2020 में बदला पूरा गणित, अब 2026 की नई जंग
अमरावती संभाग शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव

* 27 उम्मीदवारों के बीच निर्दलीय किरण सरनाईक की जीत ने बदली अमरावती शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की राजनीति
* ‘पैठणी पैटर्न’ की चर्चा से लेकर दलगत सक्रियता तक, छह वर्षों में बदली चुनावी तस्वीर
भाग – 2
अमरावती/दि.25 – वर्ष 2014 में प्रा. श्रीकांत देशपांडे की जीत के साथ अमरावती विभाग शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की राजनीति में जो बदलाव दिखाई देना शुरू हुआ था, वह वर्ष 2020 तक आते-आते और स्पष्ट हो गया. शिक्षक परिषद और विदर्भ माध्यमिक शिक्षक संघ की पारंपरिक प्रतिस्पर्धा से बाहर निकलकर चुनाव में राजनीतिक दलों की सक्रियता बढ़ी और मुकाबला बहुकोणीय हो गया. इसी बीच वर्ष 2020 में निर्दलीय उम्मीदवार किरण रामराव सरनाईक ने तत्कालीन राजनीतिक समीकरणों को पीछे छोड़ते हुए जीत दर्ज की. यह चुनाव कई मायनों में महत्वपूर्ण रहा. कुल 27 उम्मीदवार मैदान में थे, मतगणना करीब 40 घंटे तक चली और वरीयता आधारित मतदान प्रणाली के कारण अंतिम परिणाम कई चरणों की गणना के बाद सामने आया.
* सन 2020 में 27 उम्मीदवारों ने आजमाया भाग्य
वर्ष 2020 के चुनाव में कुल 27 उम्मीदवार मैदान में थे. भाजपा ने डॉ. नितीन धांडे को उम्मीदवार बनाया था, जबकि तत्कालीन विधायक प्रा. श्रीकांत देशपांडे को महाविकास आघाड़ी का समर्थन प्राप्त था. चुनाव में इन दोनों के बीच मुख्य मुकाबला होने की चर्चा थी. लेकिन परिणाम ने इस आकलन को बदल दिया. निर्दलीय उम्मीदवार किरण रामराव सरनाईक ने चुनाव जीतकर विधान परिषद में प्रवेश किया. इस जीत के साथ शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में एक बार फिर यह तथ्य सामने आया कि संगठित राजनीतिक समर्थन के बावजूद निर्दलीय उम्मीदवार भी यहां अपना स्वतंत्र चुनावी आधार बना सकता है.
* आंकड़ों में 2020 का चुनाव
कुल मतदाता : 35,622
कुल मतदान : 30,918
वैध मत : 29,829
कुल उम्मीदवार : 27
किरण सरनाईक : 15,606 मत
श्रीकांत देशपांडे : 9,191 मत
जीत का अंतर : 3,242 मत
मतगणना : करीब 40 घंटे
* वरीयता मतों ने तय किया परिणाम
अमरावती शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव की एक महत्वपूर्ण विशेषता इसकी वरीयता आधारित मतदान प्रणाली है. मतदाता उम्मीदवारों को पहली, दूसरी और आगे की पसंद के रूप में वरीयता देते हैं. पहली पसंद के मतों की गणना के बाद यदि किसी उम्मीदवार को निर्धारित कोटा नहीं मिलता, तो नियमों के अनुसार आगे की वरीयताओं के मतों का हस्तांतरण किया जाता है. वर्ष 2020 में भी इसी प्रक्रिया के तहत मतगणना आगे बढ़ी और अंततः किरण सरनाईक ने आवश्यक कोटा हासिल कर जीत दर्ज की. बड़ी संख्या में उम्मीदवार होने के कारण मतगणना प्रक्रिया लंबी चली और करीब 40 घंटे तक परिणाम का इंतजार करना पड़ा.
* ‘पैठणी पैटर्न’ की चर्चा से गरमाया चुनाव
2020 के चुनाव के बाद राजनीतिक और चुनावी चर्चाओं में ‘पैठणी पैटर्न’ शब्द भी सामने आया. किरण सरनाईक से संबंधित चुनावी गतिविधियों को लेकर पैठणी साड़ियों, बैग और धन वितरण जैसे आरोप लगाए गए. चुनावी अनियमितताओं को लेकर भी विभिन्न स्तरों पर आरोप-प्रत्यारोप हुए. हालांकि इन चर्चाओं और आरोपों से अलग प्रमाणित चुनाव परिणाम यह है कि किरण सरनाईक ने चुनाव जीतकर विधान परिषद में प्रवेश किया. आरोपों और उनके प्रमाणित निष्कर्ष के बीच अंतर रखना इस चुनाव के इतिहास को समझने के लिए महत्वपूर्ण है.
* सरनाईक की जीत : निर्दलीय से राजनीतिक दल तक
वर्ष 2020 में किरण सरनाईक ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था. उन्होंने तत्कालीन महाविकास आघाड़ी समर्थित उम्मीदवार प्रा. श्रीकांत देशपांडे को पराजित किया. किरण सरनाईक मूलतः वाशिम से जुड़े हैं. वाशिम में उनकी शिक्षा संस्था है और उनकी संस्था के माध्यम से अनेक स्कूलों तथा महाविद्यालयों का संचालन किया जाता है. इस तरह उनकी पृष्ठभूमि भी सीधे शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी रही, लेकिन वे पारंपरिक अर्थ में शिक्षक संगठन के सक्रिय शिक्षक नेता के बजाय बड़े शिक्षा संस्थान के संचालक के रूप में चुनाव मैदान में आए. यही तथ्य 2020 के चुनाव को 1983 से चले आ रहे इतिहास से अलग करता है. पहले जहां शिक्षक संगठनों के सक्रिय शिक्षक उम्मीदवार बनकर चुनाव लड़ते थे, वहीं अब शिक्षा संस्थान चलाने वाले व्यक्ति भी इस चुनाव के प्रमुख दावेदारों में शामिल होने लगे.
* देशपांडे से सरनाईक तक बदला प्रतिनिधित्व का स्वरूप
यदि 1983 से अब तक निर्वाचित प्रमुख चेहरों की पृष्ठभूमि पर नजर डालें, तो तस्वीर में लगातार बदलाव दिखाई देता है.
बाबासाहेब सोमवंशी – नेरपिंगलाई से जुड़े, भारतीय विद्यालय के मुख्याध्यापक.
वसंतराव मालधुरे – अमरावती के गणेशदास राठी विद्यालय के शिक्षक.
दिवाकर पांडे – यवतमाल से जुड़े शिक्षक.
वसंतराव खोटरे – अकोला के शिवाजी महाविद्यालय के प्राध्यापक.
प्रा. श्रीकांत देशपांडे – अमरावती से जुड़े, प्रशिक्षण संस्था के संचालक तथा शिक्षक सेना के उम्मीदवार.
किरण रामराव सरनाईक – वाशिम निवासी, शिक्षा संस्था के संचालक और वर्ष 2020 के निर्दलीय विजेता.
इस क्रम में यह बदलाव स्पष्ट दिखाई देता है कि निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व धीरे-धीरे पारंपरिक शिक्षक संगठन के सक्रिय कार्यकर्ताओं से आगे बढ़कर शिक्षा संस्थानों से जुड़े और राजनीतिक रूप से सक्रिय व्यक्तियों तक पहुंचा.
* 2026 : अब शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में नई राजनीतिक तस्वीर
वर्ष 2026 में अमरावती शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है. मौजूदा विधायक किरण सरनाईक अब शिवसेना (एकनाथ शिंदे) के साथ हैं और इसी राजनीतिक पहचान के साथ चुनावी तैयारी कर रहे हैं. दूसरी ओर पूर्व विधायक प्रा. श्रीकांत देशपांडे का नाम भी चर्चा में है. कांग्रेस की संभावित उम्मीदवार के रूप में प्रा. अदिति पोहरे का नाम सामने आ रहा है. भाजपा के दावेदारों के साथ-साथ विभिन्न शिक्षक संगठनों के संभावित उम्मीदवार भी चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में हैं. इससे यह संकेत मिलता है कि 2026 का मुकाबला भी केवल किसी एक संगठन की पारंपरिक लड़ाई तक सीमित नहीं रहने वाला है. शिक्षक संगठन, राजनीतिक दल और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े व्यक्तिगत प्रभाव, तीनों की भूमिका चुनाव में दिखाई दे सकती है.
* विधानसभा-लोकसभा की तरह हाईप्रोफाइल हुआ शिक्षक चुनाव
अमरावती शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के शुरुआती चुनावों में शिक्षक संगठन और शिक्षक मतदाता ही चुनाव का मुख्य केंद्र हुआ करते थे. आज तस्वीर बदल चुकी है. राजनीतिक दल अपने उम्मीदवारों के समर्थन में सक्रिय दिखाई देते हैं, चुनावी प्रबंधन अधिक व्यापक हो गया है और उम्मीदवारों की राजनीतिक पहचान भी पहले की तुलना में महत्वपूर्ण हो गई है. 2020 में 27 उम्मीदवारों का मैदान, करीब 40 घंटे चली मतगणना और वरीयता मतों के जरिए निकला परिणाम इस चुनाव की जटिलता को दर्शाता है. अब यह निर्वाचन क्षेत्र भी विधानसभा और लोकसभा चुनावों की तरह हाईप्रोफाइल चुनावी मुकाबले के रूप में देखा जाने लगा है.
* 43 वर्षों में बदलते रहे चेहरे, नहीं रुकी राजनीतिक करवट
1983 से अब तक के चुनावी इतिहास को एक क्रम में देखें तो निर्वाचित प्रमुख चेहरों का सिलसिला इस प्रकार रहा, बाबासाहेब सोमवंशी, वसंतराव मालधुरे, दिवाकर पांडे, वसंतराव खोटरे, प्रा. श्रीकांत देशपांडे, किरण रामराव सरनाईक. इस क्रम में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कोई भी संगठन या राजनीतिक धड़ा लगातार निर्विवाद रूप से इस सीट पर अपना प्रभुत्व कायम नहीं रख सका. कभी विमाशि आगे रहा, कभी शिक्षक परिषद ने बाजी मारी, फिर शिक्षक सेना के माध्यम से राजनीतिक संगठन ने प्रवेश किया और 2020 में निर्दलीय उम्मीदवार ने दोनों प्रमुख राजनीतिक खेमों को पीछे छोड़कर जीत हासिल की.
* 2026 में फिर सवालों के घेरे में पुराना गणित
अब वर्ष 2026 में चुनावी तस्वीर एक बार फिर बदलती दिखाई दे रही है. मौजूदा विधायक के सामने पुराने राजनीतिक चेहरे, नए संभावित उम्मीदवार, राजनीतिक दलों के प्रत्याशी और शिक्षक संगठनों के उम्मीदवार मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं. इसलिए 43 वर्षों के इतिहास को देखें तो अमरावती शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की सबसे स्थायी विशेषता किसी एक संगठन या चेहरे का स्थायी वर्चस्व नहीं, बल्कि लगातार बदलते चुनावी समीकरण रहे हैं. 1983 में जहां शिक्षक संगठन चुनाव की धुरी थे, वहीं 2014 के बाद राजनीतिक दलों की भूमिका बढ़ी और 2020 में निर्दलीय उम्मीदवार की जीत ने एक अलग संभावना सामने रखी. अब 2026 का चुनाव इस बदलती परंपरा में एक और अध्याय जोड़ने की तैयारी में है.





