जहरीली गैस और भीषण गर्मी के बीच चला रेस्क्यू

पिंपरी-चिंचवड़ का मोशी हादसा

* 23 लोगों को बचाने के लिए जवानों ने जोखिम में डाली जान
पिंपरी-चिंचवड़ /दि.10 – पिंपरी-चिंचवड़ के मोशी स्थित नगर निगम के कचरा डिपो में इमारत ढहने की घटना के बाद राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है. हादसे के 21 घंटे बाद भी मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए बचाव दल विषैली गैस, अत्यधिक गर्मी और बेहद संकरी जगह जैसी कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहा है.
पिंपरी अग्निशमन विभाग के मुख्य अधिकारी रिशिकांत चिपडा ने बताया कि मलबे के भीतर कचरे के कारण अत्यधिक गर्मी और जहरीली गैसें जमा हो गई थीं, जिससे फंसे लोगों के लिए सांस लेना मुश्किल हो रहा था. ऐसे में अंदर ताजी हवा पहुंचाने और जहरीली गैस बाहर निकालने के लिए मैकेनिकल वेंटिलेशन की व्यवस्था की गई, ताकि पीड़ितों को ऑक्सीजन मिल सके और उनके जीवित रहने की संभावना बढ़े. उन्होंने बताया कि अंदर पर्याप्त जगह नहीं होने के कारण बचाव दल ने एयरबैग की मदद से जगह बनाई. इसके बाद कचरे को धीरे-धीरे दबाकर आगे बढ़ते हुए फंसे लोगों तक पहुंचने का प्रयास किया गया. इस दौरान रोशनी की व्यवस्था कर पीड़ितों से आवाज के माध्यम से संपर्क स्थापित किया गया, ताकि उनकी सही लोकेशन का पता लगाया जा सके. इमारत का ढांचा अस्थिर होने के कारण भारी मशीनों का इस्तेमाल सीमित रखना पड़ा.
मनपा आयुक्त विजय सूर्यवंशी के अनुसार, मलबे में फंसे कुल 23 लोगों में से अब तक 14 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है. सभी घायलों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है. शेष लोगों की तलाश के लिए बचाव अभियान लगातार जारी है. इस बीच आयुक्त के उस बयान पर विवाद खड़ा हो गया है, जिसमें उन्होंने इस हादसे को प्राकृतिक घटना बताते हुए कहा कि फिलहाल किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता. उनके इस बयान के बाद विपक्ष और स्थानीय लोगों ने परियोजना की सुरक्षा व्यवस्था, निर्माण मानकों और ठेकेदार की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है. हालांकि, दुर्घटना के कारणों की आधिकारिक जांच अभी जारी है.

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