एसआईआर से बदली अमरावती जिले की चुनावी तस्वीर
विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद सामने आई जिले की नई राजनीतिक हकीकत

* मृत, स्थलांतरित, डुप्लिकेट और अनुपलब्ध मतदाताओं की बड़ी छंटनी, शहरी क्षेत्रों में सबसे अधिक असर
अमरावती/दि.13 – महाराष्ट्र में भारत निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन-एसआईआर) अभियान ने अमरावती जिले की चुनावी तस्वीर को पूरी तरह बदल दिया है. पिछले दो दशकों में पहली बार मतदाता सूची का इतने व्यापक स्तर पर सत्यापन, डिजिटाइजेशन और पुनरीक्षण किया गया, जिसके परिणामस्वरूप जिले की मतदाता संख्या में अभूतपूर्व कमी दर्ज हुई है. 13 अगस्त 2026 तक उपलब्ध अंतिम आंकड़ों के अनुसार जिले के आठों विधानसभा क्षेत्रों में एसआईआर का कार्य 99.14 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है और इस प्रक्रिया में लगभग 3.59 लाख मतदाता सूची से बाहर हो गए हैं. यह केवल आंकड़ों का बदलाव नहीं है, बल्कि अमरावती जिले की वास्तविक जनसंख्या, मतदाता संरचना और भविष्य के राजनीतिक समीकरणों को समझने का एक नया आधार भी बन गया है. चुनावी विशेषज्ञों का मानना है कि एसआईआर के बाद सामने आए आंकड़े आने वाले विधानसभा, लोकसभा और स्थानीय निकाय चुनावों की रणनीतियों को भी प्रभावित कर सकते हैं.
बता दे कि, जिले में एसआईआर शुरू होने से पहले कुल 25 लाख 45 हजार 677 मतदाता दर्ज थे. इनमें से 21 लाख 87 हजार 10 मतदाताओं के फॉर्म डिजिटाइज किए गए हैं. वहीं 3 लाख 36 हजार 714 नाम ऐसे हैं जो अनकलेक्टेबल अथवा सत्यापन से बाहर रहे. कुल मिलाकर जिले में अंतिम कार्य प्रगति 99.14 प्रतिशत दर्ज की गई है. यदि इन आंकड़ों की तुलना वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव से की जाए तो स्थिति और अधिक स्पष्ट हो जाती है. वर्ष 2024 में जिले में 25 लाख 46 हजार 458 मतदाता पंजीकृत थे. एसआईआर के बाद यह संख्या घटकर 21 लाख 87 हजार 10 रह गई है. अर्थात जिले की मतदाता सूची से लगभग 3 लाख 59 हजार 448 नाम कम हुए हैं.
* 25.46 लाख से 21.87 लाख तक पहुंची संख्या, आखिर कहां गए 3.59 लाख मतदाता?
बता दे कि, एसआईआर शुरू होने से पहले अमरावती जिले में कुल 25 लाख 45 हजार 677 मतदाता दर्ज थे. वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव के समय यह संख्या 25 लाख 46 हजार 458 थी. एसआईआर के दौरान इनमें से 21 लाख 87 हजार 10 मतदाताओं के फॉर्म डिजिटाइज और सत्यापित किए गए, जबकि 3 लाख 36 हजार 714 नाम अनकलेक्टेबल अथवा सत्यापन प्रक्रिया से बाहर रहे. इस प्रकार 2024 की मतदाता सूची की तुलना में जिले में लगभग 3 लाख 59 हजार 448 मतदाता कम दिखाई दे रहे हैं. यह संख्या किसी एक विधानसभा क्षेत्र की कुल मतदाता संख्या के बराबर है और इसी कारण इस बदलाव को जिले के चुनावी इतिहास की सबसे बड़ी मतदाता छंटनी माना जा रहा है.
* पहली बार सामने आया वास्तविक मतदाता आधार?
एसआईआर के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या पिछले कई वर्षों से मतदाता सूची में बड़ी संख्या में ऐसे नाम मौजूद थे, जो वास्तव में जिले में रहते ही नहीं थे. निर्वाचन विभाग के अनुसार जांच में यह बात काफी हद तक सही साबित हुई है. सत्यापन के दौरान पाया गया कि, लगभग 1.08 लाख मतदाताओं का निधन हो चुका था, लेकिन उनके नाम सूची में बने हुए थे. करीब 1.56 लाख मतदाता स्थायी रूप से अन्य शहरों, जिलों अथवा राज्यों में स्थानांतरित हो चुके थे. लगभग 10 हजार मतदाताओं का कोई पता नहीं चल सका. 70 हजार से अधिक नाम डुप्लिकेट पाए गए, जो एक से अधिक स्थानों पर दर्ज थे. इन सभी श्रेणियों के नामों को हटाने के बाद मतदाता सूची का आकार काफी कम हो गया.
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्ष 2002 के बाद पहली बार इतने बड़े पैमाने पर घर-घर जाकर सत्यापन किए जाने से वास्तविक स्थिति सामने आई है. पिछले दो दशकों में हुए शहरीकरण, शिक्षा और रोजगार के लिए बड़े पैमाने पर हुए पलायन तथा जनसंख्या की गतिशीलता का प्रतिबिंब अब मतदाता सूची में दिखाई देने लगा है.
* शहरी क्षेत्रों में दिखा एसआईआर का सबसे ज्यादा असर
एसआईआर के आंकड़ों का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि सबसे अधिक प्रभाव अमरावती और बडनेरा जैसे शहरी विधानसभा क्षेत्रों में दिखाई दिया है. अमरावती विधानसभा में 66,007 तथा बडनेरा विधानसभा में 60,936 नाम अनकलेक्टेबल श्रेणी में पाए गए. यानी केवल इन दो विधानसभा क्षेत्रों में ही 1.26 लाख से अधिक नाम सत्यापन प्रक्रिया से बाहर रहे. इसके पीछे कई कारण माने जा रहे हैं, जैसे कि, किरायेदारों का लगातार आवागमन, नौकरी और व्यवसाय के लिए महानगरों की ओर पलायन, विद्यार्थियों का उच्च शिक्षा के बाद बाहर बस जाना, बहुमंजिला इमारतों और गेटेड सोसायटियों में सत्यापन की जटिलता, वर्षों तक मतदाता रिकॉर्ड अपडेट न होना, एक ही व्यक्ति के एक से अधिक स्थानों पर नाम दर्ज होना. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि शहरी क्षेत्रों में जनसंख्या का प्रवाह लगातार बदलता रहता है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक और पारिवारिक नेटवर्क मजबूत होने से मतदाताओं की पहचान अपेक्षाकृत आसान रहती है.
* विधानसभा निहाय तस्वीर, किस क्षेत्र में कितना बदलाव? – अमरावती विधानसभा : सबसे अधिक प्रभावित
जिले के सबसे महत्वपूर्ण अमरावती में कुल 3,75,393 मतदाता दर्ज थे. इनमें से केवल 2,96,680 मतदाताओं का डिजिटाइजेशन हो सका. डिजिटाइजेशन प्रतिशत 79.03 रहा, जो जिले में सबसे कम है. 66,007 नाम अनकलेक्टेबल पाए जाने से यह विधानसभा राजनीतिक दृष्टि से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र बनकर उभरी है. आगामी चुनावों में यहां बूथवार मतदाता संरचना में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है.
– बडनेरा : दूसरे स्थान पर बड़ी छंटनी
बडनेरा विधानसभा में कुल 3,74,544 मतदाताओं में से 3,11,267 मतदाताओं का सत्यापन हुआ. यहां 60,936 नाम अनकलेक्टेबल पाए गए. तेजी से विकसित हो रहे उपनगरों, नई कॉलोनियों और बढ़ती आबादी के बावजूद यहां बड़ी संख्या में मतदाताओं का सूची से बाहर होना शहरी पलायन और डुप्लिकेट नामों की समस्या की ओर संकेत करता है.
– तिवसा : हर छठा मतदाता प्रभावित
तिवसा विधानसभा में कुल 2,95,601 मतदाताओं में से 47,588 नाम अनकलेक्टेबल पाए गए. कुल मतदाताओं की तुलना में यह संख्या काफी बड़ी है और संकेत देती है कि यहां भी व्यापक स्तर पर पुनरीक्षण की आवश्यकता थी.
– दर्यापुर : जिले का आदर्श मॉडल
दर्यापुर विधानसभा एसआईआर अभियान की सबसे सफल इकाई बनकर सामने आई. यहां 100 प्रतिशत अंतिम कार्य प्रगति दर्ज की गई. कुल 3,06,027 मतदाताओं में से 2,75,917 मतदाताओं का डिजिटाइजेशन हुआ. प्रशासनिक स्तर पर इसे जिले का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन माना जा रहा है.
– मेलघाट : दुर्गम क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि
आदिवासी और पहाड़ी क्षेत्र होने के बावजूद मेलघाट में 98.78 प्रतिशत कार्य पूर्ण हुआ. यहां 3,07,749 मतदाताओं में से 2,71,809 का सत्यापन किया गया. दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए इसे प्रशासनिक सफलता माना जा रहा है.
– अचलपुर : संतुलित स्थिति
अचलपुर विधानसभा में 2,87,583 मतदाताओं में से 2,52,830 का डिजिटाइजेशन हुआ. यहां 33,488 नाम अनकलेक्टेबल रहे.
– धामणगांव रेलवे : लगभग पूर्णता
धामणगांव रेलवे विधानसभा में अंतिम कार्य प्रगति 99.90 प्रतिशत रही. यहां 40,214 नाम अनकलेक्टेबल पाए गए, लेकिन कुल कार्य निष्पादन लगभग पूर्ण माना जा रहा है. – मोर्शी : जिले का सबसे स्वच्छ रिकॉर्ड
मोर्शी विधानसभा ने सबसे चौंकाने वाले आंकड़े प्रस्तुत किए हैं. कुल 2,62,943 मतदाताओं में से 2,61,822 का डिजिटाइजेशन हो चुका है और केवल 743 नाम अनकलेक्टेबल पाए गए. यह पूरे जिले में सबसे कम संख्या है और संकेत देती है कि यहां की मतदाता सूची पहले से ही काफी अद्यतन और व्यवस्थित थी.
* ऐसे थे वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव के आंकडे
बता दे कि, इससे पहले वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में जिले के 25.46 लाख मतदाताओं में से 16.90 लाख मतदाताओं ने मतदान किया था. जिले का कुल मतदान प्रतिशत 66.40 रहा था. विधानसभावार मतदान प्रतिशत के मुताबिक, धामणगांव रेलवे में 69.75%, बडनेरा में 57.67%, अमरावती में 56.51%, तिवसा में 67.93%, दर्यापुर में 66.85%, मेलघाट में 73.14%, अचलपुर में 72.07% तथा मोर्शी में 71.66% मतदान हुआ था.
इन आंकड़ों का विश्लेषण बताता है कि जहां अमरावती और बडनेरा में मतदाताओं की संख्या अधिक थी, वहीं मतदान प्रतिशत सबसे कम रहा. दूसरी ओर मेलघाट, अचलपुर और मोर्शी जैसे क्षेत्रों में मतदाता अधिक सक्रिय रहे. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि एसआईआर के बाद यदि मतदाता सूची अधिक सटीक हो जाती है, तो भविष्य में मतदान प्रतिशत का वास्तविक चित्र सामने आएगा और मतदान दर कृत्रिम रूप से कम दिखाई देने की प्रवृत्ति भी घट सकती है.
* एसआईआर का अमरावती लोकसभा क्षेत्र पर क्या होगा असर?
बता दे कि, अमरावती जिले में कुल 8 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र है. परंतु अमरावती लोकसभा क्षेत्र में जिले के सभी आठ विधानसभा क्षेत्र शामिल नहीं हैं. इसमें केवल बडनेरा, अमरावती, तिवसा, दर्यापुर, मेलघाट और अचलपुर विधानसभा क्षेत्र आते हैं. इन छह विधानसभा क्षेत्रों को मिलाकर एसआईआर से पहले कुल 22,46,897 मतदाता दर्ज थे. इनमें से 19,55,311 मतदाताओं का डिजिटाइजेशन पूरा हुआ है, जबकि 2,70,318 नाम अनकलेक्टेबल अथवा सूची से बाहर रहने वाली श्रेणी में हैं. लोकसभा क्षेत्र में सबसे बड़ा प्रभाव अमरावती और बडनेरा विधानसभा क्षेत्रों में दिखाई देता है. केवल इन दोनों क्षेत्रों में ही 1.26 लाख से अधिक नाम अनकलेक्टेबल पाए गए हैं, जो पूरे संसदीय क्षेत्र की चुनावी संरचना को प्रभावित कर सकते हैं.
* सबसे बड़ा निष्कर्ष
एसआईआर की प्रक्रिया ने अमरावती जिले के बारे में तीन बड़े निष्कर्ष सामने रखे हैं. पहला, जिले में वर्षों से मतदाता सूची में बड़ी संख्या में मृत, स्थानांतरित और डुप्लिकेट नाम मौजूद थे. दूसरा, शहरी क्षेत्रों में मतदाता सूची की स्थिति ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में अधिक जटिल और त्रुटिपूर्ण पाई गई. तीसरा, अमरावती जिले की वास्तविक मतदाता संख्या अब तक मानी जा रही संख्या से काफी कम हो सकती है.
* एसआईआर से राजनीतिक दलों के लिए निकले संकेत?
एसआईआर के बाद सामने आए आंकड़े केवल प्रशासनिक दस्तावेज नहीं हैं, बल्कि राजनीतिक दलों के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत हैं. यदि मतदाता सूची में वास्तविक मतदाता ही शेष रहते हैं, तो बूथवार समीकरण बदल सकते हैं. शहरी क्षेत्रों में मतदाता घनत्व घट सकता है. चुनाव प्रचार की रणनीति नए सिरे से बनानी पड़ेगी. पारंपरिक वोट बैंक की गणनाएं प्रभावित हो सकती हैं. मतदान प्रतिशत का स्वरूप बदल सकता है. कम अंतर से जीत-हार वाले क्षेत्रों में परिणामों पर प्रभाव पड़ सकता है. विशेष रूप से अमरावती और बडनेरा जैसे क्षेत्रों में राजनीतिक दलों को अपने संगठनात्मक ढांचे और मतदाता संपर्क अभियान का पुनर्मूल्यांकन करना पड़ सकता है.
* अब अंतिम सूची पर टिकी निगाहें
हालांकि एसआईआर का कार्य अंतिम चरण में पहुंच चुका है, लेकिन निर्वाचन आयोग द्वारा दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी. आयोग का कहना है कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम बिना पर्याप्त आधार और सत्यापन के नहीं हटाया जाएगा तथा छूटे हुए पात्र नागरिकों को अपना नाम पुनः दर्ज कराने का पूरा अवसर दिया जाएगा. फिलहाल उपलब्ध आंकड़े एक बात स्पष्ट करते हैं कि अमरावती जिले की मतदाता सूची में वर्षों से जमा त्रुटियों, डुप्लिकेट प्रविष्टियों और निष्क्रिय नामों की बड़ी सफाई हुई है. इससे जिले की चुनावी तस्वीर बदल गई है और अब सभी की नजर अंतिम मतदाता सूची पर टिकी हुई है. यही सूची तय करेगी कि अमरावती जिले और अमरावती लोकसभा क्षेत्र की वास्तविक मतदाता ताकत आखिर कितनी है और भविष्य के चुनावी समीकरण किस दिशा में आगे बढ़ेंगे.