डफरीन अग्निकांड पर उठे गंभीर सवाल, सभी लोग सवालों के घेरे में

जांच के दौरान उजागर हुईं स्वास्थ्य व्यवस्था की कई परतें, कई स्तरों पर लापरवाही के आरोप

* तीन नवजातों की मौत के बाद उपकरण खरीद, रखरखाव और निगरानी व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न;
अमरावती /दि. 9- अमरावती के जिला स्त्री अस्पताल (डफरीन अस्पताल) में 24 अगस्त की तड़के हुई अग्निकांड की घटना, जिसमें तीन नवजात शिशुओं की मौत हो गई थी, अब स्वास्थ्य व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है. मामले की विभिन्न स्तरों पर हो रही पड़ताल में उपकरणों की खरीद, रखरखाव, तकनीकी निगरानी और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर कई चिंताजनक पहलू सामने आए हैं.
जानकारी के अनुसार, नवजात अतिदक्षता विभाग (एसएनसीयू) में उपयोग किए जा रहे वॉर्मर और वेंटिलेटर उपकरणों की गुणवत्ता, उनकी नियमित जांच तथा रखरखाव प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं. आरोप है कि संवेदनशील चिकित्सा उपकरणों की खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता और गुणवत्ता मानकों का पर्याप्त पालन नहीं किया गया.
* उस रात क्या हुआ, यह अब भी बड़ा सवाल
घटना वाली रात उपकरणों के तापमान में असामान्य वृद्धि होने के संकेत मिले थे. चिकित्सा प्रोटोकॉल के अनुसार ऐसे उपकरणों की नियमित निगरानी और तापमान का रिकॉर्ड रखा जाना आवश्यक होता है. हालांकि उस रात निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी थी और निर्धारित प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं, यह जांच का प्रमुख विषय बना हुआ है. सूत्रों के अनुसार शॉर्ट सर्किट और उपकरणों के अत्यधिक गर्म होने की आशंका भी जांच के दायरे में है. वहीं अस्पताल की विद्युत सुरक्षा व्यवस्था और समय-समय पर होने वाले इलेक्ट्रिकल ऑडिट को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं.
* रखरखाव और तकनीकी निगरानी पर भी प्रश्न
अस्पताल की मशीनरी के रखरखाव, वारंटी प्रबंधन और तकनीकी निरीक्षण से जुड़े अधिकारियों एवं संबंधित एजेंसियों की भूमिका भी जांच के घेरे में है. आरोप है कि नियमित निरीक्षण और आवश्यक मरम्मत कार्यों में अपेक्षित गंभीरता नहीं बरती गई, जिससे संभावित जोखिम समय रहते सामने नहीं आ सके.
* जवाबदेही तय करने की मांग तेज
घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग, अस्पताल प्रशासन, तकनीकी अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों की भूमिका को लेकर जवाबदेही तय करने की मांग लगातार उठ रही है. विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है. उल्लेखनीय है कि इस हादसे ने राज्यभर में सरकारी अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था, चिकित्सा उपकरणों की गुणवत्ता और नवजात शिशु देखभाल इकाइयों की कार्यप्रणाली को लेकर व्यापक बहस छेड़ दी है. अब सभी की नजरें जांच समिति की अंतिम रिपोर्ट और उसके आधार पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं.

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