अब पार्षदों को सौंपा गया मतदाता पंजीयन का जिम्मा

तीन स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में जीत के लिए भाजपा की नई रणनीति

* पुणे, नागपुर और छत्रपति संभाजीनगर सीटों पर फोकस
* 2020 की हार का हिसाब चुकता करने की तैयारी
पुणे/दि.21- महाराष्ट्र में आगामी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र चुनावों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कमर कस ली है. वर्ष 2020 में जिन तीन प्रमुख स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों पुणे, नागपुर और छत्रपति संभाजीनगर में भाजपा को पराजय का सामना करना पड़ा था, उन सीटों पर विजय प्राप्त करने के लिए पार्टी ने विशेष रणनीति तैयार की है. इसके तहत बड़ी संख्या में स्नातक मतदाताओं का पंजीयन कराने की जिम्मेदारी अब नगरसेवकों (पार्षदों) को सौंपी गई है. भाजपा प्रदेशाध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में आयोजित बैठकों में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पुणे के प्रत्येक नगरसेवक को कम से कम 1,500 और पिंपरी-चिंचवड़ के प्रत्येक नगरसेवक को 500 नए स्नातक मतदाताओं का पंजीयन कराना होगा.
बता दे कि, महाराष्ट्र में कुल सात स्नातक निर्वाचन क्षेत्र हैं. इनमें से पुणे, नागपुर और छत्रपति संभाजीनगर निर्वाचन क्षेत्रों के वर्तमान विधान परिषद सदस्यों का कार्यकाल इस वर्ष समाप्त हो रहा है. निर्वाचन आयोग ने मतदाता पंजीयन प्रक्रिया शुरू कर दी है और राजनीतिक दलों ने भी अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं. भाजपा ने इन तीनों क्षेत्रों में अलग-अलग ‘मतदाता पंजीयन प्रमुख’ नियुक्त किए हैं. पुणे स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के लिए भाजपा महासचिव राजेश पांडे, छत्रपति संभाजीनगर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के लिए विधायक संजय केनेकर, नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के लिए भाजपा प्रदेश विशेष आमंत्रित सदस्य सुधाकर कोहले इन नेताओं के नेतृत्व में व्यापक मतदाता पंजीयन अभियान चलाया जाएगा. भाजपा ने इस अभियान को प्रतिष्ठा का प्रश्न मानते हुए पार्षदों की जवाबदेही तय की है. केवल मतदाताओं की पहचान करना ही नहीं, बल्कि उनकी पात्रता से जुड़े दस्तावेज एकत्र कर पंजीयन प्रक्रिया पूरी करवाने की जिम्मेदारी भी पार्षदों पर होगी. पार्टी सूत्रों के अनुसार, रोजाना कार्य की समीक्षा होगी. जिला अध्यक्षों और पार्टी समूह नेताओं को नियमित रिपोर्ट देनी होगी. मतदाता पंजीयन का लक्ष्य पूरा करने के लिए 20 अगस्त तक की समय-सीमा तय की गई है. जिन पदाधिकारियों का प्रदर्शन कमजोर रहेगा, उनकी रिपोर्ट भी पार्टी नेतृत्व तक पहुंचेगी.
ज्ञात रहे कि, वर्ष 2020 के स्नातक निर्वाचन क्षेत्र चुनावों में भाजपा को इन तीनों सीटों पर हार का सामना करना पड़ा था. 2020 में पुणे से अरुण लाड (तत्कालीन राष्ट्रवादी कांग्रेस), नागपुर से अभिजीत वंजारी (कांग्रेस), छत्रपति संभाजीनगर से सतीश चव्हाण (तत्कालीन राष्ट्रवादी कांग्रेस) विजयी हुए थे. उस समय महाविकास आघाड़ी के घटक दल शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस और कांग्रेस ने संयुक्त रूप से चुनाव लड़ा था, जिसका लाभ विपक्ष को मिला था. पुणे स्नातक निर्वाचन क्षेत्र को राज्य की सबसे प्रभावशाली सीटों में माना जाता है. इस निर्वाचन क्षेत्र में पुणे, सातारा, सांगली, सोलापुर और कोल्हापुर जिले शामिल हैं. 2020 के चुनाव में भाजपा उम्मीदवार संग्राम देशमुख को हराकर राष्ट्रवादी कांग्रेस के अरुण लाड विजयी हुए थे. भाजपा इस बार इस सीट को किसी भी कीमत पर वापस हासिल करना चाहती है. इस क्षेत्र में पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर तथा उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं.
* मतदाता पंजीयन पर टिकी जीत की उम्मीद
स्नातक निर्वाचन क्षेत्र चुनावों में मतदाता पंजीयन सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि सामान्य चुनावों की तरह हर नागरिक यहां मतदाता नहीं होता. केवल निर्धारित पात्रता रखने वाले स्नातक ही मतदाता सूची में शामिल हो सकते हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जो दल अधिक से अधिक पात्र मतदाताओं का पंजीयन कराएगा, उसे चुनाव में स्पष्ट बढ़त मिल सकती है. इसी कारण भाजपा ने चुनावी अभियान शुरू होने से पहले ही संगठनात्मक स्तर पर व्यापक तैयारी शुरू कर दी है.
* राजनीतिक रूप से अहम मुकाबला
आगामी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र चुनाव केवल विधान परिषद की सीटों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इन्हें महायुति और महाविकास आघाड़ी के बीच राजनीतिक शक्ति परीक्षण के रूप में भी देखा जा रहा है. ऐसे में 2020 की हार की भरपाई करने और तीनों सीटों पर जीत दर्ज करने के लिए भाजपा ने मतदाता पंजीयन अभियान को चुनावी रणनीति का केंद्र बना दिया है. आने वाले दिनों में इन निर्वाचन क्षेत्रों में राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है.

Back to top button