एमआईएम पार्षद सलाउद्दीन इकरामुद्दीन का पद संकट में!

तीसरी संतान के डीएनए परीक्षण की मांग पर प्रशासन सक्रिय

* सामाजिक कार्यकर्ता शफीक राजा ने उठाया था मामला
अमरावती/दि.8- अमरावती महानगरपालिका के प्रभाग क्रमांक 4 (डी) जमील कॉलोनी-लालखड़ी क्षेत्र से निर्वाचित एमआईएम के पार्षद सलाउद्दीन इकरामुद्दीन की सदस्यता पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं. पार्षद पर चुनाव के दौरान संतान संबंधी जानकारी छिपाकर तथा कथित रूप से गलत जानकारी देकर महानगरपालिका को गुमराह करने का आरोप लगाया गया है. मामले में शिकायत मिलने के बाद जिला प्रशासन और मनपा प्रशासन ने जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है. जिसके तहत जहां एक ओर जिलाधिश कार्यालय द्वारा मनपा प्रशासन को आगे की कार्रवाई करने हेतु पत्र जारी किया गया. वहीं दुसरी ओर मनपा प्रशासन द्वारा इस संदर्भ में अपने स्वास्थ्य व चिकित्सा विभाग को आवश्यक दिशानिर्देश दिए गए. इसके चलते अब यह देखनेवाली बात होगी की इस मामले को लेकर जांच की अगली दिशा क्या होती है.
ज्ञात रहे कि, अमरावती निवासी शफीक राजा ने 20 अप्रैल 2026 को जिला प्रशासन के समक्ष शिकायत प्रस्तुत कर आरोप लगाया था कि पार्षद सलाउद्दीन इकरामुद्दीन ने अपनी दूसरी पत्नी शबनम सैय्यद से जन्मी तीसरी संतान की जानकारी चुनावी दस्तावेजों में छिपाई है. शिकायत में आरोप लगाया गया कि इस तथ्य को छिपाकर चुनाव लड़ा गया, जो निर्वाचन नियमों का उल्लंघन है. साथ ही पार्षद की सदस्यता रद्द करने तथा उनके विरुद्ध फौजदारी कार्रवाई की मांग की गई. शिकायत पर संज्ञान लेते हुए अपर जिलाधिकारी संतोष दामोदर काकडे ने 21 मई 2026 को अमरावती महानगरपालिका आयुक्त को पत्र भेजकर मामले की तत्काल जांच करने तथा की गई कार्रवाई की जानकारी शिकायतकर्ता को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे. इस पत्र की प्रतिलिपि राज्य के पालकमंत्री को भी भेजी गई थी. इसके बाद अमरावती महानगरपालिका के नगरसचिव कार्यालय ने 24 जून 2026 को शिकायतकर्ता को भेजे गए पत्र में बताया कि आयुक्त के निर्देशानुसार यह प्रकरण जांच एवं स्वयं स्पष्ट रिपोर्ट के लिए महानगरपालिका के वैद्यकीय स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय को भेज दिया गया है.
यहां यह विशेष उल्लेखनिय है कि मनपा चुनाव में प्रभाग क्रमांक 4 (ड) में एमआयएम प्रत्याशी सलाउद्दीन इकरामुद्दीन के प्रतिद्वंदी व प्रतिस्पर्धी रहे सामाजिक कार्यकर्ता शफीक राजा ने अपने द्वारा दर्ज करायी गई शिकायत में पार्षद सलाउद्दीन इकरामुद्दीन का तीसरी संतान के संबंध में डीएनए परीक्षण कराए जाने की भी मांग की थी. ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके. जिसके चलते इस मामले ने अब राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है. यदि जांच में शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं और यह सिद्ध होता है कि चुनावी नामांकन के दौरान आवश्यक जानकारी छिपाई गई थी, तो पार्षद सलाउद्दीन इकरामुद्दीन की सदस्यता पर गंभीर असर पड़ सकता है. साथ ही उनके खिलाफ कानूनी और फौजदारी कार्रवाई का मार्ग भी प्रशस्त हो सकता है. हालांकि, इस मामले में अभी अंतिम जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है और न ही संबंधित पार्षद की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक की गई है. प्रशासनिक स्तर पर जांच जारी है तथा सभी की निगाहें अब स्वास्थ्य विभाग और मनपा प्रशासन की रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं.
* सूचना के अधिकार से सामने आए चौंकाने वाले तथ्य
मामले में नया मोड़ तब आया जब महानगरपालिका के जन्म-मृत्यु विभाग से सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत प्राप्त दस्तावेजों में कथित रूप से यह जानकारी सामने आई कि शबनम सैयद की पुत्री के जन्म रिकॉर्ड में पिता का नाम सैयद काजिम दर्ज है. शिकायतकर्ता का दावा है कि सैयद काजिम वास्तव में शबनम सैयद के पिता तथा सलाउद्दीन इकरामुद्दीन के ससुर हैं. इस विसंगति ने पूरे मामले को और अधिक चर्चा का विषय बना दिया है. इसी बात को आधार बनाते हुए शफीक राजा द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सलाउद्दीन इकरामुद्दीन ने चुनावी नामांकन पत्र में केवल दो संतानों की जानकारी दी, जबकि उनकी कुल तीन संतानें हैं. आरोपों के अनुसार उनकी पहली पत्नी सदफ से दो बच्चे हैं, जिनका उल्लेख नामांकन पत्र में किया गया था, लेकिन दूसरी पत्नी शबनम सैयद से जन्मी पुत्री की जानकारी छिपाई गई. शिकायतकर्ता शफीक राजा द्वारा प्रस्तुत जानकारी के अनुसार सलाउद्दीन इकरामुद्दीन की पहली पत्नी सदफ अपने दो बच्चों के साथ मध्यप्रदेश के बुरहानपुर में अपने मायके में रह रही हैं. वहीं सलाउद्दीन इकरामुद्दीन वर्तमान में अमरावती में अपनी दूसरी पत्नी शबनम सैयद और लगभग तीन वर्षीय पुत्री जुनेरा के साथ निवास कर रहे हैं. इसी आधार पर तीसरी संतान के अस्तित्व का दावा किया गया है.
* शफीक राजा की शिकायत पर हरकत में आया प्रशासन
सामाजिक कार्यकर्ता शफीक राजा ने जिलाधिकारी और चुनाव आयोग को शिकायत देकर आरोप लगाया था कि पार्षद ने चुनावी दस्तावेजों में गलत जानकारी देकर चुनाव लड़ा है. शिकायत के बाद जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच प्रक्रिया शुरू की. जिला प्रशासन को भेजी गई शिकायत के आधार पर अपर जिलाधिकारी कार्यालय ने अमरावती महानगरपालिका आयुक्त को जांच के निर्देश दिए थे. इसके बाद मनपा प्रशासन ने मामले को वैद्यकीय स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय के पास जांच एवं रिपोर्ट के लिए भेज दिया.

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