ऐतिहासिक वास्तू की मनपा ने कर डाली दुर्दशा

मनपा प्रशासन पर गंभीर आरोप

* देशगौरव नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने किया था लोकार्पण
* आज बदहाली पर आंसू बहा रही ऐतिहासिक इमारत
* अनेकानेक गणमान्य की प्राथमिक शिक्षा हुई है यहां
अमरावती/दि.23 – शहर के बीचोबीच स्थित 98 वर्ष पुरानी नेहरु मैदान स्थित ऐतिहासिक वास्तु की बदहाली हो गई है. दुर्दशा इतनी भयंकर है कि, सामान्य लोग देख भी नहीं सकते. महापालिका प्रशासन के अक्षम्य दुर्लक्ष के कारण नानासाहब गोखले स्मारक भवन बदहाल हो गया है. अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा हैं. वहां अब भीषण गर्मी के कारण घुमंतूओं ने डेरा डाला है. कभी मनपा मराठी और हिंदी प्राथमिक व माध्यमिक शाला यहां भरती थी. वहां आज कक्षाओं का बुरा हाल हो रखा है. देखा नहीं जा सकता, इतनी भयंकर दुर्दशा की ओर आज महापालिका के स्वीकृत नगरसेवक दिनेश बूब एवं अनिल अग्रवाल ने ध्यान आकृष्ट किया है. मनपा प्रशासन को जमकर आडे हाथ लेते हुए दोनों ही स्वीकृत नगरसेवकों ने अपने फंड और पब्लिक फंड से इस ऐतिहासिक विरासत को बचाने की तैयारी भी दर्शायी है.
* नेताजी बोस ने किया लोकार्पण
‘अमरावती मंडल’ ने आज वहां का दौरा किया, तो मारे बदबू के मुंह पर कपडा रखना पडा. यकिन नहीं होता कि, इसी वास्तु का 1928 में देशगौरव नेताजी सुभाषचंद्र बोस के हस्ते लोकार्पण किया गया था. उस वास्तु का महापालिका को जतन करना चाहिए था. उसकी सुरक्षा और सुंदरता का रक्षण करने का जिम्मा लेना चाहिए था, वहां मनपा ने घोर दुर्लक्ष किया. फलस्वरुप आज 98 वर्ष पुरानी इमारत न केवल जर्जर और खंडहर हो गई है. अपितु गंदगी से सराबोर है. वहां आप कुछ देर खडे भी नहीं रह सकते, इतनी गंदगी व्याप्त है.
* मनपा भूली दायित्व
महापालिका की शाला इस इमारत में संचालित थी. कुछ वर्ष पहले वहां उपर लकडी की छत की ओर आग लग जाने की घटना भी हुई थी. इसके बावजूद वहां कोई ध्यान मनपा प्रशासन ने प्रशासक राज और कालांतर में नहीं दिया. मनपा अपना कर्तव्य भूल गई. जिसके कारण ऐतिहासिक वास्तू खंडहर बन गई है. उसके जतन का कोई प्रयास महापालिका ने नहीं किया. जबकि कुछ साल पहले तक वहां मराठी और हिंदी की प्राथमिक-माध्यमिक स्कूल संचालित थी. स्कूल संचालन के प्रमाण वहां अब भी मौजूद है.
* कक्षाएं बहा रही आंसू
कभी नन्हें-मुन्नों के कलरव से नेहरु मैदान की यह शाला गूंजती थी. वहां कक्षाएं लगती. इसके प्रमाण वहां विभिन्न कक्ष में ब्लैकबोर्ड और नन्हें-मुन्नों के हाथों से बनाए गए चार्ट व अध्ययन की विभिन्न वस्तुएं यूं ही बिखरी पडी है. इन कक्षाओं के जतन की बजाए वहां अब लावारिस श्वान डेरा डाले हुए है. सर्वत्र गंदगी का आलम है. जिसके कारण कह सकते हैं कि, बच्चों के खिलखिलाने से जीवंत कक्षाएं आज आंसू बहा रही है. इस कदर बदहाली हो चुकी है.
* सर्वत्र गंदगी, टूट गए दरवाजे-खिडकियां
नानासाहब गोखले स्मारक इमारत अगले दो वर्षों में शतायुषी हो जाएगी. उसके जतन के प्रयास महापालिका को करने चाहिए थे, बल्कि उसे समय के साथ सुंदर बनाया जा सकता था. इसके विपरित मनपा ने ध्यान नहीं दिया. किसी अधिकारी ने झांककर देखने की जहमत नहीं उठाई. फलस्वरुप खिडकी-दरवाजे टूट गए है. कुत्ते भीतर घुसकर गंदगी कर रहे है. दिन में ही असामाजिक तत्वों का वहां बोलबाला रहता है. अब तो घुमंतू भी इस इमारत के विभिन्न कक्ष पर डेरा जमा चुके है. इसके कारण आलम और बुरा हो गया है.

* बिफरे बूब, मनपा की भारी चूक
स्वीकृत नगरसेवक और शिवसेना नेता दिनेश बूब ने मनपा की नानासाहब गोखले स्मारक को लेकर घोर लापरवाही, दुर्लक्ष को अक्षम्य बताया है. बूब ने कहा कि, मनपा ने बहुत बडी गल्ती की है. जिस ऐतिहासिक वास्तू का जतन किया जाना चाहिए था, उसे रामभरोसे छोड दिया गया. यह बहुत ही बुरी बात है. अब हम स्वीकृत नगरसेवक अपने विकास फंड से इस ऐतिहासिक वास्तु को बचाने का प्रयत्न करेंगे.

* वास्तु का होना चाहिए रखरखाव
स्वीकृत नगरसेवक और कांग्रेस नेता अनिल अग्रवाल ने भी नेहरु मैदान मनपा शाला की दुर्दशा पर गहरा गुस्सा व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि, नानासाहब गोखले स्मारक का जतन अमरावती का कर्तव्य है. हम अपने घरों का रखरखाव बराबर करते है. महापालिका का फर्ज था कि, इस वास्तु का भली प्रकार रखरखाव करती. इसके लिए भी अलग से फंड का आवंटन किया जा सकता था. अग्रवाल ने कहा कि, वे अपने विकास फंड से ऐतिहासिक वास्तु के जतन के लिए उद्यत हैं.

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