हमारा झंडा बदला है, एजेंडा नहीं, भाजपा के साथ कोई मेल नहीं

शिवसेना में प्रवेश के बाद बोले बच्चू कडू

मुंबई/ दि.2- प्रहार जनशक्ति पार्टी के प्रमुख और किसान तथा दिव्यांगों के लिए लड़ाई लड़ने वाले पूर्व विधायक बच्चू कडू ने ऐन विधान परिषद चुनाव मौके पर शिंदे गुट वाली शिवसेना में शामिल होकर कई लोगों की भौंहें चढ़ा दी हैं. विधान परिषद चुनावों की पृष्ठभूमि में बच्चू कडू ने प्रहार जनशक्ति पार्टी का विलय करते हुए शिवसेना का धनुष-बाण थाम लिया. पार्टी में प्रवेश के बाद अपनी भूमिका रखते हुए उन्होंने कहा कि हमारा झंडा बदला है, लेकिन एजेंडा वही है. किसानों और दिव्यांगों के काम के लिए ही हमने शिवसेना में प्रवेश किया है. हालांकि, मैं भाजपा के साथ मैच नहीं हो सकता, इसलिए शिवसेना में आया हूं, यह भी उन्होंने स्पष्ट कहा.
बच्चू कडू ने विधान परिषद के लिए नामांकन पत्र भरने के बाद अगले ही दिन रायगढ़ जाकर शिवाजी महाराज के दर्शन किए. इस दौरान उन्होंने दिव्यांग मंत्रालय और किसानों की कर्जमाफी का मुद्दा उठाते हुए एकनाथ शिंदे की सराहना की. उन्होंने कहा कि शिंदे के नेतृत्व में ये काम आगे बढ़ रहे हैं और आगे भी बढ़ते रहेंगे. लेकिन मैं भाजपा के साथ मैच नहीं हो सकता इस बयान की काफी चर्चा हो रही है. वहीं, एकनाथ शिंदे ने पार्टी प्रवेश के समय कहा कि बच्चू कडू असली शिवसैनिक हैं और उन्होंने पहले भी शिवसेना में काम किया है.
* नेताओं को प्रवासियों के पेट पर चोट नहीं करनी चाहिए
महाराष्ट्र दिवस और शिवसेना में चल रहे मराठी मुद्दे पर बच्चू कडू ने बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि अगर प्रवासियों को मराठी नहीं आती तो उन्हें सीखनी चाहिए, लेकिन नेताओं को उनके पेट पर चोट नहीं करनी चाहिए. संत ज्ञानेश्वर की यह विश्व ही मेरा घर है इस ओवी की याद दिलाते हुए उन्होंने मानवता बनाने का आह्वान किया. छत्रपति शिवाजी महाराज के विचारों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि मराठी के मुद्दे पर किसी की रोजी-रोटी पर असर नहीं पड़ना चाहिए.
* बच्चू कडू के शिवसेना प्रवेश का परभणी में प्रहार का विरोध
बच्चू कडू के शिवसेना में शामिल होने के बाद अब प्रहार पार्टी के भीतर ही विरोध शुरू हो गया है. परभणी के प्रहार जिला अध्यक्ष और पदाधिकारियों ने इस फैसले का विरोध करते हुए कहा कि बच्चू कडू ने उन्हें विश्वास में लिए बिना यह निर्णय लिया है, इसलिए वे उनके साथ नहीं हैं. आज परभणी में प्रहार संगठन के पदाधिकारियों ने बैठक कर यह निर्णय लिया. पदाधिकारियों ने अपनी गाड़ियों से प्रहार का नाम भी हटा दिया. आगे वे किस दिशा में जाएंगे, इसका फैसला सभी मिलकर करेंगे. पिछले 8-10 साल से साथ काम करने के बावजूद उन्हें विश्वास में नहीं लिया गया, इस पर जिला अध्यक्ष शिवलिंग बोधने ने नाराजगी जताई.

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