समाज को बदलने के लिए ऐसे झटकों की जरूरत होती है
बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिडे ने तुकाराम मुंडे की कार्रवाई को सराहा

* खाद्य सुरक्षा अभियान को बताया जनजागरण का माध्यम
* कहा- मुंडे जैसी पहल से व्यवस्था में आएगा स्थायी बदलाव
मुंबई /दि.17- महाराष्ट्र खाद्य एवं औषध प्रशासन (एफडीए) के आयुक्त तुकाराम मुंडे द्वारा खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता को लेकर चलाए जा रहे व्यापक अभियान को अब प्रशासनिक स्तर पर भी खुला समर्थन मिलने लगा है. बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की आयुक्त अश्विनी भिडे ने मुंडे की कार्यशैली और उनके नेतृत्व में चल रही सख्त कार्रवाई की प्रशंसा करते हुए कहा है कि समाज में जागरूकता पैदा करने और व्यवस्था में सुधार लाने के लिए ऐसे झटकों की आवश्यकता होती है.
बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिडे ने कहा कि कई बार किसी महत्वपूर्ण विषय को सार्वजनिक चर्चा का केंद्र बनाने के लिए प्रशासन को प्रभावी और दृश्यमान कार्रवाई करनी पड़ती है. तुकाराम मुंडे की पहल भी उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसने खाद्य सुरक्षा, स्वच्छता और उपभोक्ता अधिकारों को राज्यव्यापी चर्चा का विषय बना दिया है. मीडिया से बातचीत में अश्विनी भिडे ने कहा कि प्रशासन में कार्यरत प्रत्येक अधिकारी की अपनी अलग कार्यशैली होती है और यही विविधता प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाती है. उन्होंने कहा, यदि सभी अधिकारी केवल नियम पुस्तिका के निर्धारित ढांचे में ही काम करें तो कई महत्वपूर्ण विषय कभी चर्चा में नहीं आ पाते. कुछ अवसरों पर समाज को झकझोरने वाले कदमों और ट्रिगर्स की आवश्यकता होती है. ऐसे प्रयासों से ही लोग किसी मुद्दे की गंभीरता को समझते हैं और उस पर व्यापक चर्चा शुरू होती है.
बीएमसी आयुक्त ने तुकाराम मुंडे को एक अनुभवी और परिपक्व प्रशासक बताते हुए कहा कि उन्हें अच्छी तरह पता है कि किसी भी सुधार अभियान के शुरुआती दौर में चर्चा और विवाद स्वाभाविक होते हैं. भिडे ने कहा, तुकाराम मुंडे जानते हैं कि यदि शुरुआत में प्रभावी कार्रवाई नहीं होगी तो लोग इस महत्वपूर्ण विषय पर ध्यान ही नहीं देंगे. मुझे पूरा विश्वास है कि वे केवल छापेमारी या कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि एक मजबूत और टिकाऊ व्यवस्था तैयार करेंगे, जो उनके कार्यकाल के बाद भी प्रभावी रूप से काम करती रहेगी.
अश्विनी भिडे ने कहा कि एफडीए का अभियान केवल नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नागरिकों में खाद्य गुणवत्ता और स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी कार्य कर रहा है. उनके अनुसार, अब उपभोक्ता स्वयं बेहतर गुणवत्ता वाले खाद्य पदार्थों की मांग करने लगे हैं. यह बदलाव किसी भी प्रशासनिक अभियान की सबसे बड़ी सफलता माना जा सकता है. उन्होंने कहा कि जब नागरिक जागरूक होते हैं तो बाजार और सेवा प्रदाताओं पर भी गुणवत्ता बनाए रखने का दबाव बढ़ता है. हालांकि भिडे ने यह भी स्वीकार किया कि किसी भी अभियान की सबसे बड़ी चुनौती उसे लंबे समय तक प्रभावी बनाए रखना होती है. उन्होंने कहा कि केवल छापेमारी और कार्रवाई से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा. इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर ऐसी व्यवस्था विकसित करनी होगी जो लगातार निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित कर सके.
गौरतलब है कि तुकाराम मुंडे ने मई 2026 में महाराष्ट्र एफडीए प्रमुख का पद संभालने के बाद खाद्य सुरक्षा को लेकर बड़े पैमाने पर अभियान शुरू किया. उनके नेतृत्व में राज्यभर के होटल, रेस्टोरेंट, डेयरी इकाइयों, खाद्य भंडारण केंद्रों और ऑनलाइन डिलीवरी प्लेटफॉर्म के डार्क स्टोर्स पर लगातार निरीक्षण किए गए. इन कार्रवाइयों में कई स्थानों पर एक्सपायर्ड खाद्य सामग्री, अस्वच्छ भंडारण व्यवस्था, खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन और मिलावट से जुड़े मामले सामने आए. कई प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित या रद्द किए गए, जबकि संबंधित संचालकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की गई.
तुकाराम मुंडे की कार्यशैली को लेकर जहां एक ओर उद्योग जगत और कुछ व्यापारिक संगठनों की ओर से सवाल उठाए गए हैं, वहीं दूसरी ओर आम नागरिकों, सामाजिक संगठनों और कई वरिष्ठ प्रशासकों ने इसे खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में आवश्यक और प्रभावी पहल बताया है. अश्विनी भिडे की टिप्पणी को भी इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह राज्य की दो प्रमुख प्रशासनिक संस्थाओं के बीच खाद्य सुरक्षा और जनस्वास्थ्य के मुद्दे पर समान सोच को दर्शाती है.





