पर्यावरण संरक्षण के लिए तक्षशिला इंस्टीट्यूट दारापुर में जनजागृति अभियान

‘नो व्हीकल डे’ और ‘कार पूल’ उपक्रम से कार्बन उत्सर्जन में 82 प्रतिशत की कमी

* प्रधानमंत्री के आह्वान को प्रतिसाद
* ‘नेशनल ग्रीन यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2026’ अंतर्गत महाविद्यालय को सर्वोच्च प्लैटिनम सस्टेनेबल पुरस्कार
अमरावती /दि.20- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पर्यावरण संरक्षण के आह्वान के अनुरूप और संत गाडगे बाबा अमरावती विश्वविद्यालय के नो व्हीकल डे उपक्रम की तर्ज पर, दारापुर स्थित तक्षशिला इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, दारापुर इस महाविद्यालय ने पर्यावरण संरक्षण में एक नया आदर्श स्थापित किया है. संस्था द्वारा लागू की गई शाश्वत परिवहन व्यवस्था, साइकिल उपयोग, ई-वाहन जनजागृति और विशेष रूप से ’कार पूल ड्राइव’ के कारण कैंपस के कार्बन डायऑक्साइड उत्सर्जन में रिकॉर्ड 82.34 प्रतिशत की ऐतिहासिक कमी दर्ज की गई है.
महाविद्यालय के इन सफल पर्यावरणपूरक ञ्च्प्रयासों की राष्ट्रीय स्तर पर दखल ली गई है और संस्था को नेशनल ग्रीन यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2026 अंतर्गत हरित कैंपस विकास के लिए सर्वोच्च प्लैटिनम सस्टेनेबल पुरस्कार प्रदान किया गया है. यह पुरस्कार महाविद्यालय के सामूहिक प्रयासों का प्रतीक है, ऐसा गौरवपूर्ण वक्तव्य प्राचार्य डॉ. डी. टी. इंगोले ने दिया.
इस अभियान के एक भाग के रूप में संस्था के कर्मचारियों के लिए ’कार पूल ड्राइव’ (सामूहिक वाहन यात्रा) उपक्रम लागू किया गया. प्रतिदिन अलग-अलग 34 वाहनों से आने के बजाय कर्मचारियों के 6 समूह बनाकर सामूहिक यात्रा शुरू की गई. इससे सड़क पर वाहनों की संख्या में 82.35 प्रतिशत की कमी आई. इस उपक्रम के प्रभाव का अध्ययन भारत सरकार के नीति आयोग के मानकों के आधार पर किया गया. अध्ययन के अनुसार वाहनों से होने वाला औसत कार्बन उत्सर्जन 160.82 ग्राम/किमी से सीधे 28.4 ग्राम/किमी तक नीचे आ गया, अर्थात कुल उत्सर्जन में 82.34% की कमी हुई. कार पूल में सहभागी कर्मचारी प्रतिदिन औसतन 77.33 किमी की यात्रा एक साथ करते हैं. वाहनों की औसत ईंधन क्षमता 17.5 किमी/लीटर है और सभी 34 कर्मचारियों का कुल दैनिक औसत ईंधन उपयोग मात्र 4.57 लीटर मापा गया है. इससे वार्षिक 28,227 किमी की यात्रा में हजारों लीटर ईंधन की बड़ी बचत हो रही है.
संस्था ने केवल बाहरी परिवहन ही नहीं, बल्कि कैंपस के अंदर की व्यवस्था में भी बड़े बदलाव किए हैं. कैंपस में कचरा परिवहन के लिए ईंधन आधारित वाहनों को पूरी तरह बंद कर ’मैन्युअल कार्टिंग बाइक’ का उपयोग शुरू किया गया है. इसके अलावा विद्यार्थियों और कर्मचारियों को कम दूरी के लिए साइकिल उपयोग करने और पैदल चलने का आह्वान करते हुए.

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