पुणे में एमपीएससी आंदोलनकारियों पर दूसरा मामला दर्ज

युवा कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष शिवराज मोरे समेत पांच पर बिना अनुमति ड्रोन उड़ाने का आरोप

* पहले मामले में 15 आंदोलनकारी आरोपी, वडेट्टीवार ने कार्रवाई की आलोचना की
पुणे /दि.10- महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (एमपीएससी) की प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी मांगों को लेकर पुणे में जारी विद्यार्थियों के आंदोलन पर पुलिस कार्रवाई तेज हो गई है. अलका टॉकीज चौक और एस. एम. जोशी पुल परिसर में चल रहे बेमियादी आंदोलन के दौरान कथित तौर पर बिना अनुमति ड्रोन उड़ाकर चित्रीकरण करने के मामले में विश्रामबाग पुलिस ने दूसरा अपराध दर्ज किया है. इसमें महाराष्ट्र प्रदेश युवक कांग्रेस के अध्यक्ष शिवराज मोरे समेत पांच लोगों को आरोपी बनाया गया है. इससे पहले रास्ता रोकने, यातायात बाधित करने और गैरकानूनी जमावड़ा करने के आरोप में 15 आंदोलनकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था.
पुलिस के अनुसार, एस. एम. जोशी पुल और शास्त्री रोड जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में ड्रोन उड़ाने के लिए पुलिस आयुक्तालय की पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी. इस मामले में शिवराज मोरे, प्रमोद पाटील, दिगंबर खाड़े, ऋषिकेश गांगुर्डे और अक्षय कांबले आरोपी हैं. पुलिस ड्रोन के मालिक और उसके इस्तेमाल के निर्देश देने वाले व्यक्ति की जानकारी जुटा रही है. पुलिस का कहना है कि आंदोलनकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात के बाद अधिकांश मांगों पर सकारात्मक निर्णय होने के आधार पर आंदोलन वापस लेने का लिखित पत्र पुलिस आयुक्त को सौंपा था. इसके बावजूद बिना पूर्व सूचना के एस. एम. जोशी पुल पर दोबारा रास्ता रोको किया गया, जिससे यातायात बाधित हुआ. आंदोलनकारियों पर उत्तेजक नारे लगाने और गैरकानूनी जमावड़ा करने के आरोप भी हैं.
पहले मामले में प्रमोद पाटील, अक्षय कांबले, अनिकेत देशमाने, प्रवीण महादेव पाटील, ऋषिकेश गांगुर्डे, प्रियंका चौधरी, नितीन गिते, सोमनाथ चव्हाण, ओंकार पाटील, गजानन शेलके, अजित काकडे, सिद्धार्थ पंचांगे, संकेत कणसे, सिद्धार्थ जांभूलकर और साहेबराव क्षीरसागर को आरोपी बनाया गया है. विधायक रोहित पवार और प्रतियोगी परीक्षा समन्वय समिति के प्रमुख विवेकानंद पाटील के नाम इस एफआईआर में शामिल नहीं हैं.
* वडेट्टीवार ने की मामले वापस लेने की मांग
कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने विद्यार्थियों के खिलाफ कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि पेपर लीक और परीक्षा संबंधी अनियमितताओं से विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है, ऐसे में न्याय की मांग करने वालों पर मामले दर्ज करना अनुचित है. उन्होंने आंदोलनकारियों पर दर्ज मामले वापस लेने, एमपीएससी अध्यक्ष विवेक भीमनवार का इस्तीफा लेने और विद्यार्थियों की मांगें स्वीकार करने की मांग की.

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