विधायक सुलभा खोडके पावस सत्र में उठाया विदर्भ के बैकलॉक का मुद्दा

सिंचाई, उद्योग व रोजगार के अनुशेष को दूर करने वैद्यानिक विकास मंडल के पूर्नगठन की बताई जरूरत,सीएम फडणवीस ने दिया  लिखित जवाब

मुंबई/दि.23-विदर्भ, मराठवाड़ा और शेष महाराष्ट्र में विकास के क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करने के लिए गठित वैधानिक विकास मंडलों का कार्यकाल समाप्त हुए छह वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद उनका पुनर्गठन नहीं हो सका है. इस मुद्दे को लेकर अमरावती की विधायक सौ. सुलभा संजय खोडके ने महाराष्ट्र विधानसभा के पावस अधिवेशन में लिखित ध्यानाकर्षण के माध्यम से सरकार का ध्यान आकर्षित किया. विधायक सुलभा खोडके ने सवाल उठाया कि सिंचन, उद्योग, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत सुविधाओं के क्षेत्र में विदर्भ और मराठवाड़ा अब भी विकास के अनुशेष (बैकलॉग) से जूझ रहे हैं. ऐसे में वैधानिक विकास मंडलों का पुनर्गठन न होने से पिछड़े क्षेत्रों के विकास संबंधी नीतिगत निर्णय प्रभावित हो रहे हैं. उन्होंने सरकार से पूछा कि वर्ष 2020 में मंडलों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद पुनर्गठन में देरी क्यों हुई तथा विकास अनुशेष को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने अब तक कौन-कौन से ठोस कदम उठाए हैं.
विधायक सुलभा खोडके ने कहा कि विदर्भ और मराठवाड़ा के विकास अनुशेष को पूरी तरह समाप्त करने के लिए वैधानिक विकास मंडलों का शीघ्र पुनर्गठन आवश्यक है. उन्होंने सरकार से इस दिशा में ठोस और समयबद्ध कार्रवाई की मांग की.
* विकास मंडलों के अभाव में प्रभावित हुई नीति निर्माण प्रक्रिया
अपने लिखित निवेदन में विधायक सुलभा खोडके ने कहा कि 30 अप्रैल 2020 को विदर्भ, मराठवाड़ा और शेष महाराष्ट्र विकास मंडलों का कार्यकाल समाप्त हो गया था. इसके बावजूद नए मंडलों का गठन नहीं होने से क्षेत्रीय विकास संतुलन बनाए रखने की प्रक्रिया प्रभावित हुई है. निधियों के न्यायसंगत वितरण, सिंचन विस्तार, औद्योगिक निवेश, रोजगार सृजन और आधारभूत सुविधाओं के विकास जैसे उद्देश्यों पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है. उन्होंने यह मुद्दा भी उठाया कि मंडलों का पुनर्गठन लंबित होने के बावजूद उनके कार्यालय संचालित हो रहे हैं, जिन पर वेतन और प्रशासनिक खर्च के रूप में हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं.
* राज्यपाल के माध्यम से केंद्र सरकार को भेजा गया प्रस्ताव
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधायक खोडके की लिखित लक्षवेधी के उत्तर में बताया कि संविधान के प्रावधानों के अनुसार वैधानिक विकास मंडलों के पुनर्गठन के लिए राज्यपाल के माध्यम से केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है और इस संबंध में लगातार पत्राचार किया जा रहा है. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में तीनों विकास मंडल अस्तित्व में नहीं हैं, लेकिन विकास अनुशेष बढ़ने से रोकने के लिए निधि वितरण के निर्धारित सूत्र का पालन किया जा रहा है. इसके तहत विभाज्य निधि का 23.03 प्रतिशत विदर्भ, 18.75 प्रतिशत मराठवाड़ा और 58.23 प्रतिशत शेष महाराष्ट्र को आवंटित किया जा रहा है.
* विदर्भ में 57.88 लाख रोजगार सृजन का दावा
मुख्यमंत्री फडणवीस ने अपने उत्तर में बताया कि उद्योगों का संतुलित विकास सुनिश्चित करने के लिए उद्योग विभाग द्वारा सामूहिक प्रोत्साहन योजनाएं लागू की गई हैं. पिछले पांच वर्षों में विदर्भ में 13.42 लाख तथा मराठवाड़ा में 8.12 लाख सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों का पंजीयन हुआ है. इसके परिणामस्वरूप विदर्भ में 57.88 लाख तथा मराठवाड़ा में 39.13 लाख रोजगार अवसर सृजित हुए हैं.
* सिंचन अनुशेष लगभग समाप्त होने का दावा
सरकार के अनुसार वर्ष 2025 के अंत तक राज्य के सभी जिलों का सिंचन संबंधी आर्थिक अनुशेष दूर कर दिया गया है. विदर्भ का 94 प्रतिशत और मराठवाड़ा का 99 प्रतिशत भौतिक सिंचन अनुशेष समाप्त किया जा चुका है. शेष अनुशेष जून 2027 तक समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है.
* रोजगार मेलों से हजारों युवाओं को अवसर
मुख्यमंत्री फडणवीस ने बताया कि अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच आयोजित पंडित दीनदयाल उपाध्याय रोजगार मेलों के माध्यम से अमरावती विभाग में 97 रोजगार मेलों में 4,728 युवाओं का प्राथमिक चयन किया गया. वहीं नागपुर विभाग में 7,834 और छत्रपति संभाजीनगर विभाग में 8,617 युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त हुए.
* पुनर्गठन तक कार्यालय रहेंगे कार्यरत
मुख्यमंत्री फडणवीस ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि विकास मंडलों के कार्यालयों में कार्यरत कर्मचारियों के पद समाप्त कर दिए जाएं और भविष्य में केंद्र सरकार पुनर्गठन को मंजूरी दे दे, तो कार्यालयों को दोबारा शुरू करने में काफी समय लगेगा. इसलिए वर्तमान में कर्मचारी अभिलेखों का रखरखाव, निधि उपयोगिता प्रमाणपत्र, लेखा परीक्षण और अन्य प्रशासनिक कार्य संभाल रहे हैं.

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