‘शील्ड बग’ ने खींचा वैज्ञानिकों का ध्यान

मेलघाट की झाड़ियों में छिपा जैव विविधता का अनमोल खजाना

* रंग-बिरंगी ढाल, दुर्गंधीयुक्त रक्षा प्रणाली और अनोखी जीवनशैली ने बनाया आकर्षण का केंद्र
अमरावती/दि.15 – मेलघाट का नाम आते ही बाघ, तेंदुए, भालू, गौर और दुर्लभ पक्षियों की छवि आंखों के सामने उभरती है, लेकिन इस घने जंगल की दुनिया केवल बड़े वन्यजीवों तक सीमित नहीं है. यहां की सूक्ष्म जैव विविधता भी उतनी ही समृद्ध और आश्चर्यजनक है. हाल ही में वन्यजीव अध्ययन के दौरान एक आकर्षक और दुर्लभ कीट ‘शील्ड बग’ ने शोधकर्ताओं और प्रकृति प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींचा है. सेवानिवृत्त वनाधिकारी एवं वन्यजीव अभ्यासक बेदरकर द्वारा मेलघाट क्षेत्र में किए जा रहे सतत अध्ययन के दौरान इस विशेष कीट की पहचान हुई. वनस्पतियों की पत्तियों और झाड़ियों के बीच छिपा यह छोटा-सा जीव अपने रंग, बनावट और व्यवहार के कारण चर्चा का विषय बन गया है.
* ढाल जैसी संरचना बनाती है खास
‘शील्ड बग’ का नाम इसकी पीठ पर बनी ढाल जैसी आकृति के कारण पड़ा है. इसके शरीर पर गुलाबी, पीले, काले और हरे रंगों का अनूठा मिश्रण दिखाई देता है. कुछ प्रजातियों की पीठ पर अंग्रेजी अक्षर ‘वी’ अथवा त्रिकोण जैसी आकृति भी नजर आती है. यही रंग-बिरंगी बनावट इसे अन्य कीटों से अलग पहचान देती है. विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी चमकीली रंगत केवल सुंदरता के लिए नहीं, बल्कि शत्रुओं को चेतावनी देने का भी एक प्राकृतिक तरीका है.
* पत्तियों का रस है भोजन
यह कीट पूर्णतः शाकाहारी होता है. इसके मुख में सुई जैसी लंबी संरचना होती है, जिससे यह पेड़ों, पौधों और झाड़ियों की पत्तियों तथा तनों से रस चूसकर अपना जीवनयापन करता है. यह वन पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है और खाद्य श्रृंखला में भी इसकी भूमिका अहम होती है.
* दुर्गंधीयुक्त ‘रासायनिक हथियार’ से करता है बचाव
‘शील्ड बग’ की सबसे रोचक विशेषता इसकी रक्षा प्रणाली है. जब इसे किसी खतरे का आभास होता है, तो यह शरीर की विशेष ग्रंथियों से तीव्र दुर्गंध वाला द्रव छोड़ता है. यह दुर्गंध इतनी तेज होती है कि पक्षी और अन्य शिकारी जीव इससे दूर रहने में ही भलाई समझते हैं. यही इसकी प्राकृतिक सुरक्षा कवच है, जो इसे जंगल में जीवित रहने में मदद करती है.
* मेलघाट बन रहा सूक्ष्म जैव विविधता का अध्ययन केंद्र
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, मेलघाट केवल बड़े जानवरों का ही नहीं, बल्कि हजारों प्रकार के कीट-पतंगों, तितलियों और सूक्ष्म जीवों का भी सुरक्षित आवास है. इनमें से अनेक प्रजातियों का वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण अभी भी जारी है. शोधकर्ताओं का मानना है कि जंगल के पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखने में ऐसे छोटे जीवों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है.
* बड़े वन्यजीवों से आगे बढ़कर सूक्ष्म संसार की ओर
‘शील्ड बग’ की पहचान ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि मेलघाट का जंगल केवल बाघों और तेंदुओं की वजह से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यहां मौजूद सूक्ष्म जैव विविधता भी वैज्ञानिकों के लिए किसी खजाने से कम नहीं. जंगल की पत्तियों के बीच छिपा यह छोटा-सा जीव प्रकृति के विशाल और अद्भुत संसार की एक नई झलक प्रस्तुत करता है.

Back to top button