बढी हुई दरों से देना होगा संपत्ती कर

अमरावतीवासियों को लगेगा प्रॉपर्टी टैक्स का ‘बड़ा झटका’

* तीन साल का ‘डिफरंस’ भी वसूला जाएगा
* अमरावती मनपा को प्रतिवर्ष होगी 150 करोड की आमदनी
* संपत्ती कर की नई दरों पर लगी स्थगिती हटी
* गत रोज ही राज्य सरकार ने जारी किया आदेश
* अब कल होनेवाली आमसभा से कुछ राहत मिलने पर टिकी सभी की निगाहें
अमरावती /दि.19- अमरावती महानगरपालिका क्षेत्र के लाखों संपत्ति धारकों के लिए आने वाले दिन आर्थिक रूप से भारी पड़ सकते हैं. राज्य सरकार द्वारा प्रॉपर्टी टैक्स की नई दरों पर लगाई गई स्थगिती (रोक) हटाए जाने के बाद शहर में एक बार फिर संपत्ति कर वृद्धि का मुद्दा चर्चा के केंद्र में आ गया है. अब संकेत मिल रहे हैं कि वर्ष 2022 में किए गए पुनर्मूल्यांकन के आधार पर तय की गई 210 रुपये प्रति वर्गमीटर वार्षिक कर दर लागू की जा सकती है. इसके साथ ही तीन वर्षों के कर अंतर (डिफरेंस अमाउंट) की वसूली की संभावना ने नागरिकों की चिंता और बढ़ा दी है. इस पूरे मामले पर अब शहरवासियों की निगाहें कल 20 अगस्त को होने वाली अमरावती महानगरपालिका की आमसभा पर टिकी हैं. माना जा रहा है कि आमसभा में इस विषय पर विस्तृत चर्चा होगी और नागरिकों को राहत देने अथवा एरियर्स वसूली को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय सामने आ सकता है.
बता दे कि, वर्तमान में अमरावती महानगरपालिका क्षेत्र में अधिकांश संपत्तियों पर 90 रुपये प्रति वर्गमीटर वार्षिक दर से कर वसूला जा रहा है. लेकिन वर्ष 2022 में किए गए व्यापक सर्वेक्षण और पुनर्मूल्यांकन के बाद प्रशासन ने कर दर बढ़ाकर 210 रुपये प्रति वर्गमीटर प्रति वर्ष करने का प्रस्ताव तैयार किया था. यदि यह दर लागू होती है तो संपत्ति कर में लगभग 133 प्रतिशत की वृद्धि होगी. इसका सीधा असर शहर के लाखों मकान मालिकों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, दुकानदारों और संस्थानों पर पड़ेगा.
* 17 साल तक नहीं हुआ पुनर्मूल्यांकन
ज्ञात रहे कि, बीएमसी एक्ट के अनुसार प्रत्येक पांच वर्ष में संपत्तियों का पुनर्मूल्यांकन और कर निर्धारण किया जाना आवश्यक है. लेकिन अमरावती में अंतिम बार व्यापक टैक्स असेसमेंट वर्ष 2005-06 में हुआ था. इसके बाद लगभग 17 वर्षों तक यह प्रक्रिया नहीं हुई. इस दौरान शहर का विस्तार हुआ, नई कॉलोनियां बसीं, हजारों नए मकान और व्यवसाय शुरू हुए, लेकिन कर व्यवस्था पुराने ढांचे पर ही चलती रही. परिणामस्वरूप महानगरपालिका की आय सीमित रह गई. वर्ष 2022 तक मनपा की वार्षिक संपत्ति कर मांग लगभग 42 करोड़ रुपये थी, जबकि वास्तविक वसूली 30 से 31 करोड़ रुपये तक ही सीमित रहती थी.
* प्रशासक राज में हुआ सबसे बड़ा सर्वे
मार्च 2022 में जनप्रतिनिधियों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद मनपा में प्रशासक राज लागू हुआ. इसी दौरान तत्कालीन आयुक्त के निर्देश पर पूरे शहर का नया सर्वेक्षण कराया गया. सर्वेक्षण में बड़ी संख्या में ऐसी संपत्तियां सामने आईं जो कर दायरे से बाहर थीं. कई भवनों में स्वीकृत नक्शे से अधिक निर्माण मिला, जबकि अनेक आवासीय संपत्तियों का उपयोग व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा था. जांच में यह भी सामने आया कि हजारों संपत्तियों का वास्तविक क्षेत्रफल और रिकॉर्ड में दर्ज क्षेत्रफल अलग-अलग था. इन सभी मामलों को नए सर्वेक्षण में शामिल किया गया.
* 42 करोड़ से 152 करोड़ तक पहुंची कर मांग
नए सर्वेक्षण के बाद जब अतिरिक्त संपत्तियों को कर दायरे में शामिल किया गया और कर दर को 90 रुपये से बढ़ाकर 210 रुपये प्रति वर्गमीटर करने का प्रस्ताव तैयार हुआ, तब महानगरपालिका की वार्षिक कर मांग में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज हुई. सूत्रों के अनुसार कर मांग 42 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 152 करोड़ रुपये तक पहुंच गई. यही वह बिंदु था जहां से विवाद शुरू हुआ.
* विरोध के बाद सरकार ने लगाई थी रोक
नई कर दरों की घोषणा के बाद राजनीतिक दलों, व्यापारी संगठनों और नागरिक मंचों ने इसका जोरदार विरोध किया. लोगों का कहना था कि एकमुश्त इतनी बड़ी कर वृद्धि आम नागरिकों और मध्यम वर्ग पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालेगी. बढ़ते विरोध को देखते हुए राज्य सरकार ने वर्ष 2024 में 210 रुपये प्रति वर्गमीटर की नई दरों पर स्थगिती लगा दी थी. इसके कारण मनपा को पुरानी 90 रुपये प्रति वर्गमीटर दर से ही कर वसूली करनी पड़ी.
* रोक के बावजूद बढ़ी मनपा की आय
हालांकि कर दरों पर रोक लगी रही, लेकिन नए सर्वेक्षण में शामिल की गई संपत्तियों को कर दायरे से बाहर नहीं किया गया. इसका परिणाम यह हुआ कि पुरानी दर लागू रहने के बावजूद मनपा की वार्षिक कर मांग बढ़कर लगभग 83 करोड़ रुपये तक पहुंच गई. यानी केवल वास्तविक संपत्तियों को रिकॉर्ड में शामिल करने और गलतियों को सुधारने से ही कर मांग लगभग दोगुनी हो गई.
* अब हट गई स्थगिती, शुरू हुई नई चिंता
राज्य सरकार द्वारा हाल ही में नई दरों पर लगी रोक हटाए जाने के बाद शहर में फिर से चिंता का माहौल बन गया है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि बढ़ी हुई दरें केवल वर्तमान वर्ष से लागू होंगी या पिछली अवधि से भी वसूली की जाएगी. मनपा सूत्रों के अनुसार यदि सरकार के आदेशों की व्याख्या पूर्वलक्षी प्रभाव के रूप में की गई तो नागरिकों को केवल बढ़ा हुआ कर ही नहीं, बल्कि पिछले वर्षों का अंतर भी चुकाना पड़ सकता है.
* तीन साल का डिफरेंस वसूले जाने की संभावना
शहरभर में इस समय सबसे अधिक चर्चा इसी मुद्दे को लेकर है. बताया जा रहा है कि यदि नई दरों को प्रभावी माना गया तो वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के दौरान पुरानी तथा नई दरों के बीच का अंतर नागरिकों से वसूला जा सकता है. उदाहरण के तौर पर यदि किसी संपत्ति पर अभी तक 90 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से कर लगाया गया है, तो अब 210 रुपये की दर लागू होने पर प्रति वर्गमीटर 120 रुपये का अतिरिक्त अंतर बनता है. यही अंतर तीन वर्षों के लिए जोड़ा गया तो हजारों संपत्ति धारकों को एकमुश्त बड़ी राशि चुकानी पड़ सकती है. बड़े मकानों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और बहुमंजिला इमारतों के मामले में यह राशि लाखों रुपये तक पहुंच सकती है.
* आमसभा से राहत की उम्मीद
कल होने वाली मनपा आमसभा को लेकर नागरिकों की उम्मीदें बढ़ गई हैं. कई राजनीतिक दल और जनप्रतिनिधि यह मांग उठा रहे हैं कि नागरिकों पर एकमुश्त आर्थिक बोझ न डाला जाए. संभावना जताई जा रही है कि आमसभा में बढ़ी हुई दरों को केवल वर्तमान वित्तीय वर्ष से लागू किये जाने, तीन साल का डिफरेंस माफ किये जाने, एरियर्स की राशि किस्तों में वसूली किए जाने, गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को राहत दिए जाने तथा कर निर्धारण में हुई त्रुटियों के लिए विशेष शिकायत निवारण व्यवस्था बनाए जाने जैसे विकल्पों पर चर्चा हो सकती है.
* आखिर क्यों जरूरी है प्रॉपर्टी टैक्स?
महानगरपालिका की आय का सबसे बड़ा स्रोत प्रॉपर्टी टैक्स माना जाता है. इसी राजस्व से शहर में सड़क निर्माण, जलापूर्ति, स्ट्रीट लाइट, स्वच्छता, कचरा प्रबंधन, नाले, उद्यान और अन्य नागरिक सुविधाओं पर खर्च किया जाता है. मनपा प्रशासन का तर्क है कि वर्षों तक कर निर्धारण नहीं होने के कारण संस्था को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है और विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाना आवश्यक है.
* शहरवासियों की नजरें कल की बैठक पर
फिलहाल अमरावती में एक ही सवाल चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या नागरिकों को बढ़ा हुआ प्रॉपर्टी टैक्स ही भरना पड़ेगा या तीन साल का डिफरेंस भी चुकाना होगा? यदि एरियर्स और डिफरेंस की वसूली का निर्णय लिया जाता है तो यह लाखों संपत्ति धारकों के लिए बड़ा आर्थिक झटका साबित होगा. वहीं यदि आमसभा में राहत का कोई रास्ता निकलता है तो नागरिकों को बड़ी राहत मिल सकती है. इसी कारण 20 अगस्त की आमसभा को केवल एक प्रशासनिक बैठक नहीं, बल्कि अमरावती के लाखों परिवारों और संपत्ति धारकों की जेब पर असर डालने वाला महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है. अब पूरे शहर की निगाहें इसी बैठक पर टिकी हुई हैं.

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* 300 रुपये से अधिक हो सकता था टैक्स
– सभागृह नेता चेतन गावंडे का तर्क
मनपा के सभागृह नेता चेतन गावंडे का कहना है कि यदि वर्ष 2005 के बाद हर पांच वर्ष में नियमित पुनर्मूल्यांकन किया गया होता तो आज प्रॉपर्टी टैक्स की दर 300 रुपये प्रति वर्गमीटर प्रति वर्ष से भी अधिक हो सकती थी. उनके अनुसार 210 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर नागरिकों पर कम से कम बोझ पड़े, इस दृष्टि से तय की गई थी. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जिन संपत्ति धारकों ने पहले से सही जानकारी देकर नियमित कर भरा है, उनके कर में अपेक्षाकृत कम वृद्धि होगी.
* बीएमसी एक्ट के मुताबिक डिफरंस की वसूली होगी
इस संदर्भ में जानकारी व प्रतिक्रिया हेतु संपर्क किए जाने पर मनपा उपायुक्त नरेंद्र वानखडे ने बताया कि, बीएमसी एक्ट के अनुसार, जहां से कर की नई दरों पर स्थगिती लगी थी, अब स्थगिती हट जाने के चलते वहीं से नई दरों के मुताबिक कर की वसूली करने का नियम व प्रावधान है. जिसके चलते जिन लोगों ने विगत तीन वर्षों के दौरान पुरानी दरों के अनुसार अपने संपत्ती कर का भुगतान किया है, उन्हें अब नई दरों के अनुसार संपत्ती कर के देयक जारी किए जाएंगे. हालांकि यदि इसे लेकर आमसभा में कोई अलग निर्णय लिया जाता है तो उस निर्णय की वैधता एवं अमल के संदर्भ में विधि विभाग से मार्गदर्शन प्राप्त किया जाएगा. जिसके चलते पूरा मामला कल 20 अगस्त को होनेवाली आमसभा पर जाकर टिक गया है.

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