अब उबाठा के निशाने पर बच्चू कडू
‘सामना’ के संपादकीय से साधा गया बच्चू कडू पर निशाना

* समाज सेवा की आड लेकर राजनीति चमाने का आरोप
* भाजपा द्बारा प्रहार पार्टी को निगल लिए जाने की बात कही
मुंबई/ दि.2- प्रहार जनशक्ति पार्टी के नेता बच्चू कडू एक बार फिर शिवसेना में शामिल हुए हैं. उन्होंने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना में आधिकारिक प्रवेश किया. उनका विधान परिषद का टिकट भी तय हो गया है. इस राजनीतिक हलचल से दोनों को क्या फायदा होगा, इस पर चर्चा चल रही है, वहीं विरोधियों ने आरोप लगाया कि शिंदे ने कडू का पार्टी ही निगल लिया. इन राजनीतिक घटनाक्रमों पर शिवसेना उबाठा का मुखपत्र रहनेवाले ‘सामना’ से जोरदार प्रहार किया गया है. साथ ही भाजपा भविष्य में कौन सा दल निगलेगी, इस पर भी बड़ा बयान दिया गया है.
आज के ‘सामना’ में इन घटनाओं पर जोरदार प्रहार किया गया. साथ ही भारतीय जनता पार्टी भविष्य में किन दलों को निगलेगी, इस पर भी बड़ा बयान किया गया. ‘सामना’ के संपादकीय में दावा किया गया है कि भारतीय जनता पार्टी भविष्य में चुनाव अपने दम पर लड़ेगी. भाजपा भविष्य में अजीत पवार गुट वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और एकनाथ शिंदे के गुट वाली शिवसेना को किनारे करने की तैयारी में है. संपादकीय में यह भी दावा किया गया कि अजित पवार के दल को निगलने की तैयारी हो चुकी है. आगे चलकर शिंदे गुट के विधायक भी भाजपा में चले जाएंगे, ऐसा भी कहा गया है. इससे पहले भी ‘सामना’ में ऐसी ही आलोचना की गई थी.
* मिंधे गुट में विलीन होकर कडू की ‘जीवंत समाधि’
‘सामना’ में कहा गया कि कडू महाराज की समाधि मंबाजी का ढोंग है. कल मिंधे गुट के विधायक भी भाजपा में चले जाएंगे और मिंधे खाली हो जाएंगे. तब कडू जैसे लोग भाजपा का समर्थन करेंगे. आगे कहा गया कि कडू महाराज की समाधि एक दिखावा है और वे आगे चलकर देवेंद्र फडणवीस और नरेंद्र मोदी का जयकार करेंगे और दिव्यांगों के न्याय के नाम पर भाजपा के साथ जुड़ने की कोशिश करेंगे. इसे गिरते हुए राजनीतिक स्तर का उदाहरण बताया गया. कडू ने खुद को मिंधे गुट में मिलाकर जीवंत समाधि ले ली, ऐसा ‘सामना’ में कहा गया. इसी के चलते उन्हें विधान परिषद की उम्मीदवारी मिली. विधानसभा चुनाव हारने के बाद कडू पानी से बाहर निकली मछली की तरह तड़पते दिखे. एक सामाजिक कार्यकर्ता की यह स्थिति समाज को असहज करने वाली बताई गई. यह भी कहा गया कि यह सेवाभावी कार्यकर्ता सूरत, गुवाहाटी और गोवा की यात्रा करके वापस आया और सत्ता के दरबार में घूमता रहा. अंत में ‘सामना’ में यह आरोप लगाया गया कि कडू समाजसेवा का बुरखा ओढ़कर राजनीति करते हैं और अपना स्वार्थ साधते हैं.





