डिजिटल पेमेंट में ब्रेक, क्या फिर बढ़ेगा कैश का चलन?

दो से अधिक के यूपीआई लेन-देन पर प्रस्तावित 0.4% एमडीआर को लेकर व्यापारियों में चिंता

* ग्राहकों पर बोझ डालने की आशंका
अमरावती/दि.24– क्यू कोड स्कैन कर कुछ ही सेकंड में भुगतान करने की आदत डाल चुके ग्राहकों के लिए यूपीआई भुगतान व्यवस्था में प्रस्तावित बदलाव चिंता बढ़ाने वाला है.15 अक्टूबर 2026 से 2,000 से अधिक के कुछ व्यापारी यूपीआई लेन-देन पर 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू होने की जानकारी सामने आई है.हालांकि यह शुल्क व्यापारियों से लिया जाना है और ग्राहकों से सीधे वसूलने की अनुमति नहीं है, फिर भी व्यापारी संगठनों में इसके अतिरिक्त खर्च को लेकर चिंता है.
दूध विक्रेता, सब्जी विक्रेता, मेडिकल स्टोर से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स, फर्नीचर, ज्वेलरी, अस्पताल और अन्य प्रतिष्ठानों में डिजिटल भुगतान का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहा है.ऐसे में व्यापारियों का कहना है कि अतिरिक्त एमडीआर का असर उनके मुनाफे पर पड़ सकता है. खासकर कम मार्जिन पर कारोबार करने वाले छोटे व्यापारियों के लिए यह खर्च चिंता का विषय बन सकता है.

* ग्राहकों पर पड़ेगा क्या असर?
व्यापारियों के बीच यह आशंका है कि अतिरिक्त लागत बढ़ने पर कुछ दुकानदार बड़े भुगतान के लिए ग्राहकों से नकद भुगतान करने को कह सकते हैं.दूसरे शहरों में भी व्यापारियों की ओर से बड़े यूपीआई लेन-देन के लिए कैश भुगतान को बढ़ावा देने की खबरें सामने आई हैं. हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि एमडीआर व्यापारियों पर लागू होगा, ग्राहकों पर नहीं, और व्यापारियों को यह शुल्क ग्राहकों से वसूलने की अनुमति नहीं है.सरकार इस बात की निगरानी भी करेगी कि व्यापारी इसका बोझ ग्राहकों पर न डालें.

* फिर एटीएम् की ओर लौटना पड़ेगा?
यदि बड़े लेन-देन में व्यापारी नकद भुगतान को प्राथमिकता देने लगते हैं, तो ग्राहकों को फिर से एटीएम से पैसे निकालने, नकदी साथ रखने और खुले पैसे की व्यवस्था करने जैसी पुरानी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.इसके अलावा व्यापारियों के लिए नकदी संभालना, हिसाब-किताब रखना और सुरक्षा का जोखिम भी बढ़ सकता है. एक ग्राहक ने कहा कि यूपीआई भुगतान सबसे आसान और सुविधाजनक तरीका है.यदि बड़ी खरीदारी पर अतिरिक्त शुल्क या नकद भुगतान की मांग होने लगेगी, तो ग्राहकों को फिर से अपने पास नकदी रखने की जरूरत पड़ सकती है. वहीं, वित्त मंत्रालय के अनुसार व्यक्तिगत व्यक्ति-से-व्यक्ति यूपीआई लेन-देन और अधिकांश छोटे व्यापारी लेन-देन पर इसका असर नहीं होगा.इसलिए रोजमर्रा के छोटे णझख भुगतानों के लिए डिजिटल भुगतान व्यवस्था जारी रहने की संभावना है.

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