मुथूट फिनकॉर्प घोटाले में सोने का सुराग अब भी नहीं

तीनों आरोपी पुलिस रिमांड में, मामले की जांच तेज

* पूछताछ में तीनों कर रहे पुलिस को गुमराह करने का प्रयास
* आरोपियों के घरों की तलाशी, कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त
* शिकायतों का सिलसिला जारी, अब भी आगे आ रहे शिकायतकर्ता
* शाखा कार्यालय की तलाशी के लिए अनुमति का इंतजार, एक-दो दिन में हो सकती है तलाशी
अमरावती /दि.8- शहर के विमाको टॉवर स्थित मुथूट फिनकॉर्प शाखा में सामने आए बहुचर्चित गोल्ड लोन और वित्तीय घोटाले की जांच लगातार आगे बढ़ रही है, लेकिन अब तक कथित रूप से गायब सोने का कोई ठोस सुराग पुलिस के हाथ नहीं लग पाया है. मामले में गिरफ्तार शाखा प्रबंधक शुभम वासेवाय, सूरज अनिल खैरकर और धीरज पंचमराव सिरसाट को न्यायालय ने 10 अगस्त तक पुलिस कस्टडी रिमांड पर भेजा है. तीनों आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है, लेकिन पुलिस का कहना है कि आरोपी जांच को भटकाने और गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं.
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार मुख्य आरोपी शुभम वासेवाय पूछताछ के दौरान लगातार अलग-अलग दावे कर रहा है. कभी वह कथित रूप से कहता है कि संबंधित सोना उसके कब्जे में है, तो कभी दावा करता है कि उसने सोना किसी मित्र के पास सुरक्षित रखा है. पूछताछ के दौरान उसने यह भी कहा कि कुछ राशि अथवा संपत्ति बाजार में निवेश की गई है. पुलिस अधिकारियों का मानना है कि आरोपी जानबूझकर विरोधाभासी जानकारी देकर जांच को उलझाने का प्रयास कर रहे हैं. यही कारण है कि कई दिनों की पूछताछ के बावजूद पुलिस अभी तक यह स्पष्ट नहीं कर पाई है कि कथित रूप से हेराफेरी किया गया सोना वास्तव में कहां रखा गया है और उसकी मात्रा कितनी है.
मामले की जांच को आगे बढ़ाते हुए पुलिस ने बुधवार देर रात तीनों आरोपियों के घरों की तलाशी ली. तलाशी अभियान के दौरान पुलिस को कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज, लेन-देन से संबंधित कागजात और अन्य रिकॉर्ड मिले हैं, जिन्हें जब्त कर लिया गया है. हालांकि पुलिस ने अभी तक जब्त दस्तावेजों का पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि ये दस्तावेज घोटाले की कार्यप्रणाली और वित्तीय लेन-देन की कड़ियों को जोड़ने में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं.
जांच एजेंसियों का अगला फोकस मुथूट फिनकॉर्प की सील शाखा का कार्यालय है. पुलिस शाखा परिसर की विस्तृत तलाशी लेना चाहती है, लेकिन इसके लिए आवश्यक अनुमति का इंतजार किया जा रहा है. अधिकारियों को उम्मीद है कि अगले एक-दो दिनों में शाखा कार्यालय खोला जा सकेगा. शाखा खुलने के बाद वहां मौजूद रिकॉर्ड, कंप्यूटर डेटा, लॉकर, स्ट्रॉन्गरूम और अन्य दस्तावेजों की गहन जांच की जाएगी. पुलिस को उम्मीद है कि शाखा कार्यालय की तलाशी के बाद घोटाले के वास्तविक स्वरूप और गायब सोने के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है.
ज्ञात रहे कि, जांच के शुरुआती चरण में करीब 47 लाख रुपये नकद और 700 ग्राम सोने की हेराफेरी की आशंका जताई गई थी. बाद में जांच के दौरान यह संभावना भी व्यक्त की गई कि मामला कई किलो सोने तक पहुंच सकता है. कुछ शिकायतों और प्रारंभिक तथ्यों के आधार पर करीब साढ़े तीन किलो सोने की अफरा-तफरी की आशंका भी सामने आई है. हालांकि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अभी तक किसी अंतिम आंकड़े पर पहुंचना जल्दबाजी होगी. जब तक शाखा के रिकॉर्ड, ऑडिट दस्तावेज और स्ट्रॉन्गरूम का पूरा मिलान नहीं हो जाता, तब तक वास्तविक नुकसान का आकलन संभव नहीं है.
मामले के सामने आने के बाद से ही शिकायतकर्ताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है. पुलिस के अनुसार प्रतिदिन नए लोग अपनी शिकायतें लेकर पहुंच रहे हैं. कई लोगों का दावा है कि उन्होंने लोन की राशि जमा करने के बावजूद अपने आभूषण वापस नहीं पाए, जबकि कुछ लोगों ने नकद भुगतान के बदले कथित रूप से हस्तलिखित रसीदें मिलने की शिकायत की है. जांच अधिकारियों का मानना है कि जैसे-जैसे मामला सार्वजनिक हो रहा है, वैसे-वैसे और पीड़ित सामने आ सकते हैं. इससे घोटाले की रकम और प्रभावित ग्राहकों की संख्या दोनों बढ़ने की संभावना बनी हुई है.
जांच एजेंसियां अब भी मुथूट फिनकॉर्प की ऑडिट रिपोर्ट और शाखा के वित्तीय रिकॉर्ड का इंतजार कर रही हैं. पुलिस का मानना है कि ऑडिट रिपोर्ट मिलने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि अनियमितताएं कब से चल रही थीं, कितने खाते प्रभावित हुए और कुल कितनी राशि तथा कितना सोना कथित रूप से गायब हुआ.
इस मामले में कई सवाल अब भी अनुत्तरित है.जांच के इस चरण में कई महत्वपूर्ण सवाल अब भी सामने हैं कि, वास्तव में कितना सोना गायब हुआ है, सोना फिलहाल कहां रखा गया है, क्या घोटाले में केवल तीन आरोपी शामिल थे या अन्य लोगों की भी भूमिका है, कथित फर्जी रसीदों और नकद लेन-देन का नेटवर्क कितना बड़ा था, क्या यह व्यक्तिगत धोखाधड़ी थी या संगठित आर्थिक रैकेट. इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में शाखा कार्यालय की तलाशी, दस्तावेजों की जांच और आरोपियों से आगे की पूछताछ के बाद सामने आने की संभावना है. फिलहाल अमरावती का यह चर्चित वित्तीय घोटाला लगातार नए मोड़ ले रहा है और जांच एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है.

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