मान्य तिथियां रद्द, फिर भी वसूली में देरी क्यों?

पत्रवार्ता में राजस्व विभाग के कर्मियों ने उठाया सवाल

* सरकारी खजाने को लाखों की चपत का आरोप
* 50 लाख रुपये से अधिक की वसूली लंबित होने का दावा
* 15 अगस्त से आंदोलन की चेतावनी
अमरावती/दि.11- अमरावती राजस्व विभाग में वर्ष 2016-17 के दौरान कथित रूप से नियमों को ताक पर रखकर कर्मचारियों को दी गई मान्य तिथियों (नोटेशनल डेट) के मामले ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है. इस विषय को लेकर आज यहां बुलाई गई पत्रवार्ता में सेवानिवृत्त राजस्व कर्मचारी संगठन के यवतमाल अध्यक्ष एवं शिकायतकर्ता एस.पी. उर्फ नंदकुमार बुटे ने आरोप लगाया है कि तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा नियमों का उल्लंघन कर कुछ कर्मचारियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया, जिसके कारण शासन को लाखों रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ. उन्होंने दावा किया कि संबंधित कर्मचारियों से आज तक एक रुपये की भी वसूली नहीं की गई है.
पत्रकार परिषद में बताया गया कि वर्ष 2016-17 में तत्कालीन विभागीय आयुक्त कार्यालय से कुछ कर्मचारियों को नियम विरुद्ध मान्य तिथियों का लाभ दिया गया. आरोप है कि एक ही कर्मचारी की मान्य तिथि का लाभ दो-दो और तीन-तीन कर्मचारियों को प्रदान किया गया, जिससे उन्हें लाखों रुपये की बकाया राशि और सेवा में वरिष्ठता का लाभ मिला. इसके आधार पर कुछ कर्मचारियों को नायब तहसीलदार संवर्ग में पदोन्नति भी दी गई. पत्रवार्ता में दी गई जानकारी के अनुसार यवतमाल के कर्मचारियों ने इस निर्णय के खिलाफ अपील दायर की थी. बाद में मामला महाराष्ट्र प्रशासनिक न्यायाधिकरण (एमएटी) नागपुर पहुंचा. प्रकरण क्रमांक 956/2017 में 24 फरवरी 2020 को अपीलकर्ताओं अशोक कट्यारमल, शैलेन्द्र बुटे सहित अन्य के पक्ष में निर्णय आया. इस दौरान तत्कालीन विभागीय आयुक्त पियूष सिंह ने शासन की अनुमति लेकर पूरे मामले की पुनर्समीक्षा की और जिला प्रशासन से रिपोर्ट प्राप्त करने के बाद 1 अक्टूबर 2018 को सभी विवादित मान्य तिथियों को रद्द कर दिया था. इसके विरुद्ध संबंधित कर्मचारियों ने पुनर्विलोकन याचिका क्रमांक 07/2020 दायर की, जिसे भी महाराष्ट्र प्रशासनिक न्यायाधिकरण ने 18 अगस्त 2025 को खारिज कर दिया.
पत्रवार्ता में बुटे का कहना रहा कि जब मान्य तिथियों के आदेश रद्द हो चुके हैं और पुनर्विलोकन याचिका भी खारिज हो चुकी है, तब जिन कर्मचारियों ने इस आधार पर वेतनवृद्धि, एरियर और पदोन्नति का लाभ लिया, उनसे तत्काल वसूली की जानी चाहिए थी. साथ ही उन्हें पदोन्नति सूची में पूर्व स्थिति में लाया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया. उन्होंने दावा किया कि एस.डी. मुरतकर से लगभग 5.22 लाख रुपये, पी.जी. देशमुख से 5.33 लाख रुपये, एल.एस. तिवारी से 5.10 लाख रुपये तथा एस.डी. देशमुख से 66 हजार रुपये की वसूली बनती है. अन्य कर्मचारियों के आंकड़े प्रशासन द्वारा सार्वजनिक नहीं किए गए हैं.
शिकायतकर्ता बुटे ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ में रिट याचिका क्रमांक 1774/2025 दायर की है. याचिका पर सुनवाई के दौरान न्यायालय ने 2 अप्रैल 2025 को जिला कलेक्टर अमरावती को वसूली की कार्रवाई संबंधी शपथपत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे. साथ ही 2 जनवरी 2025 को दिए गए आवेदन पर निर्णय लेने का आदेश भी दिया गया था. बुटे का आरोप है कि प्रशासन ने वसूली के मुद्दे पर कार्रवाई करने के बजाय शिकायत आवेदन को ही खारिज कर दिया, जिससे पूरे मामले को दबाने का प्रयास प्रतीत होता है.
शिकायतकर्ता के अनुसार 20 जनवरी 2026 को जिला कलेक्टर कार्यालय की ओर से उन्हें पत्र देकर बताया गया कि संबंधित कर्मचारियों से वसूली की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. हालांकि अब तक कितनी राशि वसूल हुई, इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई. बुटे का दावा है कि आज तक एक भी पैसा वसूल नहीं किया गया है. उन्होंने आरोप लगाया कि वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा विभिन्न विभागों से जानकारी मांगे जाने के बावजूद संबंधित कार्यालयों से आवश्यक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है.
बुटे का कहना है कि राजस्व प्रशासन में 20 से अधिक कर्मचारियों की मान्य तिथियां रद्द की गई थीं. उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर ही वसूली की राशि 16 लाख रुपये से अधिक बैठती है, जबकि अन्य कर्मचारियों की जानकारी अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई है. उनका अनुमान है कि कुल राशि 50 लाख रुपये से अधिक हो सकती है. उन्होंने मांग की कि विभागीय आयुक्त और जिला कलेक्टर इस पूरे मामले पर संयुक्त बैठक लेकर स्थिति स्पष्ट करें तथा वसूली और पदोन्नति संबंधी कार्रवाई का विवरण सार्वजनिक करें.
पत्रवार्ता में नंदकुमार बुटे ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने शीघ्र कार्रवाई नहीं की और पूरे मामले पर स्पष्टीकरण नहीं दिया, तो 15 अगस्त को विभागीय आयुक्त कार्यालय के समक्ष आंदोलन किया जाएगा. उन्होंने आरोप लगाया कि यह केवल प्रशासनिक त्रुटि नहीं, बल्कि गलत दस्तावेजों के आधार पर आर्थिक लाभ प्राप्त करने का गंभीर मामला है, जिसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए. इस पत्रवार्ता में वनविभाग सेवानिवृत्त कर्मचारी संगठन के विजय सावरकर तथा राज्य मध्यवर्ती कर्मचारी संगठन के श्याम कपाले, सुरेश शिर्के व भास्कर रिठे भी उपस्थित थे.

 

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