परीक्षा संशोधन बिल को लेकर संसद में हंगामा

छात्रों पर हुई कार्रवाई के चलते विपक्ष हुआ संतप्त, काम में डाला गतिरोध

* बिल पर चर्चा टली, स्पीकर ने सरकार-विपक्ष से सहमति बनाने को कहा
* मंत्री पद से इस्तीफा दे चुके धर्मेंद्र प्रधान के संसद में स्वागत पर भी सियासत गरमाई
नई दिल्ली/दि.27- परीक्षा संशोधन विधेयक पर सोमवार को लोकसभा में निर्धारित चर्चा विपक्ष के भारी हंगामे के कारण शुरू नहीं हो सकी. विपक्षी दल छात्रों के आंदोलन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई और कथित पिटाई के मुद्दे पर तत्काल बहस की मांग पर अड़े रहे, जिसके चलते सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई. कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसद नारेबाजी करते हुए वेल में पहुंच गए और छात्रों पर हुए कथित बल प्रयोग के मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग करने लगे. स्थिति को देखते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि सरकार और विपक्ष आपसी सहमति बनाकर सदन का सुचारू संचालन सुनिश्चित करें. उन्होंने दोनों पक्षों को शाम तक बातचीत कर समाधान निकालने का समय दिया.
हंगामे के चलते लोकसभा की कार्यवाही पहले दोपहर 12 बजे, फिर 2 बजे और बाद में शाम तक के लिए स्थगित करनी पड़ी. राज्यसभा में भी लगभग यही स्थिति रही, जहां विपक्ष ने छात्रों के आंदोलन और पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार को घेरने का प्रयास किया. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष स्वयं परीक्षा सुधारों पर चर्चा की मांग करता रहा है, लेकिन अब जब सरकार महत्वपूर्ण विधेयक लेकर आई है तो चर्चा नहीं होने दे रहा है. उन्होंने विपक्ष से छात्रों के हित में सार्थक बहस में भाग लेने की अपील की.
* क्या है लोक परीक्षा संशोधन विधेयक
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सोमवार को लोकसभा में लोक परीक्षा संशोधन विधेयक पेश किया. यह विधेयक वर्ष 2024 में बने सार्वजनिक परीक्षा कानून को और सख्त बनाने के उद्देश्य से लाया गया है. प्रस्तावित संशोधनों के अनुसार, पेपर लीक और परीक्षा में धांधली करने वालों के लिए कड़ी सजा और अधिक जुर्माने का प्रावधान किया जाएगा. राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें स्थापित करने का अधिकार मिलेगा. ऐसे मामलों की दैनिक सुनवाई सुनिश्चित की जाएगी. कानून यूपीएससी, एसएससी, रेलवे भर्ती बोर्ड, बैंकिंग भर्ती परीक्षाओं, एनटीए तथा अन्य केंद्रीय भर्ती एवं प्रवेश परीक्षाओं पर लागू होगा. सरकार का कहना है कि हाल के परीक्षा विवादों और देशभर में उठे छात्र आंदोलनों के बाद परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए यह संशोधन आवश्यक है.
* धर्मेंद्र प्रधान के स्वागत पर छिड़ा राजनीतिक विवाद
इसी बीच, पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफे के बाद पहली बार संसद पहुंचे. संसद परिसर में एनडीए सांसदों ने उनका शॉल और मिथिला पाग पहनाकर स्वागत किया तथा उनके समर्थन में नारे लगाए. इस घटनाक्रम पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की. कांग्रेस नेताओं ने इसे अनुचित बताते हुए कहा कि जिस मुद्दे पर देशभर में छात्रों ने आंदोलन किया, उस मामले में इस्तीफा देने वाले मंत्री का सम्मान किया जाना गलत संदेश देता है.
* छात्रों पर कार्रवाई को लेकर विपक्ष आक्रामक
विपक्षी दल लगातार मांग कर रहे हैं कि छात्रों के आंदोलन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर संसद में विस्तृत चर्चा कराई जाए और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए. कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, राजद और अन्य दलों ने सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया है. वहीं सरकार का कहना है कि छात्रों के हितों की रक्षा के लिए परीक्षा सुधारों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और संसद में विधेयक पर चर्चा कर उसे पारित कराया जाना चाहिए.
* राजनीतिक और संसदीय टकराव जारी
संसद के मानसून सत्र में नीट परीक्षा विवाद, पेपर लीक प्रकरण, छात्रों के आंदोलन और पुलिस कार्रवाई का मुद्दा लगातार केंद्र में बना हुआ है. अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बनती है या नहीं, ताकि लोक परीक्षा संशोधन विधेयक पर चर्चा आगे बढ़ सके. संसद में जारी गतिरोध के कारण फिलहाल परीक्षा सुधार से जुड़े इस महत्वपूर्ण विधेयक का भविष्य अनिश्चित बना हुआ है.

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