मामले में एमपीआईडी एक्ट की एंट्री, संपत्ति जब्ती की कार्रवाई की तैयारी
मुथूट फिनकॉर्प घोटाले में तीनों आरोपियों की पुलिस रिमांड 20 अगस्त तक बढ़ी

* 132 शिकायतों के साथ 7 किलो सोना और 3.5 करोड़ नकदी हेराफेरी की आशंका
अमरावती/ दि. 14 – स्थानीय बस स्टैंड रोड स्थित विमको टॉवर में संचालित मुथूट फिनकॉर्प शाखा में सामने आए बहुचर्चित गोल्ड लोन घोटाले की जांच अब और गंभीर हो गई है. शुरुआती दौर में 700 ग्राम सोना और 47 लाख रुपये की नकदी हेराफेरी तक सीमित दिखाई देने वाला मामला अब कथित तौर पर 7 से 7.3 किलोग्राम सोना और करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये नकद राशि के गबन तक पहुंच गया है. मामले की गंभीरता को देखते हुए सिटी कोतवाली पुलिस ने मूल अपराध में एमपीआईडी (महाराष्ट्र जमाकर्ताओं के हितों का संरक्षण अधिनियम, 1999) की धारा 3 भी जोड़ दी है. इसके साथ ही गत रोज पुलिस रिमांड की अवधि समाप्त होने पर मुख्य आरोपी एवं शाखा प्रबंधक शुभम रविंद्र वासेवाय, सूरज अनिल खैरकर तथा धीरज पंचमराव शिरसाट को अदालत में पेश किया गया. पुलिस द्वारा जांच के लिए अतिरिक्त समय मांगने पर न्यायालय ने तीनों आरोपियों को 20 अगस्त तक सात दिन की अतिरिक्त पुलिस कस्टडी में भेज दिया.
बता दें कि विगत 5 अगस्त को एक महिला स्वास्थ्य विस्तार अधिकारी की शिकायत के आधार पर मामला सामने आया था. उस समय लगभग 700 ग्राम सोना और 47 लाख रुपये नकद हेराफेरी की आशंका जताई गई थी तथा करीब 30 शिकायतकर्ता सामने आए थे. लेकिन जांच आगे बढ़ने के साथ शिकायतकर्ताओं की संख्या लगातार बढ़ती गई और अब तक 132 लोगों की शिकायतें दर्ज होने की जानकारी सामने आई है.
पुलिस सूत्रों के अनुसार शाखा के रिकॉर्ड, ग्राहकों के दस्तावेजों और कंपनी के सिस्टम की जांच में बड़ी संख्या में अनियमितताएं सामने आई हैं. इसी आधार पर घोटाले का दायरा कई गुना बढ़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है. जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने ग्राहकों द्वारा गिरवी रखे गए सोने के साथ सुनियोजित तरीके से हेराफेरी की. पुलिस के अनुसार लगभग 3,800 ग्राम सोना शाखा के भीतर ही विभिन्न खातों और लोन फाइलों के माध्यम से इधर-उधर घुमाया गया, जबकि 3 से 3.5 किलोग्राम सोना बाहरी बाजार में खपाने या अन्य संस्थाओं में गिरवी रखने की आशंका है.
जांच एजेंसियों को यह भी पता चला है कि कई मामलों में ग्राहकों का मूल सोना वापस न देकर उसी सोने को दूसरे लोगों के नाम पर गिरवी रखकर नया कर्ज लिया गया. कुछ मामलों में ग्राहकों को सर्वर डाउन या तकनीकी समस्या का हवाला देकर कंप्यूटरीकृत रसीद की जगह हस्तलिखित पावती दी गई. पुलिस जांच के दौरान यह जानकारी भी सामने आई है कि कथित रूप से हेराफेरी किया गया कुछ सोना शहर के कई सुनारों के माध्यम से बाजार में पहुंचाया गया. अब तक दो सुनारों के पास से करीब 90 ग्राम सोना जब्त किया जा चुका है. पुलिस को संदेह है कि बड़ी मात्रा में सोना अन्य लोगों के माध्यम से गिरवी रखा गया या बेचा गया है. इस संबंध में कुछ सुनार और अन्य संदिग्ध व्यक्ति भी जांच के दायरे में आ गए हैं. पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि किस ग्राहक का सोना किस नाम पर गिरवी रखा गया और उससे प्राप्त रकम का उपयोग कहां किया गया.
* सर्वर, हार्ड डिस्क और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की जांच
सिटी कोतवाली पुलिस ने घटनास्थल का तकनीकी निरीक्षण पंचनामा कर इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य एकत्र किए हैं. शाखा में लगे कंप्यूटर सिस्टम, सर्वर और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की जा रही है. पुलिस ने कंपनी के सर्वर से जुड़ी पुरानी हार्ड डिस्क भी जब्त की है, जिससे महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है. जांच अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल रिकॉर्ड के विश्लेषण से यह स्पष्ट हो सकेगा कि किस अवधि में कितने खातों में हेराफेरी हुई और किन-किन कर्मचारियों की भूमिका रही.
* फाइनल ऑडिट रिपोर्ट का इंतजार
घोटाला उजागर हुए आठ दिन से अधिक समय बीत जाने के बावजूद पुलिस को कंपनी की अंतिम ऑडिट रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है. हालांकि कंपनी की ओर से आंतरिक जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराई गई है, लेकिन पुलिस का कहना है कि विस्तृत और अंतिम ऑडिट रिपोर्ट मिलने के बाद ही वास्तविक आर्थिक नुकसान, जिम्मेदार व्यक्तियों और हेराफेरी की सटीक मात्रा का निर्धारण हो सकेगा.
* करोड़ों की संपत्ति पर पुलिस की नजर
जांच के दौरान आरोपियों द्वारा कथित रूप से अर्जित संपत्तियों की जानकारी भी सामने आई है. पुलिस को मिले दस्तावेजों के अनुसार मुख्य आरोपी शुभम वासेवाय ने अपने परिजनों के नाम पर कृषि भूमि, प्लॉट और अन्य संपत्तियां खरीदी हैं. वहीं सह-आरोपी सूरज खैरकर के नाम से भी महंगी संपत्ति और वाहन खरीदने की जानकारी मिली है. पुलिस ने संबंधित दस्तावेज जब्त कर लिए हैं और यह जांच की जा रही है कि इन संपत्तियों की खरीद में घोटाले की रकम का उपयोग किया गया था या नहीं.
* एमपीआईडी एक्ट से बढ़ीं आरोपियों की मुश्किलें
मामले में एमपीआईडी एक्ट की धारा जोड़ने के बाद जांच का स्वरूप और व्यापक हो गया है. इस कानून के तहत धोखाधड़ी से अर्जित संपत्तियों को कुर्क या जब्त किया जा सकता है. न्यायालय की अनुमति मिलने पर ऐसी संपत्तियों की नीलामी कर पीड़ित जमाकर्ताओं और ग्राहकों को राशि लौटाने की प्रक्रिया भी अपनाई जा सकती है. पुलिस अधिकारियों के अनुसार, अब जांच का मुख्य फोकस हेराफेरी किए गए सोने की बरामदगी, आर्थिक लेन-देन की पूरी श्रृंखला का खुलासा तथा इस कथित घोटाले में शामिल अन्य व्यक्तियों की भूमिका सामने लाने पर है. फिलहाल तीनों आरोपी पुलिस हिरासत में हैं और आने वाले दिनों में इस मामले में और भी महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है.





