बंद पड़ी नल जलापूर्ति योजनाएं 15 दिन में होंगी शुरू
सूखे से निपटने के लिए मंत्रिमंडलीय उपसमिति का फैसला

फोटो – चंद्रशेखर बावनकुले तथा जलापूर्ति से संबंधित
अब टैंकर से पानी पहुंचाना ही सबसे अंतिम विकल्प
चारा संकट और जल प्रबंधन के लिए बनेगी विशेष कार्ययोजना
मुंबई/दि. 15 – राज्य में सूखे जैसी स्थिति से निपटने के लिए बंद पड़ी नल जलापूर्ति योजनाओं को अगले 15 दिनों में दोबारा शुरू किया जाएगा. पानी की आपूर्ति के लिए टैंकरों का इस्तेमाल अंतिम विकल्प के रूप में किया जाएगा. इससे पहले बंद योजनाओं को पुनः चालू करने के साथ ही चारा संकट और पेयजल प्रबंधन के लिए तत्काल विशेष मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने के निर्देश राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने दिए हैं.
बुधवार को मुंबई स्थित सह्याद्री अतिथिगृह में सूखा निवारण उपाययोजनाओं के लिए गठित मंत्रिमंडलीय उपसमिति की बैठक हुई. उपसमिति के अध्यक्ष तथा राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में सभी 11 सदस्य मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे. बैठक में राज्य की जलापूर्ति व्यवस्था, लंबित योजनाओं, बिजली आपूर्ति और सूखे की स्थिति से निपटने के उपायों पर चर्चा की गई.
* जलापूर्ति योजनाओं पर 3,000 करोड़ रुपये बकाया
राज्य में जलापूर्ति योजनाओं से संबंधित लगभग 3,000 करोड़ रुपये की देनदारी लंबित है. इस आर्थिक बोझ को कम करने के लिए दंड और ब्याज माफ कर मूल राशि का भुगतान चरणबद्ध तरीके से करने की सुविधा देने वाली एकमुश्त समझौता योजना लागू करने का सुझाव दिया गया. इससे लंबित देनदारियों के निपटारे और जलापूर्ति योजनाओं को सुचारु बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है.
* अधूरी योजनाएं तत्काल पूरी करने के निर्देश
बैठक में राज्य की 75 पूर्ण हो चुकी जलापूर्ति योजनाओं को शुरू करने तथा निधि के अभाव में लगभग 25 प्रतिशत तक अधूरी रह गई योजनाओं को शीघ्र पूरा करने पर जोर दिया गया. इन योजनाओं को अगले 15 दिनों में शुरू करने के स्पष्ट निर्देश जिलाधिकारियों को दिए गए हैं. इसके साथ ही जलापूर्ति योजनाओं के लिए बिजली की आपूर्ति नियमित रखने और बिजली के चालू बिलों का भुगतान सुनिश्चित करने को कहा गया है. इसके लिए 15वें और 16वें वित्त आयोग से प्राप्त निधि का उपयोग करने की संभावनाओं पर भी विचार करने के निर्देश दिए गए हैं.
* चारा संकट और पानी के नियोजन पर भी जोर
सूखे की स्थिति में केवल पेयजल ही नहीं, बल्कि पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण चुनौती है. इसे देखते हुए चारा संकट से निपटने और पानी के समुचित नियोजन के लिए विशेष मानक संचालन प्रक्रिया तत्काल तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं. मंत्री बावनकुले ने स्पष्ट किया कि टैंकरों के माध्यम से पानी पहुंचाने से पहले बंद पड़ी जलापूर्ति योजनाओं को चालू करने और उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग करने को प्राथमिकता दी जाएगी. जिलाधिकारियों को निर्धारित समयसीमा में योजनाओं को शुरू कराने और आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं. सरकार के निर्देशों के अनुसार, प्रशासन को टैंकरों पर निर्भरता बढ़ाने के बजाय उपलब्ध जलापूर्ति योजनाओं को सक्रिय करने, बिजली संबंधी बाधाएं दूर करने और अधूरे काम तेजी से पूरे करने पर प्राथमिकता देनी होगी. अब इन निर्देशों के अमल और निर्धारित समयसीमा में योजनाओं को शुरू करने की जिम्मेदारी संबंधित जिलाधिकारियों तथा विभागीय अधिकारियों पर रहेगी.





