अब पैतृक जमीन का बंटवारा हुआ आसान, नहीं लगेगा रजिस्ट्रेशन शुल्क
महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला, वारिसों को मिलेगी राहत

मुंबई /दि.21– महाराष्ट्र सरकार ने किसानों और आम नागरिकों को बड़ी राहत देते हुए पैतृक कृषि भूमि के बंटवारे (वाटणीपत्र) पर लगने वाले रजिस्ट्रेशन शुल्क को पूरी तरह माफ कर दिया है. इस संबंध में राजस्व विभाग ने नया परिपत्र जारी किया है, जिससे अब हजारों रुपये की बचत होगी.
* क्या है नया फैसला?
सरकार ने महाराष्ट्र जमीन महसूल संहिता 1966 की धारा 85 के तहत आने वाले मामलों के साथ-साथ आपसी सहमति से सीधे उप-पंजीयक (सब-रजिस्ट्रार) कार्यालय में प्रस्तुत किए जाने वाले पैतृक कृषि भूमि के बंटवारे के दस्तावेजों पर भी रजिस्ट्रेशन शुल्क पूरी तरह समाप्त कर दिया है.
* पहले क्या समस्या थी?
23 जून 2025 की अधिसूचना के अनुसार, तहसीलदार स्तर पर किए गए बंटवारे पर शुल्क नहीं लगता था. लेकिन कई लोग सीधे रजिस्ट्रार कार्यालय में दस्तावेज जमा करते थे, जहां नियमों में स्पष्टता न होने के कारण उनसे शुल्क लिया जा रहा था. अब इस भ्रम को दूर कर दिया गया है.
* किन्हें मिलेगा लाभ?
– एक ही परिवार के सदस्यों के बीच पैतृक जमीन के बंटवारे पर
– सभी सहधारकों की आपसी सहमति से किए गए वाटणीपत्र पर
– तहसीलदार या रजिस्ट्रार, दोनों स्तर पर अब कोई शुल्क नहीं
* क्या बोले मंत्री?
राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि पहले नियम स्पष्ट न होने से लोगों को शुल्क देना पड़ता था. अब नई स्पष्टता के बाद चाहे तहसीलदार के माध्यम से बंटवारा हो या सीधे रजिस्ट्रेशन कार्यालय में-कहीं भी शुल्क नहीं लगेगा. इस निर्णय से न केवल किसानों का आर्थिक बोझ कम होगा, बल्कि पारिवारिक जमीन बंटवारे से जुड़े विवादों में भी कमी आने की उम्मीद है. साथ ही प्रक्रिया अधिक सरल और पारदर्शी बनेगी.





