‘केन्द्र शासनला डोज द्यायलाच हवा, केमिस्ट बांधव जगायलाच हवा’

दवा विक्रेताओं का कडी धूप में पैदल मार्च

* ऑनलाइन विक्री के विरूध्द जोरदार एल्गार
* नारो ने किया आकर्षित, केमिस्ट असो. की अभूतपूर्व एकता का प्रदर्शन
* देशव्यापी हडताल में अमरावती में भी कडा बंद
अमरावती/दि.20 – मानव जीवन पर असर करनेवाली दवाईयों के ऑनलाइन व्यापार के खिलाफ ऑल इंडिया केमिस्ट असो. के आवाहन पर आयोजित राष्ट्रव्यापी हडताल अमरावती में भी पूर्ण रूप से सफल रही. केमिस्ट असो. ने अभूतपूर्व एकता का परिचय दिया. सबेरे 11 बजे की 42-43 डिग्री की कडी धूप में असो. अध्यक्ष सौरभ मालानी, उपाध्यक्ष मनोज डफले, सचिव राजा नानवानी के नेतृत्व में इर्विन चौक से कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च ले जाकर सैकडों दवा व्यापारियों ने शासन के नाम कलेक्टर को तीन पेज का विस्तृत निवेदन सौंपा. इस समय व्यापारियों ने बांह पर काली पट्टी लगाकर हाथों में अपनी मांग संबंधी नारे लिखी तख्तियां ले रखी थी.
निवेदन सौंपते समय सैकडों की संख्या में केमिस्ट उपस्थित थे. जिनमें दीपक सोमैया, संजय बोबडे, प्रवीण देशमुख, अनिल टाले, तुषार कासट, विवेक कालबांडे, दीपक नथानी, अंशुल अग्रवाल, विजय खत्री, कौशल सारडा, निखिल देशमुख, गोविंदा केला, तनवीर पटेल, अरूणा चौधरी, रवि तोटे, सुयोग लढढा, रितेश बूब, गोपाल बागडी, साबिर भाई, गौरव राउल, तोहसीफ अहमद, अजय ढोरे, भारती मोहोकार, आनंद अग्रवाल, अतुल देशमुख, गणेश गावंडे, प्रतीक वसंत, महेश बूथ, श्याम जाजू, तुषार भोयर, राजेश निंभोरकर, अमन पेलागडे, विजय खंडेलवाल, ललित राठी, पार्थ खंडेलवाल, श्रीकांत राजुरकर, हेमंत घोरे, गणेश केडिया, नंदकिशोर भुसारी, राहुल श्यामदासानी, बजरंग खंडेलवाल, नईम भाई, स्वप्निल सुराना, अमिन भुरा, कुलभूषण मालवीय, राजा टांक, अरूण गुप्ता, कविता लोले, वेदांत सारडा, योगेश उमप, विक्रम सरोदे, राजू टेकाडे, सचिन शिरभाते, रणजीत मोझरीकर, कुलदीप कात्रे, रूपेश साबले, प्रकाश बनारसे, प्रवीण गजभिए, धीरज देशमुख, मनोज गुल्हाने, आशीष बंदे, सतीश कानुगा, प्रवीण लढ्ढा, चेतन कुबडे, नरेंद्र वानखडे, अमित येवले, राहुल वानखडे, राजेश निकम, राजू बहुरूपी, अंकुश मोघे, धनंजय मेंढे, सुदेश भेले, संदीप चांडक, पवन अग्रवाल, मनोज कटारिया, जावेद खान, तुषार गणेशर, गोपाल लोंढे, विलास कुरलकर, धर्मराज परलीकर आदि प्रमुख रहे.
जिलाधीश को सौंपे गये निवेदन में केन्द्र सरकार से 6 मुद्दों पर मुख्य रूप से डिमांड दी गई है. जिसमें बडी कार्पोरेट कंपनियों क शोषणयुक्त प्रीडेटरी प्राइजिंग, इ- फार्मसी के गैर कानूनी और अनियंत्रित संचालन और 28 अगस्त 2018 की अधिसूचना 817 ई और 26 मार्च 2020 की अधिसूचना 220 ई रद्द करने की मांग शामिल है. निवेदन में दवा विक्रेताओं ने अनियंत्रित ई फार्मसी से होेनेवाले गंभीर खतरों की ओर भी शासन – प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की है.
* बगैर जांच सप्लाई हो रही दवाईयां
निवेदन के अनुसार ऑनलाइन दवा प्लेटफार्म से दवा और सौंदर्य प्रसाधन कानून 1940 और उसके अंतर्गत नियम 1945 का सरासर उल्लंघन हो रहा है. रूग्ण सुरक्षा से जुडे यह नियम तार- तार हो रहे हैं. बगैर जांच दवाईयां दी जा रही है. डॉक्टर की चिठ्ठी अर्थात प्रिस्क्रिप्शन का बार- बार उपयोग एवं फर्जी प्रिस्क्रिप्शन पर भी तेज असर एवं व्यसनकारक दवाईयों की सप्लाई हो रही है.

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