कोणार्क टेंडर में करोड़ों के भ्रष्टाचार का आरोप, मनपा अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग

पूर्व नगरसेवक व युवक कांग्रेस पदाधिकारी ने पुलिस में दी शिकायत

* टेंडर प्रक्रिया, भुगतान और कंपनी की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
अमरावती/दि.24- अमरावती मनपा के बहुचर्चित कचरा संकलन एवं परिवहन ठेके को लेकर विवाद और गहरा गया है.पूर्व नगरसेवक सुन्ना राठौड़ और युवक कांग्रेस पदाधिकारी समीर जवंजाल ने कोणार्क इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी को दिए गए ठेके में करोड़ों रुपये के कथित भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए तत्कालीन मनपा आयुक्त समेत संबंधित अधिकारियों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दी है. शिकायत में धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज करने की मांग की गई है.
इस बीच, मुंबई अच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने 2 सितंबर 2026 को कोणार्क इंफ्रास्ट्रक्चर और अर्बन एनवायरो वेस्ट मैनेजमेंट को संबंधित निविदा में अपात्र माना तथा मनपा और कोणार्क के बीच 28 नवंबर 2025 को हुआ करार रद्द कर दिया.अदालत ने तकनीकी रूप से पात्र बची पी. गोपीनाथ रेड्डी की बोली पर मनपा को नियमानुसार निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं.

* 1,100 कर्मचारियों की जगह सिर्फ 350 होने का आरोप
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि मनपा और कोणार्क के बीच हुए करार के अनुसार करीब 1,100 कर्मचारियों की आवश्यकता थी, लेकिन प्रत्यक्ष रूप से लगभग 350 कर्मचारियों से ही काम कराया जा रहा है.उनका दावा है कि इससे मनपा को हर महीने करीब 20 लाख रुपये का नुकसान हो रहा है. शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि कंपनी ने पिछले आठ महीनों से कर्मचारियों का ईपीएफ और ईएसआईसी जमा नहीं किया है.साथ ही करार के अनुसार आवश्यक संख्या में वाहन उपलब्ध नहीं कराए गए, जिसके कारण शहर की कचरा संकलन व्यवस्था प्रभावित हुई.

* ‘वाहन अपने नाम पर नहीं, फिर 12 करोड़ का भुगतान कैसे?’
शिकायतकर्ताओं ने सवाल उठाया है कि यदि कंपनी ने करार की शर्तों का पालन नहीं किया था, तो मनपा के आयुक्त, अतिरिक्त आयुक्त, लेखा अधिकारी और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कंपनी को करीब 12 करोड़ रुपये का भुगतान किस आधार पर किया? निविदा की शर्तों के मुताबिक आवश्यक वाहनों का कंपनी के नाम पर पंजीकृत होना जरूरी था.आरोप है कि कोणार्क ने पुराने ठेकेदार की गाड़ियां लीज पर लेकर काम में लगाईं. इसी मुद्दे को लेकर शिकायतकर्ताओं ने अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं. हाईकोर्ट के विस्तृत फैसले में भी निविदा में आवश्यक 150 हाइड्रोलिक कचरा संकलन वाहनों और 12 रिफ्यूज कॉम्पैक्टरों की पात्रता तथा अनुभव संबंधी शर्तों को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज की गई थीं. अदालत ने इन्हीं आधारों पर कोणार्क को निविदा के लिए अपात्र माना था.

* जुर्माना लगाने के बावजूद भुगतान पर सवाल
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कोणार्क पर स्वास्थ्य निरीक्षक के माध्यम से करीब 1.50 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया था. इसके बावजूद कंपनी को भुगतान किए जाने पर सवाल उठाए गए हैं. शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि कंपनी के कुछ कथित फर्जी बिलों को मनपा अधिकारियों ने मंजूरी दी तथा जीपीएस मॉनिटरिंग व्यवस्था भी प्रभावी रूप से काम नहीं कर रही थी.इन आरोपों की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है.

* दस पन्नों की शिकायत, दस्तावेज जुटाए जाएंगे
कोतवाली के थानेदार रोशन शिरसाट के अनुसार, मनपा अधिकारियों के खिलाफ करीब दस पन्नों की शिकायत प्राप्त हुई है.शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच के लिए मनपा प्रशासन से टेंडर प्रक्रिया, करार, भुगतान और अन्य आवश्यक दस्तावेज मंगाए जाएंगे. फिलहाल शिकायत में लगाए गए भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितता के आरोप जांच का विषय हैं. हाईकोर्ट का फैसला मुख्य रूप से निविदा में पात्रता और करार को लेकर था, अदालत के फैसले को अपने-आप में भ्रष्टाचार का आपराधिक निष्कर्ष नहीं माना जा सकता.

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