महिलाओं को आत्मरक्षा के लिए दुर्गा बनना होगा : काजल हिंदुस्तानी
दर्यापुर में काजल हिंदुस्तानी की सभा में उमड़ी भारी भीड़

* गोपाल अरबट मित्र मंडल का आयोजन सुपर हिट
दर्यापुर /दि.14- यदि महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों को रोकना है, तो उन्हें आत्मरक्षा के लिए दुर्गा बनना होगा. अपने बच्चों पर अच्छे संस्कार डालें, मोबाइल के अत्यधिक उपयोग से दूर रहें और किसी भी अजनबी व्यक्ति को सोशल मीडिया पर मित्र न बनाएं. यह आह्वान सुप्रसिद्ध वक्ता काजल हिंदुस्तानी ने दर्यापुर में गत शाम आयोजित एक विशाल जनसभा में किया.
पिछले कई दिनों से देश और महाराष्ट्र में ’लव जिहाद’ और ’लैंड जिहाद’ की घटनाएं बढ़ रही हैं. हालांकि शासन स्तर पर कानून के माध्यम से कार्रवाई की जा रही है, लेकिन समाज को भी सजग रहने की आवश्यकता है. इसी उद्देश्य से अमरावती जिले के दर्यापुर में हुंकार स्त्री शक्ति का कार्यक्रम के तहत प्रखर हिंदुत्ववादी वक्ता काजल हिंदुस्तानी ने नागरिकों को संबोधित किया.
गोपाल पाटिल अरबट मित्र परिवार की ओर से इस सभा का आयोजन किया गया था. कार्यक्रम की अध्यक्षता मोर्शी की नगराध्यक्ष प्रतीक्षा गुल्हाने ने की. मुख्य अतिथि के रूप में अंजनगांव के नगराध्यक्ष अविनाश गायगोले, शिवसेना जिला प्रमुख सुनील डिके, सहसंपर्क प्रमुख गजानन वाकोडे, मार्गदर्शक रवींद्र गणोरकर, महिला आघाडी जिला प्रमुख अरुणा इंगोले सहित जयश्री खातखीड़े, वंदना दारवेकर, सोनाली देशमुख, छायाताई निचल, मीनाक्षी कपले, डॉ. भावना भूतड़ा, मेघा भारती, प्रगति पोटे, वर्षा उफाले, विद्याताई अरबट, अपर्णा मालठाने, प्रा. प्रणिता बिजवे, वृंदा मुकतेवार, भाग्यश्री सगणे, प्रीति उमाले और डॉ. दिनेश म्हाला उपस्थित थे. कार्यक्रम का प्रास्ताविक अश्विनी अरबट ने किया, जबकि संचालन मनोज गव्हाणे और प्रा. मंजुषा ने किया.
शहर के बस स्टैंड चौक स्थित कन्या शाला के मैदान में आयोजित इस सभा में काजल हिंदुस्तानी को सुनने के लिए महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ी थी. इस दौरान दर्यापुर पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे.
काजल हिंदुस्तानी ने अपनी ओजस्वी वाणी से वर्तमान चुनौतियों का वास्तविक चित्रण प्रस्तुत किया. उन्होंने देव, देश और धर्म के संस्कार बच्चों में विकसित करने पर जोर दिया. सामाजिक कार्यकर्ता और शिवसेना नेता गोपाल अरबट के जन्मदिन के उपलक्ष्य में इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था. कार्यक्रम की सफलता के लिए महेंद्र भांडे, तुषार चौधरी, राहुल भुबर, नागोराव केने, प्रा. विनोद बिजवे, निलेश टवलारकर, विलास साखरे, नंदू निकोले, हेमंत उमाले, सागर गेठे, नीरज नागे, मुन्ना इसोकार, अतुल सगणे, विनय गावंडे, भूषण नागे, अमित ठाकरे, योगेश गायकवाड, सतीश नागे, सूरज पाचखडे, संदीप गुल्हाने, प्रवीण बायस्कर, बाप्पू साबल्हे, सौरभ वायझडे, गजू चांदुरकर, गणेश लाजूरकर, स्वप्निल गावंडे, रोशन कट्यारमल, गणेश धुराटे और कपिल पोटे सहित अनेक कार्यकर्ताओं ने परिश्रम किया.





