सीनेट में फीस बढ़ोतरी पर घमासान, छात्रों पर आर्थिक बोझ का मुद्दा उठा
14 साल बाद प्रमाणपत्र और विभिन्न सेवाओं की फीस में वृद्धि

* सदस्यों ने पुनर्विचार की मांग की
* प्रस्ताव अकादमिक काउंसिल को भेजने का निर्णय
अमरावती/दि.24- संत गाडगे बाबा अमरावती विद्यापीठ में विभिन्न प्रमाणपत्रों और सेवाओं की फीस बढ़ाए जाने का मुद्दा बुधवार को हुई सीनेट बैठक में गरमा गया.करीब 14 साल बाद कई सेवाओं की फीस में बदलाव किया गया है. कुछ ऐसी सेवाएं, जो पहले नि:शुल्क उपलब्ध थीं, अब उनके लिए भी शुल्क निर्धारित किया गया है.फीस बढ़ोतरी से विद्यार्थियों और अभिभावकों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ का मुद्दा सीनेट सदस्यों ने उठाया और शुल्क पर पुनर्विचार की मांग की.
सीनेट सदस्य कैलाश चव्हाण ने बैठक में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि पहले पुन: प्रवेश, मार्कशीट में अंकों की जानकारी और प्रवेश आवेदन से संबंधित कुछ सेवाओं के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता था.अब इन सेवाओं के लिए भी शुल्क निर्धारित कर दिया गया है.इसी तरह अंकों के पुनर्गणना के लिए पहले 20 रुपये शुल्क लिया जाता था, जिसे बढ़ाकर 100 रुपये कर दिया गया है.दस्तावेजों के सत्यापन के लिए 500 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है.
* करीब 42 सेवाओं पर शुल्क
सीनेट सदस्यों ने बताया कि विद्यापीठ की ओर से करीब 42 प्रकार की सेवाओं के लिए शुल्क लिया जा रहा है. उनका कहना था कि अलग-अलग प्रमाणपत्रों और सेवाओं के लिए शुल्क बढ़ने का सीधा असर विद्यार्थियों की जेब पर पड़ रहा है. ऐसे समय में जब ग्रामीण और मध्यमवर्गीय परिवारों के विद्यार्थियों पर पहले से शिक्षा का खर्च बढ़ रहा है, विद्यापीठ को फीस बढ़ाने के बजाय राहत देने पर विचार करना चाहिए. विधायक एवं सीनेट सदस्य प्रताप अडसड ने भी फीस में वृद्धि पर पुनर्विचार की मांग का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि इस वर्ष कम बारिश के कारण किसानों को नुकसान उठाना पड़ा है. ऐसे हालात में विद्यार्थियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने के बजाय फीस कम करने पर विचार किया जाना चाहिए.
* प्रस्ताव अकादमिक काउंसिल के पास जाएगा
फीस बढ़ोतरी पर सदस्यों की आपत्तियों के बाद कुलगुरु डॉ. मिलिंद बाराहाते ने कहा कि शुल्क से संबंधित प्रस्ताव अकादमिक काउंसिल के समक्ष रखा जाएगा.वहां इस पर विचार किया जाएगा. बैठक में प्र-कुलगुरु डॉ. महेंद्र ढोरे और कुलसचिव डॉ. अविनाश असनारे भी उपस्थित थे.
* अल्पसंख्यक कॉलेजों में प्रवेश और फीस की जांच की मांग
बैठक में विश्वविद्यालय से संबद्ध अल्पसंख्यक कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया का मुद्दा भी उठाया गया.सदस्यों ने विद्यापीठ प्रशासन से यह जांच करने की मांग की कि संबंधित कॉलेजों में सरकारी नियमों के अनुसार प्रवेश दिए जा रहे हैं या नहीं. इसके अलावा विद्यार्थियों से ली जाने वाली फीस निर्धारित करने का अधिकार किसके पास है और कॉलेजों में किस आधार पर शुल्क लिया जा रहा है, इसकी भी जांच करने की मांग की गई.
* चार साल से तैयार, फिर भी शुरू नहीं हुई लाइब्रेरी
रुक्मिणी नगर में बनाई गई विद्यापीठ की लाइब्रेरी का मुद्दा भी सीनेट बैठक में उठा.सदस्यों ने कहा कि लाइब्रेरी की इमारत बने करीब चार साल हो चुके हैं, लेकिन अभी तक इसे विद्यार्थियों के लिए शुरू नहीं किया गया है. इस पर कुलगुरु डॉ. मिलिंद बाराहाते ने बताया कि लाइब्रेरी के लिए फर्नीचर का काम अभी बाकी है.इसके लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है.फर्नीचर का काम पूरा होते ही लाइब्रेरी शुरू कर दी जाएगी.
* इंटर्नशिप प्रमाणपत्र शुल्क पर भी सवाल
बैठक में इंटर्नशिप से जुड़े प्रमाणपत्र के लिए विद्यार्थियों से लिए जाने वाले शुल्क का मुद्दा भी उठाया गया. सदस्यों ने इस शुल्क व्यवस्था की समीक्षा कर विद्यार्थियों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न डालने के लिए उचित कदम उठाने की मांग की.





