मिटकरी को हुई गलतफहमी, मेरिट देखकर लिया गया फैसला

विधान परिषद उम्मीदवार को लेकर मंत्री दत्तात्रय भरणे का स्पष्टीकरण

मुंबई/ दि.2- राष्ट्रवादी कांग्रेस (अजित पवार गुट) ने पूर्व विधायक झिशान सिद्दीकी को विधान परिषद चुनाव के लिए आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किया है. बाबा सिद्दीकी के निधन के बाद और विधानसभा चुनाव में हार के बाद, बांद्रा पूर्व क्षेत्र में पार्टी की ताकत बढ़ाने के लिए झिशान पर भरोसा जताया गया है और उन्होंने नामांकन दाखिल किया है. इस बीच, विधान परिषद की उम्मीदवारी के लिए राष्ट्रवादी से कई लोग इच्छुक थे. इसी को लेकर राष्ट्रवादी के विधायक अमोल मिटकरी ने नाराजगी व्यक्त की थी. पार्टी ने उम्मीदवारी न देते समय विश्वास में लेने का साधारण सौजन्य भी नहीं दिखाया, ऐसी नाराजगी मिटकरी ने जताई थी. इस पर अब मंत्री दत्तात्रय भरणे ने स्पष्टीकरण दिया है.
मंत्री दत्तात्रय भरणे ने कहा कि अमोल मिटकरी को कुछ गलतफहमी हुई होगी. पार्टी का कोई भी फैसला सभी को विश्वास में लेकर ही किया जाता है, ऐसा स्पष्टीकरण राज्य के कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे ने दिया है. उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के निर्णय को लेकर पार्टी में नाराजगी की चर्चाओं पर भरणे ने विराम लगा दिया है. बाबा सिद्दीकी आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन मुंबई के लिए उनका योगदान बहुत बड़ा है. झिशान सिद्दीकी भी मुंबई के विधायक रह चुके हैं. इसलिए केवल भावुक होकर नहीं, बल्कि सीनियरिटी और मेरिट देखकर ही सुनेत्रा वहिनी ने यह निर्णय लिया है, ऐसी जानकारी दत्तात्रय भरणे ने दी.
* अमोल मिटकरी ने क्या कहा?
पार्टी ने उम्मीदवारी न देते समय विश्वास में लेने का साधारण सौजन्य भी नहीं दिखाया, ऐसी नाराजगी मिटकरी ने जताई. भविष्य में अजित पवार के कथित दुर्घटनात्मक मृत्यु के मुद्दे पर जो साथ देगा, उसके साथ रहेंगे, ऐसा कहते हुए अमोल मिटकरी ने बड़े राजनीतिक संकेत दिए हैं.
* उम्मीदवारी न मिलने के बाद भी किसी विधायक का फोन नहीं आया
अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस ने विधान परिषद के लिए पूर्व विधायक झिशान सिद्दीकी को मौका दिया है. खुद को उम्मीदवारी न देते समय पार्टी ने पूछने का भी सौजन्य नहीं दिखाया, ऐसी नाराजगी अमोल मिटकरी ने व्यक्त की है. अजित पवार के विमान दुर्घटना से जुड़े सवाल पूछने का यह परिणाम मिला, ऐसा भी उन्होंने सवाल उठाया है. वहीं, उम्मीदवारी न मिलने के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस के किसी भी विधायक का फोन नहीं आने की भी उन्होंने नाराजगी जताई है. भविष्य में अजित पवार की कथित दुर्घटनात्मक मृत्यु के मुद्दे पर जो साथ देगा, उसके साथ जाएंगे, ऐसा कहकर उन्होंने बड़े राजनीतिक संकेत दिए हैं.

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