एसआईआर सत्यापन बना बिछड़े परिवार के मिलन का जरिया
30 साल बाद मां को मिला खोया बेटा

* बुलढाणा जिले में भावुक कर देने वाली कहानी आयी सामने
बुलढाणा/दि.27- मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के दौरान महाराष्ट्र में एक ऐसा भावुक घटनाक्रम सामने आया, जिसने प्रशासनिक प्रक्रिया को मानवीय संवेदनाओं से जोड़ दिया. लगभग 30 वर्ष पहले घर छोड़कर चले गए एक व्यक्ति का पता मतदाता सत्यापन के दौरान चला और इसी के साथ तीन दशक से बिछड़ा मां-बेटे का रिश्ता फिर से जुड़ गया. लंबे समय बाद जब मां और बेटे का आमना-सामना हुआ तो दोनों की आंखों से आंसुओं की धारा बह निकली. यह हृदयस्पर्शी घटना बुलढाणा जिले के मलकापुर शहर की है, जहां मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण अभियान के दौरान अधिकारियों और बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) की सतर्कता से एक परिवार का बिछड़ा सदस्य फिर से अपने परिजनों तक पहुंच सका.
* मतदाता सत्यापन में सामने आया बड़ा खुलासा
एसआईआर अभियान के तहत मतदाताओं के दस्तावेजों और पहचान का सत्यापन किया जा रहा था. इसी दौरान गांधीनगर क्षेत्र में रहने वाले नवनाथ धोंडीबा गायकवाड़ की जानकारी की जांच के दौरान पता चला कि उनका मूल निवास सोलापुर जिले के केडगांव में है. स्थानीय बीएलओ विठ्ठल तुकाराम लगस ने मामले की गंभीरता को समझते हुए आगे जानकारी जुटाई. जांच के दौरान सोलापुर जिले से जुड़े अधिकारियों और स्थानीय लोगों से संपर्क किया गया. इसी क्रम में नवनाथ गायकवाड़ के परिवार तक सूचना पहुंची. परिवार के लोगों को वर्षों से यह विश्वास था कि नवनाथ अब इस दुनिया में नहीं हैं. ऐसे में जब उन्हें यह जानकारी मिली कि वे जीवित हैं और मलकापुर में अपने परिवार के साथ रह रहे हैं, तो उनके लिए इस पर यकीन करना मुश्किल हो गया.
* 30 साल पहले घर छोड़कर चले गए थे नवनाथ
परिजनों के अनुसार करीब तीन दशक पहले किसी घरेलू विवाद के बाद नवनाथ गायकवाड़ ने अपना घर छोड़ दिया था. इसके बाद उनका परिवार से संपर्क पूरी तरह टूट गया. वर्षों तक उनकी तलाश की गई, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिल सकी. घर छोड़ने के बाद नवनाथ मलकापुर पहुंचे, जहां उन्होंने कांग्रेस नेता रशीदखां जमादार के यहां काम करना शुरू किया. धीरे-धीरे उन्होंने वहीं अपना जीवन बसाया, विवाह किया और बाद में गांधीनगर क्षेत्र में स्थायी रूप से रहने लगे. समय के साथ उन्होंने स्थानीय मतदाता सूची में अपना नाम भी दर्ज करा लिया.
* मां-बेटे की मुलाकात ने सभी को भावुक कर दिया
जब परिवार को नवनाथ के जीवित होने की जानकारी मिली तो उनकी मां और भाई तत्काल मलकापुर पहुंचे. रविवार को हुई यह मुलाकात वहां मौजूद लोगों के लिए बेहद भावुक क्षण बन गई. बताया जाता है कि अचानक अपने सामने मां और भाई को देखकर नवनाथ गायकवाड़ कुछ पल के लिए स्तब्ध रह गए. वहीं मां ने जैसे ही अपने बेटे को गले लगाया, दोनों की आंखों से आंसू बहने लगे. वर्षों का दर्द, इंतजार और बिछड़न उस एक पल में मानो पिघल गई. नवनाथ के भाई अशोक भी बीमारी के बावजूद अपने छोटे भाई से मिलने पहुंचे. तीन दशक बाद हुए इस मिलन को देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं.
* मूल गांव लौटने से किया इनकार
मुलाकात के दौरान परिजनों ने नवनाथ से आग्रह किया कि वे अपने पैतृक गांव वापस लौट आएं और परिवार के साथ रहें. हालांकि नवनाथ ने विनम्रता से यह प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया. उन्होंने कहा कि अब उनका पूरा परिवार, घर और जीवन मलकापुर में बस चुका है. इसलिए वे यहीं रहेंगे, लेकिन अब अपने मूल परिवार से संपर्क बनाए रखेंगे.
* एसआईआर अभियान की मानवीय तस्वीर
आम तौर पर मतदाता सूची पुनरीक्षण को एक प्रशासनिक प्रक्रिया माना जाता है, लेकिन मलकापुर की इस घटना ने दिखा दिया कि सरकारी अभियान कभी-कभी लोगों के जीवन में अप्रत्याशित खुशियां भी लेकर आते हैं. बीएलओ और चुनाव विभाग के अधिकारियों के समन्वय ने एक ऐसे बेटे को उसकी मां से मिला दिया, जिसे परिवार ने लगभग खो ही दिया था. यह घटना न केवल एसआईआर अभियान की उपयोगिता को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ किया गया प्रशासनिक कार्य कई परिवारों के जीवन में नई उम्मीद जगा सकता है. 30 वर्षों की जुदाई के बाद मां-बेटे का यह मिलन आज पूरे महाराष्ट्र में चर्चा का विषय बना हुआ है.





