बिना अनुदानित कॉलेजों में आरक्षण खत्म करने के फैसले का विरोध

डाटा ने शासनादेश रद्द करने की मांग की

अमरावती/दि.10- राज्य सरकार द्वारा विनाअनुदानित और स्थायी विनाअनुदानित महाविद्यालयों में शिक्षक भर्ती के दौरान सामाजिक आरक्षण समाप्त करने के निर्णय का विरोध तेज हो गया है. डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर टीचर्स असोसिएशन (डाटा) ने 17 जून के शासनादेश को संविधान विरोधी बताते हुए इसे तत्काल रद्द करने की मांग की है. गुरुवार को संगठन के पदाधिकारियों ने अमरावती विभाग के उच्च शिक्षा सहसंचालक को ज्ञापन सौंपकर शासनादेश को वापस लेने की मांग की. संगठन ने अनुरोध किया कि यह ज्ञापन उच्च शिक्षा संचालक, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री तथा मुख्यमंत्री तक तत्काल पहुंचाया जाए.
* सरकार की नीति पर उठाए सवाल
डाटा संगठन ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार एक ओर संविदा, तासिका और अल्पकालीन नियुक्तियों में आरक्षण लागू करती है, जबकि दूसरी ओर हजारों प्राध्यापकों के भविष्य से जुड़े विनाअनुदानित महाविद्यालयों की नियमित भर्ती में आरक्षण समाप्त कर रही है. संगठन ने इसे सरकार की दोहरी नीति बताते हुए सवाल किया कि क्या यह निर्णय संविधान की भावना को नजरअंदाज कर लिया गया है.
* मनमानी भर्ती का आरोप
संगठन का कहना है कि नए शासनादेश के बाद विनाअनुदानित और स्थायी विनाअनुदानित महाविद्यालयों के प्रबंधन बिना सामाजिक आरक्षण लागू किए नियुक्तियां कर सकेंगे. इससे भर्ती प्रक्रिया में मनमानी बढ़ने और अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग तथा वंचित समाज के योग्य उम्मीदवारों के अवसर प्रभावित होने की आशंका जताई गई है.
* राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी
डाटा ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने 17 जून का शासनादेश वापस नहीं लिया, तो संगठन कानूनी लड़ाई के साथ-साथ राज्यव्यापी आंदोलन भी शुरू करेगा. ज्ञापन सौंपने के दौरान संगठन के डॉ. संतोष बनसोड, डॉ. संजय खडसे सहित अमरावती विभाग के पदाधिकारी, प्राध्यापक और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे. अब इस मुद्दे पर राज्य सरकार और उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की आगामी भूमिका पर हजारों एनईटी, एसईटी और पीएचडीधारी उम्मीदवारों की नजरें टिकी हैं.

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