हाईकोर्ट ने दिए जज की तत्काल बदली के आदेश

पंकज कुमार के कामकाज से खंडपीठ खफा

* वकीलों ने भी की थी अनेक शिकायतें
नागपुर/दि.8 – बंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने हाईकोर्ट के कर्ज वसूली न्यायाधिकरण के पीठासीन अधिकारी पंकज कुमार को न्यायिक जिम्मेदारी संभालने में अक्षम पाकर तत्काल हटाने के निर्देश दिए है. न्या. अनिल किशोर और न्या. राज वाकोडे ने अवमानना प्रकरण में पंकज कुमार की मनमाने रवैये की गंभीर दखल लेकर तत्काल हटाने अथवा स्थानांतरण करने के निर्देश जारी किए. उसी प्रकार हाईकोर्ट के आदेश की अनुपालन रिपोर्ट भी आगामी 4 सितंबर तक पेश करने कहा है.
गंभीर कार्रवाई करने से पहले कोर्ट ने पंकज कुमार को चेंबर में बुलाकर उनका पक्ष सुना. उपरांत संवाद ध्यान में लेकर खंडपीठ नेे निरीक्षण किया कि, पंकज कुमार को न्यायिक अथवा अर्धन्यायिक न्यायाधीकरण की आत्मा क्या होती है, इसका सिंपल नॉलेज भी नहीं है. कानूनी प्रक्रिया की कोई जानकारी नहीं है. कर्जदारों ने बैंक का बकाया न देने पर उन्हें कोई राहत नहीं मिलनी चाहिए. अंतिम समय में दाखिल याचिकाओं पर निर्णय नहीं दिया जा सकता. इस तरह की भूमिका पंकज कुमार ने रखी थी. जिस पर हाईकोर्ट ने जमकर आडे हाथ लेते हुए कुमार को कर्जदारों के विरोध में पूर्वाग्रह से प्रेरित मानसिकता के साथ काम करने का निरीक्षण दर्ज किया.
न्यायालय के अपमान प्रकरण में याचिका कर्ता के आवेदन पर 6 माह के अंदर फैसला करने के स्पष्ट निर्देश पंकज कुमार को दिए गए थे. इसके बावजूद कुमार ने 7 माह बाद की तारीख दी. इस बारे में पूछने पर पक्षकार उपस्थित नहीं होने से एकतरफा निर्णय कैसे दिया जा सकता है? इस तरह का स्पष्टीकरण देने का दावा किया गया. जब रोजनामचा की जांच की गई, तो देखा गया कि, दोनों ओर के वकील उपस्थित थे.
* वकीलों की भी फरियाद
पंकज कुमार के खिलाफ अनेक वकीलों ने समय-समय पर केंद्र शासन से शिकायते की थी. उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई. उच्च न्यायालय के निर्देश को वकीलों के लिए बडी राहत बताया जा रहा है. हाईकोर्ट बार असो. के पूर्व अध्यक्ष एड. अतुल पांडे ने उपरोक्त बात कही.
* मामले रखते प्रलंबित
हाईकोर्ट ने निरीक्षण में पाया कि, कर्जदार व्यक्ति संपत्ति ताबे की तारीख से पहले कम से कम महिनाभर अग्रिम आवेदन दाखिल करते है. किंतु पंकज कुमार दावे के दिन तक प्रकरण प्रलंबित रखते रहे. जिससे निराश होकर कर्जदारों को आखिर उच्च न्यायालय में दस्तक देनी पडी. कोर्ट ने इस बर्ताव पर रोष व्यक्त किया. कोर्ट ने अत्यंत कडे शब्दों में कहा कि, पंकज कुमार एक दिन के लिए भी पीठासीन अधिकारी पद पर रहनेलायक नहीं है.

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