शक्कर 66 रूपए किलो हुई, 70 होने के आसार
इथेनॉल बनाने का चक्कर पडा भारी

* निर्यात ने भी घरेलू मार्केट में बढाए दाम
* दिवाली तक राहत मिलने की उम्मीद कम
अमरावती/दि.20 – सामान्य लोगों को रोज लगनेवाली शक्कर के रेट बेतहाशा तेजी पर चल रहे हैं. स्थानीय शक्करसाथ मार्केट में आज पूर्वान्ह चीनी के होलसेल रेट 64 रूपए प्रति किलो जा पहुंचे थे. आज भी शक्कर के प्रतिकिलो रेट 66-67 रूपए हो जाने की आशंका बताई गई. इतना ही नहीं आगामी दिवाली तक त्यौहारी सीजन में मिठास कीमतों में कडवी ही रहने की आशंका अधिकांश व्यापारी व्यक्त कर रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि चीनी मिलों में स्टॉक खत्म हो गया है. नया गन्ना गलाई सीजन दिवाली पश्चात शुरू होना है, ऐसे में खुले मार्केट में माल की कमी की वजह से रेट उछल गये हैं.
* क्या कहते हैं व्यापारी
सक्करसाथ के व्यापारियों से अमरावती मंडल ने चर्चा की तो उन्होंने बताया कि शक्कर महंगी होने के अनेक कारण बताए जा रहे हैं. व्यापारियों का कहना है कि वर्षा के लहरीपन की वजह से इस बार महाराष्ट्र हो या यूपी गन्ने का उत्पादन कम हुआ था. फिर काफी मात्रा में इथेनॉल बनाने पर भी सरकार ने जोर दिया था. जिससे मार्केट में शक्कर की आवक पिछले दो माह से लगातार कम से कम तक होती गई. फलस्वरूप रेट में कुछ दिनों में ही प्रति किलो 10 रूपए से अधिक तेजी आ गई है.
* पहलीबार देखी ऐसी तेजी
सक्करसाथ के अधिकांश व्यापारियों ने यह भी कहा कि उन्होंने शक्कर के रेट में एक दो रूपए किलो की तेजी देखी है. यह सामान्य बात मानी जाती है. किंतु पहली बार देख रहे हैं कि 15 दिनों में शक्कर 10 रूपए किलो बढ गई. इससे पहले इतने वर्षो के व्यापार में उन्होंने महीने भर में शक्कर के रेट 20-22 रूपए बढ जाने की स्थिति नहीं देखी. सबकुछ अभूतपूर्व लग रहा है. व्यापारियों को भी चिंता हो रही है. कितनी महंगी शक्कर होगी और उसकी कितनी डिमांड होगी. निश्चित ही शक्कर के मामले में केन्द्र सरकार ने समय रहते ध्यान नहीं दिया. जिसके कारण रेट में तेजी आयी है. यह अभी रूकने की संभावना भी कम है. जानकारों ने चीनी के रेट कम करने के लिए सरकारी दखल की अपेक्षा व्यक्त की है.
दिवाली तक राहत नहीं
प्रमुख व्यापारियों ने अमरावती मंडल से चर्चा में बताया कि गन्ना गलाई का नया सीजन दिवाली के आसपास संभवत: दिवाली के बाद शुरू होगा. ऐसे में दिवाली तक सामान्य लोगों को शक्कर के रेट में राहत मिलने की उम्मीद कम है. वहीं कुछ लोगों ने अंदाज बताया कि शासन- प्रशासन ने शीघ्र हस्तक्षेप नहीं किया तो शक्कर भी 70 रूपए किलो तक पहुंच सकती है. जिससे मिठाईयों के सेवन पर असर होगा. उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार ध्यान देगी. घरेलू खपत का अंदाज न लग पाने के कारण काफी मात्रा में शक्कर एक्सपोर्ट कर दी गई थी. अब भारतीयों को ही मिठास का संकट हो जाने से सरकार को शक्कर के आयात का डिसीजन लेना चाहिए. जितनी जल्दी सरकारी कदम उठेेंगे. सामान्य लोगों को शक्कर और अन्य चीजों के महंगे दामों से उतनी शीघ्र राहत मिलेगी.

* सरकार हो प्रैक्टीकल
शक्कर के प्रमुख व्यापारी मनोज खंडेलवाल ने कहा कि सरकार को थोडा व्यवहारिक होना पडेगा. एक के बाद एक सभी वस्तुओं में महंगाई का तडका लगा हुआ है. शक्कर के रेट बढने से रोकने के वास्ते कदम उठाना आवश्यक है. मनोज खंडेलवाल ने कहा कि सरकार को बिना समय गंवाए शक्कर का आयात करना चाहिए. फिलहाल तो उसके अलावा रेट रोकने का कोई चारा नजर नहीं आ रहा. उल्लेखनीय है कि शहर की प्रमुख शक्कर, आटा, मैदा फर्म गंगाबकस बंसीधर जीबी के मनोज खंडेलवाल संचालक है. उन्होंने कहा कि सामान्य लोग तेल हो या शक्कर एक सीमा तक मूल्यवृध्दि को मान्य करते हैं. किंतु ताजा मामलों में दोनों ही वस्तुओं के रेट बेतहाशा बढते प्रतीत हो रहे हैं.

मिलों में स्टॉक खत्म
प्रतिष्ठित फर्म शिवसहाय सूरज नारायण के संचालक अरूण खंडेलवाल ने बताया कि चीनी मिलों में स्टॉक खत्म हो गया है. सरकार द्बारा जारी खुले मार्केट का स्टॉक भी खत्म होने की कगार पर है. सरकार ने पहले एक्सपोर्ट कर दिया. उसी प्रकार इथेनॉल भी एक कारण बताया जा रहा है. अभी तो नया उत्पादन शुरू होने तक चीनी में महंगाई जारी रहने की आशंका दिखाई दे रही है. सरकार ने आगे गन्ने से इथेनॉल न बनाने का निर्णय किया है. जिससे कुछ माह बाद शक्कर के रेट पहले के समान 45-50 की रेंज में आ जायेंगे.

* कीमतें कंट्रोल के बाहर
प्रमुख व्यापारी गोविंद सोमाणी ने कहा कि वे पहलीबार देख रहे हैं कि शक्कर के रेट नियंत्रण के बाहर हो गये हैं. आज दोपहर यहां होलसेल मार्केट में 6250 रूपए प्रति क्विंटल बोले गये. निश्चित ही चिल्लर मार्केट में रेट 66 रूपए तक जा पहुंचे होंगे. चीनी कारखानों में माल नहीं बचा है. उसी प्रकार इथेनॉल के चक्कर में कहीं शक्कर के दाम 70 रूपए प्रति किलो न पहुंच जाए, ऐसी आशंका बोली जा रही है.





