 9 दिसंबर 1981 व 16 जनवरी 1987 से 10 जनवरी 1988
स्व. देविदासराव उत्तमराव बोबडे 10 दिसंबर 1981 से 3 जनवरी 1983
स्व. बाबाराव वामनराव कडू 4 जनवरी 1983 से 1 दिसंबर 1983
स्व. शंकरराव सदाशिवराव झोंबाडे 16 दिसंबर 1985 से 15 जनवरी 1987
मनोज प्रभाकरराव भेंडे 6 अगस्त 1991 से 19 जनवरी 1992
स्व. गुणवंतराव विष्णुपंतराव साबले 10 फरवरी 1993 से 3 दिसंबर 1993
नरेशचंद्र पंजाबराव ठाकरे 4 दिसंबर 1993 से 27 नवंबर 1995
स्व. प्रमोदराव माणिकराव काले 26 मार्च 2000 से 18 नवंबर 2000
राजेंद्र नरसिंगराव देशमुख 2 दिसंबर 1983 से 15 दिसंबर 1985, 14 जनवरी 1991 से 13 फरवरी 1990 तथा 9 नवंबर 2000 से 15 दिसंबर 2001
स्व. रामविजय मोतीरामजी विधले 6 दिसंबर 2001 से 10 सितंबर 2002
अजय पाटिल टवलारकर 11 सितंबर 2002 से 28 अक्तूबर 2005
सुभाषराव जयवंतराव बोंडे 29 अक्तूबर 2005 से 7 सितंबर 2006
अनिरूध्द उर्फ बबलू देशमुख 8 सितंबर 2006 से 7 सितंबर 2007 तथा 25 अक्तूबर 2012 से 10 जनवरी 2020
विलासराव रंगनाथराव महल्ले 8 सितंबर 2007 से 10 दिसंबर 2008
कंचनमाला कुलदीपराव गावंडे 11 दिसंबर 2008 से 10 सितंबर 2009
प्रा. प्रकाशराव बाबारावजी कालबांडे 29 अक्तूबर 2011 से 24 अक्तूबर 2012
सुधाकरराव नारायणराव भारसाकले 11 सितंबर 2009 से 28 अक्तूबर 2011 तथा अक्तूबर 2021 से जून 2023
उत्तरा विरेंद्र जगताप 26 मई 2020 से 23 फरवरी 2021
ओमप्रकाश उर्फ बच्चू कडू अक्तूबर 2023 से अब तक (वर्तमान अध्यक्ष)





