2 अक्टूबर की ग्रामसभा में लें ‘बाल विवाह मुक्त गांव’ का संकल्प
जिला परिषद उएज सत्यम गांधी के ग्राम पंचायतों को निर्देश

जागरूकता के साथ रोकथाम पर जोर
अमरावती/दि.1 – बाल विवाह एक सामाजिक रूप से हानिकारक प्रथा है, जिसका बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और समग्र विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के तहत अमरावती जिले में बाल विवाह रोकने के लिए व्यापक जनजागरूकता और प्रतिबंधात्मक उपाय किए जा रहे हैं. इसी क्रम में 2 अक्टूबर को आयोजित होने वाली ग्रामसभा में ‘बाल विवाह मुक्त गांव’ का प्रस्ताव पारित करने के निर्देश जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सत्यम गांधी ने जिले की ग्राम पंचायतों को दिए हैं.
* ग्रामसभा के एजेंडे में शामिल होगा विषय
ग्रामसभा के एजेंडे में ‘बाल विवाह मुक्त गांव’ विषय को शामिल कर उस पर विस्तृत चर्चा करने के निर्देश दिए गए हैं. ग्रामीणों को बाल विवाह से संबंधित कानूनी प्रावधानों, इसके दुष्परिणामों और बाल विवाह रोकने में नागरिकों की भूमिका के बारे में भी जानकारी दी जाएगी. ग्रामसभा में हमारे गांव में किसी भी बच्चे का बाल विवाह नहीं होगा और बाल विवाह को प्रोत्साहन नहीं दिया जाएगा आशय का प्रस्ताव सर्वसम्मति अथवा बहुमत से पारित करने का आह्वान किया गया है.
* ग्रामस्तरीय तंत्र की सक्रिय भागीदारी
बाल विवाह की रोकथाम में माता-पिता, ग्राम पंचायत सदस्य, शिक्षक, आंगनवाड़ी सेविका, आशा सेविका, ग्रामसेवक, पुलिस पाटिल, स्वयंसेवी संस्थाओं सहित संबंधित घटकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं. गांव में संभावित बाल विवाह की जानकारी मिलने पर तत्काल बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी, पुलिस विभाग, जिला बाल संरक्षण अधिकारी अथवा चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 को सूचना देने के संबंध में भी ग्रामीणों को जागरूक किया जाएगा.
* प्रस्ताव और कार्रवाई का रखा जाएगा रिकॉर्ड
ग्रामसभा में पारित प्रस्ताव, उपस्थिति पत्रक, जागरूकता कार्यक्रमों के फोटो-वीडियो तथा बाल विवाह रोकने के लिए की गई कार्रवाई की रिपोर्ट सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं. प्रस्ताव पारित करने वाले गांवों की सूची और संबंधित प्रस्तावों को ग्राम पंचायत समिति स्तर पर संकलित कर तालुकानुसार रिपोर्ट जिला प्रशासन को भेजी जाएगी. बाल विवाह रोकथाम के लिए आवश्यक मानदंड पूरा करने वाले गांवों को ग्रामसभा के प्रस्ताव के आधार पर ‘बाल विवाह मुक्त गांव’ घोषित करने की आगे की प्रक्रिया संबंधित दिशा-निर्देशों के अनुसार की जाएगी.
* सिर्फ प्रस्ताव तक सीमित न रहे अभियान
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ‘बाल विवाह मुक्त गांव’ की संकल्पना केवल ग्रामसभा में प्रस्ताव पारित करने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए. गांवों में लगातार जनजागरूकता, निगरानी और प्रतिबंधात्मक कार्रवाई प्रभावी ढंग से चलाना जरूरी है. जिले के प्रत्येक गांव को बाल विवाह मुक्त बनाने के लिए ग्राम पंचायत, प्रशासन और नागरिकों के बीच समन्वय आवश्यक है. इसी उद्देश्य से 2 अक्टूबर की ग्रामसभा में ठोस संकल्प लेने का आह्वान किया गया है.





