एसआईआर कार्य के लिए बीएलओ और सहायकों को पूर्णकालिक कार्यमुक्त करने के आदेश

जिलाधीश आशिष येरेकर ने सभी विभागाध्यक्षों को जारी किए निर्देश, कर्मचारियों-शिक्षकों ने उठाए सवाल

अमरावती/दि.21– मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के लिए अमरावती जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है. जिला निर्वाचन अधिकारी एवं जिलाधीश आशिष येरेकर ने जिले के सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश जारी करते हुए बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) तथा बीएलओ सहायकों को 30 जुलाई 2026 तक पूर्णकालिक रूप से केवल एसआईआर कार्य में लगाने के आदेश दिए हैं. जिलाधिश येरेकर के आदेश के अनुसार इस अवधि में बीएलओ और उनके सहायकों से निर्वाचन एवं एसआईआर कार्य के अलावा कोई अन्य विभागीय कार्य नहीं लिया जाएगा. साथ ही सभी विभागाध्यक्षों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि उनके अधीनस्थ कर्मचारी पूरे समय केवल मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य में ही संलग्न रहें.
* युद्धस्तर पर चल रहा है पुनरीक्षण अभियान
बता दे कि, भारत निर्वाचन आयोग ने महाराष्ट्र सहित 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम की घोषणा की है. इस कार्यक्रम के तहत 30 जून से 8 अगस्त 2026 तक घर-घर जाकर मतदाताओं की जानकारी एकत्रित करना, गणना प्रपत्र भरवाना और उसका डिजिटलीकरण करना अनिवार्य किया गया है. जिले में इस कार्य के लिए विभिन्न विभागों के लगभग 95 प्रतिशत कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है. इनमें शिक्षक, आंगनवाड़ी सेविकाएं, आशा कार्यकर्ता, वसूली लिपिक, ग्राम पंचायत अधिकारी, ग्राम पंचायत कर्मचारी और कृषि सहायक शामिल हैं.
* सार्वजनिक अवकाश में भी करना होगा काम
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि बीएलओ और उनके सहायक सार्वजनिक अवकाश के दिनों में भी पूरे समय एसआईआर कार्य करेंगे. यदि किसी विभाग में अत्यंत आवश्यक कार्य हो तो संबंधित कर्मचारी की सेवाएं केवल सुबह के सत्र में अधिकतम दो घंटे तक ही ली जा सकेंगी. इसके अलावा यदि एसआईआर कार्य के कारण मूल विभागीय कार्य प्रभावित होता है तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित बीएलओ पर नहीं होगी. विभागाध्यक्षों को ऐसे कार्य अन्य कर्मचारियों के माध्यम से पूरा कराना होगा.
* कार्रवाई से पहले कलेक्टर की अनुमति जरूरी
जिला प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि 30 जुलाई तक एसआईआर कार्य में लगे किसी बीएलओ या सहायक के खिलाफ विभागीय कार्य में देरी अथवा अनुपस्थिति के आधार पर कोई कार्रवाई नहीं की जा सकेगी. किसी भी प्रकार का नोटिस जारी करने या अनुशासनात्मक कार्रवाई से पहले जिला कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी की पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा.
* कर्मचारियों और शिक्षकों में नाराजगी
दूसरी ओर कर्मचारियों और शिक्षक संगठनों ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि जब अधिकांश कर्मचारी एसआईआर कार्य में लगाए गए हैं तो स्कूलों और कार्यालयों का नियमित कामकाज प्रभावित होना स्वाभाविक है. कई शिक्षकों का कहना है कि विद्यार्थियों की पढ़ाई और आम नागरिकों से जुड़े कार्य प्रभावित हो रहे हैं, जबकि संबंधित विभागों में कर्मचारियों की कमी भी महसूस की जा रही है. कर्मचारी संगठनों ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि यदि लगभग सभी कर्मचारियों को निर्वाचन कार्य में लगाया जा रहा है तो कार्यालयों और स्कूलों को अस्थायी रूप से अवकाश घोषित कर देना चाहिए, ताकि प्रशासनिक व्यवस्था में उत्पन्न होने वाली कठिनाइयों से बचा जा सके.
* लापरवाही पर विभागाध्यक्ष होंगे जिम्मेदार
जिलाधिश येरेकर द्वारा जारी आदेश में चेतावनी दी गई है कि यदि किसी विभागाध्यक्ष ने बीएलओ या बीएलओ सहायकों को पूर्णकालिक रूप से कार्यमुक्त नहीं किया और इसकी शिकायत प्राप्त हुई तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ निर्वाचन नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी. जिला प्रशासन का कहना है कि मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण लोकतांत्रिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसे समय पर पूरा करना सभी विभागों की सामूहिक जिम्मेदारी है. वहीं कर्मचारी संगठनों का कहना है कि निर्वाचन कार्य के साथ-साथ शिक्षा और जनसेवा से जुड़े नियमित कार्यों को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए.

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