मंत्री के पेट से मंत्री, विधायक के पेट से विधायक बनने की परंपरा बंद होनी चाहिए

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का परिवारवाद और जातीय राजनीति पर निशाना

* बोले – माता-पिता की राजनीतिक विरासत नहीं, अपने दम पर बनाएं पहचान
पुणे /दि.28- केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने देश की राजनीति में बढ़ते परिवारवाद और जातीय आधार पर बनाए जाने वाले राजनीतिक समीकरणों पर टिप्पणी की है. उन्होंने कहा कि राजनीति में विधायक के परिवार से विधायक, सांसद के परिवार से सांसद और मंत्री के परिवार से मंत्री बनने की परंपरा कहीं न कहीं रुकनी चाहिए. हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी राजनीतिक नेता का बेटा या बेटी होना कोई अपराध नहीं है, लेकिन उन्हें अपनी पहचान अपने कर्तृत्व के आधार पर बनानी चाहिए.
पुणे में सामाजिक कार्यकर्ता और ‘सरहद’ संस्था के संस्थापक संजय नहार के षष्टिपूर्ति समारोह में ऑनलाइन संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री गडकरी ने राजनीति, समाजसेवा और नेतृत्व के बदलते स्वरूप पर अपनी बात रखी. कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री सुशील कुमार शिंदे, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटील, राज्यमंत्री माधुरी मिसाल समेत विभिन्न क्षेत्रों के लोग उपस्थित थे.
इस अवसर पर राजनीतिक परिवारवाद पर केंद्रीय मंत्री गडकरी ने कहा कि राजनीतिक विरासत मिलना अपने आप में गलत नहीं है, लेकिन केवल माता-पिता के नाम और राजनीतिक प्रभाव के आधार पर आगे बढ़ना उचित नहीं है. उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अपने काम और क्षमता के बल पर समाज में स्थान बनाना चाहिए. उन्होंने समाजसेवी बाबा आमटे का उदाहरण देते हुए कहा कि बाबा आमटे ने समाज के लिए बड़ा काम किया और उनके पुत्र विकास आमटे तथा प्रकाश आमटे ने भी अपने स्वतंत्र कार्यों से समाज में पहचान बनाई.
केंद्रीय मंत्री गडकरी ने राजनीति और समाजसेवा के बीच अंतर बताते हुए कहा कि सामान्यतः राजनेता अगले चुनाव को ध्यान में रखकर काम करता है, जबकि सामाजिक और आर्थिक सुधारक आने वाली पीढ़ियों और सदियों को ध्यान में रखते हैं. उन्होंने कहा कि अच्छा सामाजिक कार्य करने वाले व्यक्ति को अपने काम का प्रचार करने के लिए पोस्टर या कटआउट लगाने की आवश्यकता नहीं होती. समाज के लिए ईमानदारी से किए गए कार्य की पहचान लोगों के बीच अपने आप बनती है.
राजनीतिक दलों की ओर से विभिन्न जातियों के आधार पर बनाए जाने वाले संगठनों और सेल पर भी केंद्रीय मंत्री गडकरी ने टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि जाति, पंथ, धर्म और भाषा के आधार पर राजनीतिक विभाजन लंबे समय तक उपयोगी नहीं होता. उन्होंनेन अपने राजनीतिक अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि वे स्वयं पार्टी अध्यक्ष रहते हुए विभिन्न जातियों के सेल बना चुके हैं. चुनाव जीतने के लिए तत्कालीन परिस्थितियों में कई तरह के राजनीतिक प्रयोग किए गए, लेकिन बाद में उन्हें महसूस हुआ कि इस प्रकार की व्यवस्था टिकाऊ नहीं है.
कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री गडकरी ने ‘सरहद’ संस्था के संस्थापक संजय नहार के सामाजिक कार्यों की सराहना की. उन्होंने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के दौर में प्रभावित परिवारों को सहायता देने और सामाजिक सौहार्द कायम करने के लिए किए गए प्रयासों का उल्लेख किया. गडकरी के वक्तव्य में राजनीतिक विरासत के बजाय योग्यता और स्वकर्तृत्व तथा जातीय समीकरणों के बजाय व्यापक सामाजिक हित को महत्व देने की आवश्यकता पर जोर रहा.

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