जमानत की शर्तों का उल्लंघन पडा भारी
शेख रहिम उर्फ हुंगा की जमानत हुई रद्द

* एमडी ड्रग्स तस्करी के मामले में हुई थी गिरफ्तारी
* ट्रायल कोर्ट ने दी थी जमानत, हुंगा ने जमानत की शर्तों का किया उल्लंघन
* पुलिस के साथ जांच में भी सहयोग नहीं किया, पुलिस पहुंची अदालत
* सत्र न्यायालय ने जमानत रद्द कर तीन दिन में आत्मसमर्पण के दिए आदेश
अमरावती/दि.4- एमडी (मेफेड्रोन) ड्रग्स की तस्करी और बिक्री के चर्चित मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपी शेख रहीम उर्फ हुंगा शेख अमन की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं. अमरावती सत्र न्यायालय ने जमानत की शर्तों का उल्लंघन करने और जांच में सहयोग नहीं करने के आरोपों को गंभीर मानते हुए उसकी नियमित जमानत रद्द कर दी है. न्यायालय ने आरोपी को तीन दिनों के भीतर जांच अधिकारी के समक्ष आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया है. आदेश का पालन नहीं करने पर पुलिस को उसे गिरफ्तार कर हिरासत में लेने की कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं.
गौरतलब है कि शेख रहीम उर्फ हुंगा शेख अमन को शहर पुलिस की अपराध शाखा ने एमडी ड्रग्स की तस्करी और अवैध बिक्री से जुड़े मामले में मामले में करीब तीन-चार माह पहले गिरफ्तार किया था. इस गिरफ्तारी को जिले में नशीले पदार्थों के कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की बड़ी कार्रवाई माना गया था. गिरफ्तारी के बाद आरोपी न्यायिक हिरासत में था, लेकिन स्वास्थ्य संबंधी कारणों और चिकित्सकीय आधार पर उसे 27 मार्च 2026 को नियमित जमानत प्रदान की गई थी. जमानत देते समय न्यायालय ने स्पष्ट शर्त लगाई थी कि अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद आरोपी प्रत्येक बुधवार को निर्धारित समय में संबंधित पुलिस स्टेशन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएगा तथा जांच एजेंसी को पूरा सहयोग करेगा. हालांकि, राज्य सरकार की ओर से दायर जमानत निरस्तीकरण आवेदन में आरोप लगाया गया कि अस्पताल से छुट्टी मिलने के बावजूद आरोपी ने पुलिस स्टेशन में नियमित हाजिरी नहीं लगाई और जांच अधिकारियों के साथ सहयोग भी नहीं किया. जिसके चलते शेख रहिम उर्फ हुंगा को दी गई जमानत को रद्द करवाने शहर पुलिस ने स्थानिय अदालत में याचिका दायर की.
इस याचिका पर सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने न्यायालय को बताया कि आरोपी ने जमानत प्राप्त करने के लिए अपनी स्वास्थ्य स्थिति का आधार बनाया था, लेकिन बाद में उसने जमानत की शर्तों का पालन नहीं किया. इससे जांच प्रक्रिया प्रभावित हुई और न्यायालय द्वारा दी गई राहत का दुरुपयोग हुआ. राज्य की ओर से यह भी कहा गया कि आरोपी का आचरण जमानत की शर्तों का स्पष्ट उल्लंघन है. वहीं, बचाव पक्ष ने दलील दी कि आरोपी लगातार उपचाराधीन था और स्वास्थ्य कारणों से नियमित रूप से उपस्थित नहीं हो सका. बचाव पक्ष ने चिकित्सा उपचार से संबंधित दस्तावेज भी न्यायालय में प्रस्तुत किए और दावा किया कि अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद आरोपी ने जांच अधिकारी से संपर्क किया था. हालांकि न्यायालय ने उपलब्ध दस्तावेजों और रिकॉर्ड का परीक्षण करने के बाद पाया कि आरोपी ने अपनी अनुपस्थिति की जानकारी जांच अधिकारी को नहीं दी और न ही यह साबित कर सका कि उसकी बीमारी इतनी गंभीर थी कि वह पुलिस स्टेशन में हाजिरी दर्ज कराने या जांच अधिकारी को सूचित करने में असमर्थ था.
दोनों पक्षों का युक्तिवाद सुनने के बाद तृतीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधिश पी.पी. शर्मा की अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी को मानवीय और चिकित्सकीय आधार पर राहत दी गई थी. ऐसे में उसके ऊपर जमानत की शर्तों का पालन करने की विशेष जिम्मेदारी थी. लेकिन उसने न केवल शर्तों का उल्लंघन किया बल्कि जांच में अपेक्षित सहयोग भी नहीं किया. यह न्यायालय द्वारा प्रदान की गई स्वतंत्रता का दुरुपयोग है और ऐसी स्थिति में जमानत रद्द किया जाना उचित है. न्यायालय ने राज्य सरकार का आवेदन स्वीकार करते हुए शेख रहीम उर्फ हुंगा शेख अमन की नियमित जमानत रद्द कर दी. साथ ही उसे तीन दिन के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया गया है. यदि आरोपी आत्मसमर्पण नहीं करता है तो जांच अधिकारी को उसकी गिरफ्तारी सुनिश्चित करने और कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई करने के आदेश दिए गए हैं. न्यायालय ने आरोपी द्वारा जमा किए गए जमानत बांड भी निरस्त कर दिए हैं. एमडी ड्रग्स तस्करी मामले में आरोपी की जमानत रद्द होने को जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है.
इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से एड. गजानन सोनुने द्वारा सफल पैरवी की गई. जिनके युक्तिवाद को ग्राह्य मानते हुए अदालत ने आरोपी शेख रहिम उर्फ हुंगा को दी गई जमानत को रद्द करने का आदेश जारी किया. कानून विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश उन आरोपियों के लिए भी एक स्पष्ट संदेश है, जिन्हें विशेष परिस्थितियों में राहत दी जाती है, लेकिन वे न्यायालय की शर्तों का पालन नहीं करते.





