आज आधा शहर एकबार फिर रहा प्यासा
ठेकेदारों के कामबंद की वजह से जलापूर्ति रही ठप

* मजीप्रा की ओर से नहीं की गई थी कोई पर्यायी व्यवस्था
अमरावती/दि.14- अभी हाल फिलहाल ही अमरावती महानगर ने उस समय भीषण जलकिल्लत का सामना किया. जब डवरगांव के निकट सिंभोरा बांध से अमरावती शहर तक पानी पहुंचनेवाली मुख्य पाईपलाईन में लिकेज हो गया था और हजारों लीटर पानी बर्बाद होने के साथ ही शहर में 5 से 6 दिन तक जलापूर्ति भी ठप रही. भीषण गर्मी के मौसम में पैदा हुई स्थिति के चलते शहरवासियों को जबरदस्त जलकिल्लत का सामना करना पडा था. लेकिन विगत 10 व 11 मई से जलापूर्ति दूबारा सुचारू हो जाने के चलते शहरवासियों ने राहत की सांस ली थी. परंतु इस बात को दो दिन भी नहीं बिते है कि और एक बार फिर शहर पर जलापूर्ति ठप होकर जलकिल्लत की समस्या पैदा होने का साया मंडरा रहा हैं, क्योंकि जीवन प्राधिकरण के साथ काम करनेवाले जलापूर्ति ठेकेदारों ने अपने बकाए भुगतान की मांग को लेकर आज से काम बंद आंदोलन शुरू कर लिया हैं. जिसके तहत आज सुबह से जलापूर्ति ठेकेदारों ने अपनी टीम के लोगों को जलापूर्ति शुरू करने हेतु वॉल्व खोलने के काम पर भेजा ही नही. जिसकी वजह से आज एक बार भी आधे शहर में जलापूर्ति ठप रही. क्योंकि कामबंद आंदोलन की पूर्व सूचना रहने के बावजूद मजीप्रा द्बारा इस बारे में कोई पर्यायी व्यवस्था को तैयार नहीं रखा गया था, बल्कि मजीप्रा के स्थानीय अधिकारियों ने आंदोलनकारी ठेकेदारों के साथ बातचीत करते हुए और उन्हें आश्वासन देते हुए जलापूर्ति को सुचारू करने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा रखी थी. लेकिन दोपहर बाद तक मजीप्रा प्रशासन एवं जलापूर्ति ठेकेदारों के बीच किसी भी तरह का समझौता नहीं हो पाया. जिसका सिधा खामियाजा शहर के उन क्षेत्रों के नागरिकों को उठाना पडा, जिन क्षेत्रों में मजीप्रा द्बारा तय की गई ‘एकी-बेकी’ यानी एक दिन आड जलापूर्ति वाली नीति के तहत आज जलापूर्ति होनी थी. क्योंकि उन रिहायशी क्षेत्रों में आज नलों से पानी ही नहीं आया और अब यदि हडताल खत्म होती भी है तो भी उन क्षेत्रों को परसों यानी शनिवार 16 मई को पानी मिलेगा. जिसके चलते 6 दिन के बाद विगत 12 मई को पानी मिलने के उपरांत अब उन इलाकों को चार दिन बाद 16 मई को पानी मिलने की उम्मिद हैं.
यहां यह विशेष उल्लेखनीय है कि जलापूर्ति ठेकेदारों द्बारा दो दिन पहले ही 14 मई से अपनी प्रलंबित मांगों के लिए बेमुदत कामबंद आंदोलन करने की घोषणा कर दी गई थी. जिसकी पूर्व सुचना मजीप्रा प्रशासन को भी दे दी गई थी. लेकिन इसके बावजूद हडताल के दौरान शहर में जलापूर्ति को पूर्ववत एवं सुचारू रखने हेतु मजीप्रा द्बारा समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए. बल्कि पूरा ध्यान संभावित हडताल को टालने पर केंद्रीत रखा गया. यही वजह रही कि आज जब ठेकेदारों के कामबंद आंदोलन की वजह से शहर में जलापूर्ति का नियोजन गडबडाया तो उसे संभालने हेतु मजीप्रा के पास कोई पर्यायी व्यवस्था नहीं थी.
खास बात यह भी है कि दैनिक अमरावती मंडल द्बारा मजीप्रा के जलव्यवस्थापन विभाग के अभियंता संजय लेवकर एवं कार्यकारी अभियंता सोलंके से जानकारी व प्रतिक्रिया हेतु संपर्क करने का कई बार प्रयास किया गया. लेकिन पूरे शहर को जलापूर्ति के लिए जिम्मेदार रहनेवाले इन दोनों अधिकारी की ओर से किसी भी प्रयास पर कोई भी प्रतिसाद नहीं दिया गया. जिससे सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि शहर वासियों की समस्याओं और दिक्कतों को लेकर मजीप्रा के स्थानीय अधिकारियों द्बारा इस तरह की संजीदगी दिखाई हैं.





