रावसाहेब दादा शेखावत के छह दशक समाजसेवा और शिक्षा को समर्पित

मरावती के सामाजिक और शैक्षणिक क्षेत्र में कुछ परिवारों ने अपने कार्यो से अलग पहचान बनाई है. इनमें शेखावत परिवार का योगदान उल्लेखनीय है. इनमें शेखावत परिवार का योगदान उल्लेखनीय है. समाजसेवा ,शिक्षा और लोकहित की भावना से समृध्द इस परंपरा को आगे बढाने वाले व्यक्ति है. विद्याभारती शैक्षणिक मंडल, कैम्प, अमरावती के अध्यक्ष तथा पूर्व विधायक रावसाहेब दादा शेखावत. 14 अगस्त 2026 को वे जीवन के 60 वर्ष पूर्ण कर रहे है. यह केवल उम्र का पडाव नहीं ,बल्कि अनुभव, जिम्मेदारी ,संघर्ष और संस्थागत विकास में योगदान के छह दशकों की यात्रा है.
रावसाहेब दादा शेखावत के व्यक्तिगत और कार्यो को समझने के लिए उनके पारिवारीक संस्कारों का उल्लेख आवश्यक है. उनकी मातोश्री भारत की पूर्व राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभाताई पाटील ने अपने संयमित और सुसंस्कृत नेतृत्व से देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक का सफर तय किया. वहीं उनके पिता स्वर्गीय डॉ. देवीसिंहजी शेखावत शिक्षा और समाजसेवा के क्षेत्र में समर्पित व्यक्तित्व थे. डॉ. देवीसिंहजी ने शिक्षक के रूप में अपनी कार्ययात्रा शुरू की और आगे चलकर अमरावती के प्रथम महापौर, विधायक तथा शिक्षण महर्षि के रूप में अपनी पहचान बनाई. विद्या भारती शैक्षणिक मंडल के संस्थापक अध्यक्ष के रूप में उन्होंने शिक्षा को समाज निर्माण का प्रभावी माध्यम माना. उनके द्बारा लगाया गया यह शैक्षणिक वटवृक्ष आज अनेक विद्यार्थियों के जीवन को दिशा दे रहा है.इस विरासत को संभालते हुए रावसाहेब दादा शेखावत ने बदलते समय की जरूरतों के अनुरूप संस्थागत कार्यो को आगे बढाने का प्रयास किया है. आधुनिक शिक्षा, तकनीक , गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, कौशल और वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने पर जो देना आज की आवश्यकता है. संस्था के विभिन्न शैक्षणिक उपक्रमों में इसी दिशा में प्रयास दिखाई देते है. उनके नेतृत्व को एक प्रमुख विशेषता निर्णय लेने की स्पष्टता और उसे अमल में लाने की तत्परता है. संस्थाओं का प्रत्यक्ष दौरा कर कामकाज समझना, समस्याओं को जानना और आवश्यक मार्गदर्शन करना उनकी कार्यशैली का हिस्सा है. इसका अनुभव मुझे स्वयं भी हुआ है.
शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होता है, जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे. ग्रामीण विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अंग्रेजी माध्यम की सुविधा और बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में किए जा रहे प्रयास महत्वपूर्ण है. एक ग्रामीण विद्यार्थी को अच्छी शिक्षा मिलना केवल उसके जीवन को नहीं ,बल्कि पूरे परिवार के भविष्य को बदल सकता है. शिक्षा के साथ कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक और अनुसंधान को बढावा देने की जरूरत भी संस्था की सामाजिक भूमिका को व्यापक बनाती है. आज कृत्रिम बुध्दिमत्ता, डिजीटल शिक्षा और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दौरे में विद्यार्थियों को आधुनिक ज्ञान के साथ संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारी देना भी उतना ही जरूरी है. 60 वर्ष की इस यात्रा के बाद आगे का रास्ता नई उर्जा और नई चुनौतियों से भरा है. शिक्षा की गुणवत्ता बढाना, आधुनिक सुविधाओं को विस्तार, ग्रामीण विद्यार्थियों के लिए अवसर बढाना, अनुसंधान और तकनीक को प्रोत्साहन देना तथा सामाजिक प्रतिबध्दता मजबूत करना उसके सामने महत्वपूर्ण लक्ष्य है.
रावसाहेब दादा शेखावत को जन्मदिन के अवसर पर कोटि-कोटि शुभकामनाएं एवं मन:पूर्वक अभिष्टचिंतन. उनके अनुभव , दूरदृष्टि और नेतृत्व से विद्या भारती परिवार तथा समाज को निरंतर दिशा मिलती रहे, यही शुभकामना.
पवनकुमार माणिकराव अडगोकर
प्राचार्य, विद्याभारती इंग्लिश स्कूल व ज्ाूनियर कॉलेज, पत्रकार कॉलोनी.

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