मोथा के नंद गणपति संग्रहालय में 6,500 से अधिक मूर्तियां

इंडोनेशिया, जापान से लाई गई हैं श्रीगणेश प्रतिमाएं

* संस्कृति एवं भक्ति का अनोखा संगम
चिखलदरा /दि.223– मेलघाट की चिखलदरा तहसील के ग्राम मोथा में श्री गणेश की प्रतिमाओं को सहेजने के लिए नंद गणपति संग्रहालय बनाया गया है. यहां श्रीगणेश के विविध रुप, कला, संस्कृति और भक्ति का अनोखा संगम देखने को मिलता है. करीब तीन एकड में बने इस संग्रहालय में 6,500 से अधिक गणपति की प्रतिमाएं हैं. इनमें श्रीगणेश की 64 कलाएं, 21 विद्या दर्शन, विदर्भ और महाराष्ट्र के अष्टविनायक, विविध धातु, लकडी, मिट्टी, पत्थर, फाइबर आदि से बनी दुर्मिल प्राचीन मूतियां है.
* विदेशों से लाई गई हैं प्रतिमाएं
गणपति संग्रहालय के प्रदीप नंद ने बताया कि, देश के अधिकांश राज्यों के साथ-साथ बैंकॉक, बाली, इंडोनेशिया, जापान, चीन, अमेरिका, लंदन सहित अन्य देशों की भी श्री गणेश मूर्तियां यहां हैं. प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में लोग श्री गणेश की अद्भूत, प्राचीन मूर्तियों के दर्शन करने यहां आते हैं.
* माता-पिता से मिली प्रेरणा
नंद गणपति संग्रहालय मोथा के प्रबंधक डॉ. माधव देशमुख ने बताया कि, प्रदीप नंद अकोला के निवासी हैं. बचपन से ही उन्हें श्री गणेश की प्रतिमाओं का संग्रह करने में रुचि थी. जिससे उनके घर में करीब 1 हजार मूर्तियां एकत्र हो गई थी. प्रदीप नंद की मां माधुरी और पिता अधिवक्ता मधुसूदन नंद ने उनसे कहा कि, घर में श्री गणेश की इतनी प्रतिमाएं रखचा उचित नहीं होता है. इसके लिए अलग से व्यवस्था की जाए. इसके बाद प्रदीप नंद ने चिखलदरा में संग्रहालय बनाने का निर्णय लिया. इसमें श्रीगणेश प्रतिमा के साथ विविध रुपों की करीब 1,360 पुस्तकों का संग्रह भी किया गया है.
* लाखों रुपए कीमत तक की प्रतिमाएं
नंद गणपति संग्रहालय में मात्र कुछ रुपयों से लेकर 10 लाख रुपए तक कीमत की श्री गणेश की प्रतिमाएं है. नक्सल क्षेत्र गढचिरोली में बनने वाली पत्थर और पीतल की मूर्तियां भी यहां की शोभा बढा रही हैं. इसके अलावा देशभर के प्रसिद्ध मंदिरों में स्थापित मूर्तियों की प्रतिकृति भी यहां है.

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