चिखलदरा के विकास में सड़क चौड़ीकरण और पार्किंग को मिले प्राथमिकता
बढ़ते पर्यटन और यातायात दबाव से जूझ रहा ‘विदर्भ का कश्मीर’

* भविष्य में ट्रैफिक संकट और गहराने की आशंका, समय रहते प्रभावी कदम उठाए जाने की जरूरत
चिखलदरा/दि.8 – विदर्भ के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल और ‘विदर्भ का कश्मीर’ कहलाने वाले चिखलदरा में लगातार बढ़ रही पर्यटकों और वाहनों की संख्या अब प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है. पर्यटन सीजन और छुट्टियों के दौरान प्रतिदिन दो हजार से पांच हजार वाहनों की आवाजाही के कारण यहां कई बार जाम जैसी स्थिति उत्पन्न हो रही है. ऐसे में पर्यटन विकास योजनाओं के साथ-साथ सड़क चौड़ीकरण और पार्किंग व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की मांग जोर पकड़ने लगी है.
* संकरी सड़कों से बढ़ रही परेशानी
वर्तमान में परतवाड़ा-धामणगांव गढ़ी-चिखलदरा मार्ग तथा चिखलदरा-घटांग-परतवाड़ा मार्ग कई स्थानों पर अत्यंत संकरे हैं. जानकारी के अनुसार धामणगांव गढ़ी से मडकी तक सड़क की चौड़ाई लगभग 3.75 मीटर है, जबकि मडकी से चिखलदरा तक यह करीब 5.5 मीटर है. वहीं चिखलदरा से घटांग तक का मार्ग भी लगभग 3.75 मीटर चौड़ा है. ऐसी स्थिति में जब दो वाहन आमने-सामने आते हैं तो एक वाहन को सड़क से नीचे उतरकर रास्ता देना पड़ता है. घाटी क्षेत्र के घुमावदार मोड़ों पर यह स्थिति दुर्घटनाओं और विवादों का कारण बन सकती है. स्थानीय लोगों का कहना है कि पर्यटन सीजन में परतवाड़ा से चिखलदरा की मात्र 35 किलोमीटर की दूरी तय करने में कई बार दो से तीन घंटे लग जाते हैं.
* पर्यटन स्थलों पर पार्किंग का अभाव
चिखलदरा के प्रमुख पर्यटन स्थलों भीमकुंड पॉइंट, देवी पॉइंट, पंचबोल पॉइंट, शिवसागर, हरिकेन पॉइंट तथा प्रस्तावित स्कायवॉक क्षेत्र में पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था नहीं है. परिणामस्वरूप सड़क किनारे वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं और यातायात बाधित होता है. कई पर्यटक भीड़ और जाम से परेशान होकर प्रमुख स्थलों का भ्रमण किए बिना ही वापस लौट जाते हैं, जिससे पर्यटन अनुभव प्रभावित होता है.
* स्कायवॉक परियोजना से और बढ़ेगा दबाव
चिखलदरा में प्रस्तावित स्कायवॉक परियोजना को पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना के शुरू होने के बाद पर्यटकों की संख्या और अधिक बढ़ेगी, जिससे यातायात दबाव भी कई गुना बढ़ सकता है. इसलिए भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अभी से आधारभूत सुविधाओं का विकास करना आवश्यक है.
* सेंट्रल पार्किंग और शटल व्यवस्था का सुझाव
स्थानीय नागरिकों और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों ने सुझाव दिया है कि चिखलदरा में एक केंद्रीय पार्किंग हब विकसित किया जाए, जहां पर्यटक अपने निजी वाहन खड़े कर सकें. इसके बाद उन्हें जिप्सी या विशेष शटल वाहनों के माध्यम से विभिन्न पर्यटन स्थलों तक पहुंचाया जाए. इससे प्रमुख स्थलों पर वाहनों का दबाव कम होगा और यातायात व्यवस्था भी सुचारु बनी रहेगी.
* 2025 के जाम से मिला सबक
गौरतलब है कि अप्रैल 2025 में चिखलदरा में लगभग 10 किलोमीटर लंबा जाम लगने से हजारों पर्यटक घंटों फंसे रहे थे. इस वर्ष पुलिस प्रशासन ने अतिरिक्त बंदोबस्त और वन-वे व्यवस्था लागू कर स्थिति को काफी हद तक नियंत्रित किया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि केवल अस्थायी उपाय भविष्य की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकते.
* समय रहते योजना बनाने की जरूरत
पर्यटन विशेषज्ञों का कहना है कि यदि चिखलदरा को अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करना है तो सड़क चौड़ीकरण, पार्किंग, वैकल्पिक यातायात व्यवस्था और ट्रैफिक प्रबंधन को विकास योजनाओं का अनिवार्य हिस्सा बनाना होगा. अन्यथा आने वाले वर्षों में बढ़ती पर्यटक संख्या के कारण जाम, दुर्घटनाओं और अव्यवस्था की समस्या और गंभीर हो सकती है. स्थानीय नागरिकों ने शासन और प्रशासन से मांग की है कि चिखलदरा विकास आराखड़े में सड़क विस्तार और पार्किंग सुविधाओं को प्राथमिकता देते हुए दीर्घकालिक यातायात प्रबंधन योजना तैयार की जाए, ताकि पर्यटन विकास और पर्यटकों की सुविधा दोनों सुनिश्चित हो सकें.





