तीन गंभीर मामलों में विपुल ठाकरे पर शिकंजा कब?

सेना के पूर्व जवान से ‘फायरिंग की साजिश’ तक

* दुष्कर्म, अवैध हथियार और अपने ही घर पर गोली चलवाने का आरोप
* पुलिस गिरफ्तारी से अब भी दूर
अमरावती/दि.13 – भारतीय सेना में सेवा दे चुके और आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में साहस दिखाने वाले निलंबित तलाठी विपुल ठाकरे का नाम अब तीन गंभीर आपराधिक मामलों में सामने आने से सनसनी फैल गई है. दुष्कर्म, देशी कट्टा बेचने और कथित तौर पर अपने ही घर पर फायरिंग करवाने जैसे मामलों में आरोपी बनाए जाने के बावजूद ठाकरे अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं. ऐसे में पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठने लगे हैं.
बताया जाता है कि विपुल ठाकरे भारतीय सेना में भी सेवा दे चुके हैं. सेना में सेवा समाप्त होने के बाद उन्होंने पटवारी की परीक्षा उत्तीर्ण कर राजस्व विभाग में सेवा हासिल की. सेना में रहते हुए आतंकवादियों के साथ हुई एक मुठभेड़ में उन्होंने एक आतंकवादी को मार गिराया था. इस दौरान उनके एक पैर में गोली लगने की जानकारी भी सामने आई है. सेना में रहते हुए देश की सुरक्षा के लिए जोखिम उठाने वाले एक पूर्व सैनिक का नाम अब गंभीर आपराधिक मामलों में सामने आने से आश्चर्य व्यक्त किया जा रहा है. हालांकि, उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी. 19 मई को गाडगेनगर पुलिस ने एक महिला की शिकायत के आधार पर विपुल ठाकरे के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज किया था. हालांकि, गिरफ्तारी से पहले ही उन्हें अदालत से अंतरिम अग्रिम जमानत मिल गई. शिकायतकर्ता की ओर से उनकी तत्काल गिरफ्तारी की मांग किए जाने की भी जानकारी है.
* देशी कट्टा बेचने का आरोप, अग्रिम जमानत खारिज
इसके बाद 9 जुलाई को पथ्रोट पुलिस ने एक युवक के पास से देशी कट्टा बरामद किया. पुलिस के अनुसार, पूछताछ में युवक ने कथित तौर पर यह हथियार विपुल ठाकरे से खरीदने की जानकारी दी. इसके आधार पर पथ्रोट पुलिस ने ठाकरे के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया. इस मामले में अचलपुर अदालत द्वारा उनकी अंतरिम अग्रिम जमानत खारिज किए जाने की जानकारी सामने आई है.
* अपने ही घर पर फायरिंग की साजिश का आरोप
ठाकरे के खिलाफ तीसरा और सबसे चौंकाने वाला मामला 9 अगस्त की रात सामने आया. अर्जुन नगर स्थित जिजाऊ कॉलोनी में उनके घर पर फायरिंग की घटना हुई. शुरुआत में उनकी पत्नी ने रोशन साहू और दो अज्ञात युवकों पर संदेह जताया था. लेकिन क्राइम ब्रांच की जांच में मामले ने कथित तौर पर पूरी तरह अलग मोड़ ले लिया. पुलिस द्वारा 24 घंटे के भीतर मामले का खुलासा करते हुए दावा किया गया कि फायरिंग किसी बाहरी हमलावर ने नहीं, बल्कि खुद विपुल ठाकरे ने साजिश रचकर करवाई थी. पुलिस का आरोप है कि इसके लिए बादशाह सिंह टाक को 1.50 लाख रुपये की सुपारी दी गई थी. जांच के दौरान देसी कट्टा जब्त किए जाने की भी जानकारी सामने आई है.
* अब सवाल-गिरफ्तारी कब?
एक ओर सेना में सेवा के दौरान साहस और वीरता का परिचय देने वाले विपुल ठाकरे की पृष्ठभूमि है, तो दूसरी ओर वर्तमान में उनके खिलाफ दर्ज गंभीर आपराधिक मामले चर्चा का विषय बने हुए हैं. तीन अलग-अलग मामलों में नाम सामने आने के बावजूद गिरफ्तारी नहीं होने से पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं. गाडगेनगर पुलिस, पथ्रोट पुलिस, एलसीबी और क्राइम ब्रांच में से अब कौन ठाकरे को गिरफ्तार करता है और इन मामलों की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है, इस पर अमरावती की नजरें टिकी हैं. फिलहाल सभी आरोप जांच के अधीन हैं और दोष सिद्ध होने तक आरोपी को कानूनन निर्दोष माना जाता है.

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