चिखलदरा की डोमा शाला में कलेक्टर ने रातभर किया मुकाम
भूत के डर से 300 बच्चों ने छोड़ी आश्रमशाला

* सप्तखंजेरी वादन और प्रबोधनात्मक कीर्तन भी हुए
* सोशल मीडिया से लेकर देशभर में चर्चा
अमरावती/चिखलदरा/दि.2- कुपोषण के लिए चर्चित मेलघाट अब एक कथित भूत-प्रेत की अफवाह को लेकर सुर्खियों में है. चिखलदरा तहसील के डोमा स्थित शासकीय निवासी आश्रमशाला में कुछ छात्राओं के अचानक रोने, चीखने, हंसने और अजीब व्यवहार करने की घटनाओं के बाद स्कूल में भूत-प्रेत होने की अफवाह फैल गई. देखते ही देखते यह अफवाह इतनी बढ़ गई कि करीब 300 विद्यार्थियों ने डर के कारण आश्रमशाला छोड़ दी. स्थिति को देखते हुए अमरावती के जिलाधिकारी आशिष येरेकर खुद आश्रमशाला में रातभर रुके और विद्यार्थियों व अभिभावकों से भयभीत न होने की अपील की.
* चार छात्राओं से शुरू हुआ मामला
बताया गया कि 22 जुलाई की रात आश्रमशाला की चार छात्राएं अचानक रोने और चीखने लगीं. कुछ देर बाद वे जोर-जोर से हंसने लगीं और कभी-कभी बिल्कुल शांत होकर किसी भी बात का जवाब नहीं दे रही थीं. यह देखकर अन्य छात्राएं भी घबरा गईं और शिक्षकों को इसकी जानकारी दी गई. शुरुआत में माना गया कि घर से दूर रहने, माता-पिता की याद और मानसिक तनाव के कारण छात्राओं में इस तरह के लक्षण दिखाई दे सकते हैं. हालांकि, बाद में कुछ अन्य छात्राओं में भी इसी तरह का व्यवहार दिखाई देने लगा. इससे स्थिति और गंभीर हो गई.
* अफवाहों ने बढ़ाया डर
घटना की जानकारी आसपास के गांवों में फैलते ही अभिभावक आश्रमशाला पहुंचने लगे. स्थानीय स्तर पर इसे भूत-प्रेत से जोड़कर अलग-अलग तरह की बातें सामने आने लगीं. कुछ लोगों का दावा है कि आश्रमशाला के पास मौजूद मोह के पेड़ों को काटने के बाद यह घटनाएं शुरू हुईं. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार इन पेड़ों पर आत्माओं का वास होता है. वहीं, एक अन्य चर्चा के अनुसार आश्रमशाला के पीछे स्थानीय आदिवासी देवी-देवताओं का स्थान है और स्कूल का गंदा पानी उस दिशा में छोड़े जाने से देवता नाराज हुए हैं. एक और दावा यह है कि स्कूल के पास खेत में एक आदिवासी युवक की मौत हुई थी और उसी की आत्मा विद्यार्थियों को परेशान कर रही है. हालांकि, इन दावों की कोई पुष्टि नहीं हुई है.
* एक ही उम्र की छात्राओं में लक्षण
इस पूरे मामले में सबसे अधिक ध्यान देने वाली बात यह है कि कथित तौर पर इस तरह का व्यवहार एक निश्चित आयु वर्ग की छात्राओं में ही देखा गया. विद्यार्थियों में ऐसी शिकायतें सामने नहीं आईं. साथ ही कुछ छात्राएं एक ही गांव अथवा आसपास के क्षेत्र से संबंधित होने की बात भी सामने आई है. प्रशासन की ओर से इसे मानसिक तनाव और सामूहिक मनोवैज्ञानिक प्रतिक्रिया के नजरिए से भी देखा जा रहा है.
* जिलाधिकारी ने रातभर स्कूल में बिताई रात
अफवाहों पर रोक लगाने और विद्यार्थियों का डर दूर करने के लिए जिलाधिकारी आशिष येरेकर ने खुद डोमा आश्रमशाला में रातभर मुकाम किया. विद्यार्थियों के लिए नए और सुसज्जित भवन में छात्रावास की व्यवस्था की गई है. जिलाधिकारी ने विद्यार्थियों से बिना किसी डर के स्कूल में रहने और पढ़ाई जारी रखने की अपील की. विद्यार्थियों और अभिभावकों के मन से भय दूर करने के लिए राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज के विचारों से प्रेरित सप्तखंजेरी वादक संदीप पाल महाराज के प्रबोधनात्मक कीर्तन का भी आयोजन किया गया. प्रशासन की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन अभिभावकों और विद्यार्थियों के मन में बैठा डर अभी पूरी तरह दूर नहीं हुआ है. डोमा आश्रमशाला में कुल 263 छात्र और 345 छात्राएं शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं. भूत-प्रेत की अफवाह के कारण करीब 300 विद्यार्थियों के स्कूल छोड़ने से प्रशासन के सामने उन्हें दोबारा स्कूल में लाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है.





