उद्धव ठाकरे का बच्चू कडू पर पहला खुला हमला, कहा
उन्हें घर बुलाकर मंत्री बनाया, वही मेरी गलती थी

* प्रहार संगठन के नाराज कार्यकर्ताओं का ठाकरे गुट में प्रवेश
* महाराष्ट्र की राजनीति में बढ़ी हलचल, कयासों का दौर तेज
मुंबई/दि.22-महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है. शिवसेना उबाठा के पार्टी प्रमुख व राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री उध्दव ठाकरे ने कभी अपने सहयोगी राज्यमंत्री रहे बच्चू कडू पर पहली बार खुलकर तीखा हमला बोला है. पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे ने कहा कि हमने उन्हें (बच्चू कडू को) घर बुलाकर मंत्री बनाया, लेकिन यही हमारी सबसे बडी गलती थी. साथ ही ठाकरे ने यह भी कहा कि जो लोग लोभ व लालच के कारण पाला बदलकर दूसरी तरफ चले गए, उन्हें जाने दीजिए. ठाकरे के इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं.
बता दें कि सन 2019 में हुए विधानसभा चुनाव पश्चात अचलपुर के तत्कालीन विधायक बच्चू कडू ने शिवसेना को अपना समर्थन दिया था. पश्चात उध्दव ठाकरे के नेतृत्व बनी तत्कालीन महाविकास आघाडी सरकार में बच्चू कडू को राज्यमंत्री बनाया गया था. लेकिन जब सेना नेता एकनाथ शिंदे ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ बगावत की थी और शिवसेना ने दो फाड हो गई थी, तब बच्चू कडू ने ठाकरे का साथ छोडकर शिंदे गुट का साथ दिया था. साथ ही कभी प्रहार जनशक्ति पार्टी के मुखिया रहे बच्चू कडू ने अब शिंदे गुटवाली शिवसेना में प्रवेश कर लिया हैं. जिसका राज्य के कई जिलों में प्रहार के पदाधिकारी द्बारा विरोश दर्शाया गया. साथ ही साथ आज मुंबई स्थित ‘मातोश्री’ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सोलापुर, परभणी और धाराशिव जिलों के प्रहार संगठन के कई कार्यकर्ताओं ने उद्धव ठाकरे की शिवसेना में प्रवेश किया. इसी अवसर पर उद्धव ठाकरे ने बच्चू कडू पर निशाना साधते हुए अपनी नाराजगी सार्वजनिक रूप से जाहिर की.
* नेता गए, लेकिन कार्यकर्ता आज भी हमारे साथ
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि हमारे साथ से जो लोग गए, वे पुराने शिवसैनिक थे. मैंने उन्हें घर बुलाकर मंत्री बनाया था, लेकिन वही मेरी गलती साबित हुई. जो लोग स्वार्थ और लालच के कारण चले गए, उन्हें जाने दीजिए. खुशी इस बात की है कि कार्यकर्ता आज भी हमारे साथ मजबूती से खड़े हैं. ठाकरे के इस बयान को बच्चू कडू द्वारा हाल ही में शिंदे गुट की शिवसेना में शामिल होने और प्रहार जनशक्ति पार्टी के विलय के संदर्भ में देखा जा रहा है. राजनीतिक जानकारों के अनुसार उद्धव ठाकरे ने पहली बार सीधे तौर पर बच्चू कडू को निशाने पर लिया है.
* प्रहार कार्यकर्ताओं ने बच्चू कडू पर लगाए विश्वासघात के आरोप
ठाकरे गुट में शामिल हुए प्रहार संगठन के कार्यकर्ताओं ने भी बच्चू कडू के खिलाफ खुलकर नाराजगी व्यक्त की. कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि बच्चू कडू ने संगठन और कार्यकर्ताओं को बेच दिया तथा सत्ता के लिए शिंदे गुट का दामन थाम लिया. उन्होंने कहा कि वे स्वाभिमान और विचारधारा की राजनीति में विश्वास रखते हैं, इसलिए उद्धव ठाकरे के साथ आए हैं. कार्यकर्ताओं ने यह भी कहा कि भविष्य में वे पूरी निष्ठा के साथ ठाकरे गुट के साथ कार्य करेंगे और संगठन को मजबूत बनाने का काम करेंगे.
* मैं पद के लिए नहीं, दिव्यांग मंत्रालय के लिए लड़ा
वहीं दूसरी ओर बच्चू कडू ने शिंदे गुट का साथ देने और शिंदे गुट वाली शिवसेना में शामिल होने से संबंधित अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा था कि वे किसी मंत्री पद या व्यक्तिगत लाभ के लिए शिवसेना में शामिल नहीं हुए हैं. उनका कहना था कि यदि उन्हें कोई पद चाहिए होता, तो वे गुवाहाटी जाने के समय ही मांग लेते. उन्होंने दावा किया कि वे दिव्यांगों के लिए अलग मंत्रालय और उनके अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं.
* राजनीतिक समीकरणों पर पड़ेगा असर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बच्चू कडू और उद्धव ठाकरे के बीच बढ़ती दूरी तथा प्रहार संगठन के कार्यकर्ताओं का ठाकरे गुट की ओर झुकाव आगामी स्थानीय निकाय और विधानसभा चुनावों में प्रभाव डाल सकता है. विशेष रूप से विदर्भ और मराठवाड़ा क्षेत्र में इसका राजनीतिक असर देखने को मिल सकता है.




