अकोला जीएमसी में वायरल वीडियो से हड़कंप

बीमार पति को पीठ पर उठाकर भटकती महिला

* डीन की सफाई के साथ जांच के आदेश
अमरावती /दि.8 – अकोला के शासकीय मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) से एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है, जहां सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. वीडियो में एक महिला अपने बीमार पति को पीठ पर उठाकर अस्पताल परिसर में अलग-अलग विभागों में भटकती नजर आ रही है.
जानकारी के मुताबिक महिला आदिवासी समाज से संबंधित बताई जा रही है और उसके साथ एक छोटा बच्चा भी मौजूद था. वीडियो में महिला अपने पति को पीठ पर लादकर इलाज के लिए इधर-उधर जाती दिखाई दे रही है. इस दौरान मौके पर मौजूद कर्मचारियों द्वारा तत्काल सहायता न मिलने के आरोप भी सामने आए हैं. वीडियो वायरल होने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया. इस संदर्भ में जीएमसी के डीन डॉ. संजय सोनोन ने फोन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कुछ लोग जानबूझकर अस्पताल की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं और यह वीडियो भी उसी कड़ी का हिस्सा हो सकता है. उन्होंने यह भी बताया कि वीडियो में कर्मचारियों द्वारा वीडियो न बनाने के लिए मना किए जाने की आवाज स्पष्ट रूप से सुनी जा सकती है.
डीन के अनुसार, संबंधित महिला संभवतः अशिक्षित थी और उसे अस्पताल की प्रक्रिया की पूरी जानकारी नहीं थी. उन्होंने बताया कि इलाज के लिए आवश्यक दस्तावेज, जैसे आधार कार्ड की प्रक्रिया पूरी करनी होती है. साथ ही, जिस समय महिला अस्पताल पहुंची, उस समय ओपीडी बंद हो चुकी थी, जिसके कारण वह सीधे अपने पति को पीठ पर उठाकर अंदर चली गई. डॉ. सोनोन ने यह भी स्पष्ट किया कि महिला ने वहां मौजूद कर्मचारियों या आरएमओ से स्ट्रेचर या व्हीलचेयर की मांग नहीं की थी. हालांकि, उन्होंने माना कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दे दिए गए हैं. हमने इस पूरे प्रकरण में जांच शुरू कर दी है कि कहीं किसी स्तर पर लापरवाही तो नहीं हुई. संबंधित अधिकारियों द्वारा इसकी जांच की जा रही है, डीन ने कहा.
गौरतलब है कि इससे पहले भी जीएमसी में स्ट्रेचर और व्हीलचेयर की उपलब्धता को लेकर सवाल उठते रहे हैं. कई बार मरीजों के परिजनों को ही अपने बीमार रिश्तेदारों को एक विभाग से दूसरे विभाग तक ले जाते हुए देखा गया है. फिलहाल, यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि जहां ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी की चर्चा होती है, वहीं अब शहर के बड़े सरकारी अस्पतालों में भी ऐसी तस्वीरें सामने आना चिंता का विषय है. यह मामला न केवल व्यवस्था की खामियों को उजागर करता है, बल्कि जागरूकता और सुविधा के बीच की दूरी को भी दर्शाता है.

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