‘इंद्रायणी’ उपन्यास मराठी साहित्य जगत में महत्वपूर्ण योगदान
साहित्यकार डॉ. शोभा रोकड़े का प्रतिपादन

अमरावती /दि.1– लेखन तकनीक, कथावस्तु और लेखन कौशल के स्तर पर खरी उतरने वाली छाया राऊत-बर्वे की ‘इंद्रायणी’ कादंबरी ने मराठी साहित्य जगत में महत्वपूर्ण योगदान दिया है. यह प्रतिपादन प्रसिद्ध साहित्यकार एवं विदर्भ साहित्य संघ की केंद्रीय सदस्य डॉ. शोभा रोकड़े ने किया.
श्री शिवाजी कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय के जनसंवाद विभाग तथा विदर्भ साहित्य संघ, अमरावती शाखा की ओर से डॉ. पंजाबराव देशमुख सभागृह में ‘इंद्रायणी’ पर आयोजित चर्चासत्र में वे बोल रही थीं. कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. महेंद्र मेटे ने की. इस अवसर पर विदर्भ साहित्य संघ के अध्यक्ष डॉ. श्यामसुंदर निकम, सचिव आबासाहेब कडू, उपन्यासकार विशाल मोहोड़ और मराठी विभाग प्रमुख डॉ. सुवर्णा गाडगे उपस्थित थे. चर्चा में वक्ताओं ने कहा कि उपन्यास में ग्रामीण जीवन की कहावतों, समृद्ध वर्हाड़ी भाषा, ओवियों तथा संघर्ष, गरीबी और कठिनाइयों के बीच जीवन को समृद्ध बनाने वाली महिला नायिका का प्रभावी चित्रण किया गया है. लेखिका छाया राऊत-बर्वे ने उपन्यास की रचना यात्रा भी प्रस्तुत की. इस अवसर पर उनका विदर्भ साहित्य संघ एवं परिवर्तन प्रबोधिनी की ओर से सत्कार किया गया. कार्यक्रम का संचालन प्रा. मनीषा देशमुख ने किया, जबकि आभार आबासाहेब कडू ने माना. कार्यक्रम में प्राध्यापक, साहित्यप्रेमी और विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित थे.





