चिखलदरा में पुलिस बंदोबस्त चुस्त, प्रशासन सुस्त

पालिका प्रशासन ने महीने भर में कमाए 20 लाख

* 18 हजार वाहनों में 1 लाख से अधिक टूरिस्ट पहुंचे
* तीन सार्वजनिक शौचालय बंद, सफाई का भी अभाव
चिखलदरा/दि.4- विदर्भ के कश्मीर कहे जाते चिखलदरा में गत माह 1 लाख से अधिक पर्यटक पहुंचे. पालिका प्रशासन को टैक्स के रूप में 20 लाख से अधिक की आमदनी हुई. इसके बावजूद 4 में से एकमात्र सार्वजनिक शौचालय शुरू रहने और वहां भी साफ सफाई का घोर अभाव रहने से महिला टूरिस्ट को खासी परेशानी होने की शिकायत की जा रही है. जिसके लिए पालिका प्रशासन को जिम्मेदार बताया जा रहा है.
* पुलिस का चाकचौबंद प्रबंध
धामणगांव गढी स्थित वन विभाग के चेकपोस्ट में परहेड टैक्स अदा कर पर्यटक चिखलदरा आते है. पालिका को वाहनों के 100, 200, 500 रूपए टैक्स मिलता है. 18 हजार वाहन गत माह नंदनवन आए. जिससे 20 लाख की आय पालिका को बैठे बिठाए हो गई. इसके बावजूद पालिका ने पर्यटकों की सेवा सुविधा का कोई ध्यान नहीं रखा. इसके विपरित एसपी निकेतन कदम की पुलिस व्यवस्था चाक चौबंद रही. सुरक्षा की दृष्टि से चिखलदरा मेहफूज साबित हुआ है. यहां 3600 फीट उंचाई पर सर्पीले रास्तों से हरीभरी वादियों के बीच कोहरे की लुका छिपी का आंनद लेते हुए पर्यटक पहुंच रहे हैं.
* शिकायत पालिका से
टूरिस्ट यहां उत्साह से आते हैं. किंतु चिखलदरा पालिका में जनता राज होने पर भी व्यवस्था दुरूस्त रखने में पालिका प्रशासन पूरी तरह फेल या सुस्त दिखाई दे रहा है. जिसका उदाहरण यह है कि 4 में से 3 सार्वजनिक शौचालय बंद पडे हैं. महिला टूरिस्ट परेशानी झेल रही है. साफ सफाई का भी अभाव है. चिखलदरा पालिका को 20 लाख की आमदनी हुई है. आगे भी टैक्स मिलता रहेगा. सैलानी तो अभी आगे आना शुरू रहेंगे. लोग पालिका द्बारा वसूले जा रहे टैक्स पर प्रश्न उठा रहे हैं.
* क्या कहते हैं पालिका उपाध्यक्ष
इस बारे में पालिका उपाध्यक्ष प्रमोद नाइक से बात की. उन्हें पर्यटकों की समस्या और परेशानी के बारे में बताया. प्रमोद नाईक ने कहा कि पालिका मेे कर्मचारियों की कमी है. मुख्याधिकारी भी प्रभारी है. फिर भी उन्होंने सप्ताह भर में व्यवस्था दूरूस्त करने का वादा किया. तत्काल अमल की अपेक्षा व्यक्त की जा रही है.
* एक भी गार्डन नहीं
पर्यटकों के लिए विदर्भ के नंदनवन में एक भी ढंग का गार्डन नहीं है. चोरी तथा तोडफोड पर यहां के प्रशासन की पकड नहीं है. कोई कार्रवाई नहीं की गई. पार्किंग का नियोजन नहीं होने के साथ टूरिस्ट को हिल स्टेशन के स्पॉट और अन्य जानकारी देनेवाला सूचना केन्द्र का भी अभाव है. वृक्ष कटाई पर नियंत्रण नहीं है. शासकीय निधि का फायदा पर्यटकों तक नहीं पहुंच रहा है. अब पर्यटक सिर्फ डिब्बा पार्टी के रूप में चिखलदरा को पहचान रहे हैं. फलस्वरूप यहां के छोटे-बडे व्यापारी विशेष व्यापार वृध्दि नहीं देख रहे. जमीनीस्तर पर नियोजन की जरूरत सभी महसूस कर रहे हैा. चिखलदरा में एडवेंचर के लिए आनेवाले सैलानियों के वास्ते जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग ने कुछ कदम उठााए थे. उनके रखरखाव की ओर ध्यान देना बेहद जरूरी हो गया है.
* दो करोड के सुलभ शौचालय बने कबाड
चिखलदरा में विकास निधि नहीं आती, ऐसा कहना गलत होगा. बनाई गई सुविधाओं का रखरखाव ढंग से नहीं हो रहा. इसका उदाहरण कबाड अवस्था में पडे सुलभ शौचालय हैं. यह शौचालय तत्कालीन विधायक राजकुमार पटेल की निधि से करीब 2 करोड की लागत से बनाए गये थे. आज उनकी दुर्दशा हो रखी है. ऐसे अनेक उदाहरण यहां देखने मिल जायेंगे. करोडों खर्च के बावजूद यहां पर्यटकों के लिए सुविधा नहीं हो पायी है. पर्यटक के सोलर लाइट बंद पडे हैं और भी अन्य अव्यवस्था का आलम है. हजारों पर्यटक बारिश के सीजन में बडे चाव से चिखलदरा आते हैं. उन्हें यहां की अव्यवस्था से निराशा होती है.

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